Car Mileage New Rules India 2026: कार कंपनियों के दावों की खुलेगी पोल! सरकार ला रही नया माइलेज नियम

Car Mileage New Rules India 2026: अब कंपनियों को बताना होगा कार का असली माइलेज, सरकार की नई तैयारी

Jyotsana Singh
Published on: 18 May 2026 7:30 AM IST
New car mileage rule India WLTP real fuel efficiency system 2026
X

Car Mileage WLTP New Rules India 2026

Car Mileage New Rules India 2026: भारत में कार खरीदते समय ज्यादातर लोगों के मन में कार की कीमत के साथ कार के माइलेज को लेकर सवाल रहते हैं। पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच अब कार का माइलेज सिर्फ फीचर नहीं बल्कि लोगों के बजट से जुड़ा सबसे बड़ा फैक्टर बन चुका है। लेकिन लंबे समय से ग्राहकों की शिकायत रही है कि कंपनियां जिस माइलेज का दावा करती हैं, असल सड़क पर कार उतना माइलेज नहीं देती। यही वजह है कि अब केंद्र सरकार एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। सरकार भारत में जल्द ही WLTP यानी नया माइलेज टेस्टिंग सिस्टम (Worldwide Harmonised Light Vehicles Test Procedure) सिस्टम लागू करने की तैयारी कर रही है। माना जा रहा है कि इसके लागू होने के बाद कार कंपनियों को ज्यादा वास्तविक और पारदर्शी माइलेज आंकड़े दिखाने होंगे। इससे ग्राहकों को कार खरीदते समय सही जानकारी मिल सकेगी और कंपनियों द्वारा बढ़ा-चढ़ाकर किए जाने वाले दावों पर भी लगाम लगेगी। ऑटो सेक्टर के लिए इसे आने वाले समय का बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

आखिर क्या है WLTP सिस्टम?

WLTP एक आधुनिक वाहन टेस्टिंग सिस्टम है, जिसे दुनिया के कई देशों में पहले से इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कारों की फ्यूल एफिशिएंसी, प्रदूषण और परफॉर्मेंस को वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर मापना है।

पुराने टेस्टिंग सिस्टम में कारों को नियंत्रित लैब माहौल में सीमित स्पीड और तय परिस्थितियों में चलाकर माइलेज निकाला जाता था। लेकिन असल जिंदगी में सड़कें, ट्रैफिक, मौसम, ब्रेकिंग और ड्राइविंग स्टाइल लगातार बदलते रहते हैं। ऐसे में लैब वाला माइलेज आम लोगों के अनुभव से मेल नहीं खाता। WLTP सिस्टम इसी कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है। इसमें कार को अलग-अलग परिस्थितियों में टेस्ट किया जाता है ताकि जो माइलेज सामने आए वह वास्तविक ड्राइविंग के ज्यादा करीब हो।

पुराने सिस्टम से कितना अलग होगा नया तरीका?

अभी भारत में कंपनियां ARAI टेस्टिंग के आधार पर माइलेज आंकड़े जारी करती हैं। यह टेस्टिंग नियंत्रित परिस्थितियों में होती है, इसलिए कई बार वास्तविक माइलेज उससे काफी कम निकलता है।

WLTP सिस्टम में टेस्टिंग ज्यादा विस्तृत होगी। इसमें हाईवे ड्राइविंग, शहर का ट्रैफिक, तेज और धीमी स्पीड, अचानक ब्रेकिंग और अलग-अलग तापमान जैसी स्थितियों को शामिल किया जाएगा। यही वजह है कि WLTP के तहत सामने आने वाला माइलेज आंकड़ा ज्यादा भरोसेमंद माना जाता है। हालांकि कई मामलों में कंपनियों द्वारा दिखाया जाने वाला माइलेज पहले से कम भी दिखाई दे सकता है, क्योंकि अब आंकड़े ज्यादा वास्तविक होंगे।

ग्राहकों को क्या मिलेगा फायदा?

अगर यह सिस्टम भारत में लागू होता है तो सबसे बड़ा फायदा सीधे ग्राहकों को मिलेगा। कार खरीदने वाले लोग अब ज्यादा सही माइलेज आंकड़े देख पाएंगे। इससे उन्हें यह समझने में आसानी होगी कि कार चलाने में हर महीने कितना फ्यूल खर्च आएगा। खासतौर पर मिडिल क्लास परिवारों के लिए यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि कार खरीदने के बाद सबसे बड़ा खर्च ईंधन पर ही होता है। इसके अलावा ग्राहकों का भरोसा भी बढ़ेगा। अभी कई लोग नई कार खरीदने के बाद माइलेज कम मिलने से निराश हो जाते हैं। लेकिन नए सिस्टम से कंपनियों और ग्राहकों के बीच पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।

कार कंपनियों के लिए क्यों बढ़ेगी चुनौती?

WLTP सिस्टम लागू होने के बाद ऑटो कंपनियों के लिए सिर्फ विज्ञापन के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करना आसान नहीं रहेगा। अब कंपनियों को वास्तव में बेहतर माइलेज देने वाली टेक्नोलॉजी पर काम करना पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कंपनियां इंजन एफिशिएंसी, हाइब्रिड टेक्नोलॉजी और हल्के वाहन डिजाइन पर ज्यादा ध्यान देंगी। कई कंपनियों को अपने मौजूदा मॉडल्स की टेस्टिंग दोबारा करनी पड़ सकती है। इसके अलावा मार्केटिंग स्ट्रेटेजी में भी बदलाव आ सकता है। अभी तक कंपनियां बड़े माइलेज आंकड़े दिखाकर ग्राहकों को आकर्षित करती थीं, लेकिन नए सिस्टम के बाद उन्हें ज्यादा वास्तविक दावे करने होंगे।

इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड कारों पर भी पड़ेगा असर

यह बदलाव सिर्फ पेट्रोल और डीजल कारों तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों की टेस्टिंग में भी WLTP की बड़ी भूमिका हो सकती है।

आज EV कंपनियां जिस ड्राइविंग रेंज का दावा करती हैं, वास्तविक उपयोग में वह कई बार कम निकलती है। ऐसे में WLTP जैसे सिस्टम से इलेक्ट्रिक कारों की असली रेंज और बैटरी परफॉर्मेंस का ज्यादा सटीक अंदाजा लगाया जा सकेगा। इससे ग्राहकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि एक बार चार्ज करने पर कार वास्तव में कितनी दूरी तय कर सकती है।

दुनिया के कई देशों में पहले से लागू है सिस्टम

यूरोप समेत कई देशों में WLTP पहले से लागू है। वहां इसे वाहन टेस्टिंग का अधिक विश्वसनीय तरीका माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस सिस्टम को अपनाने की वजह से कार कंपनियों को वैश्विक मानकों के हिसाब से वाहन तैयार करने में भी आसानी होती है। भारत में इसके लागू होने से घरेलू ऑटो इंडस्ट्री वैश्विक मानकों के और करीब पहुंच सकती है। इससे भारतीय ग्राहकों को भी बेहतर और पारदर्शी जानकारी मिलने लगेगी।

ऑटो सेक्टर में बढ़ सकती है पारदर्शिता

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ऑटो इंडस्ट्री में पारदर्शिता सबसे बड़ा मुद्दा बनने वाली है। ग्राहक अब सिर्फ डिजाइन और फीचर्स नहीं बल्कि वास्तविक परफॉर्मेंस देखना चाहते हैं। WLTP सिस्टम इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे कंपनियों और ग्राहकों के बीच भरोसा मजबूत हो सकता है। साथ ही बाजार में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी क्योंकि अब कंपनियों को सिर्फ दावे नहीं बल्कि असली प्रदर्शन दिखाना होगा। अगर सरकार इस सिस्टम को जल्द लागू करती है तो आने वाले वर्षों में भारत में कार खरीदने का तरीका काफी बदल सकता है। ग्राहकों को ज्यादा ईमानदार माइलेज आंकड़े मिलेंगे और कार कंपनियों को भी अपनी तकनीक को और बेहतर बनाने पर ध्यान देना होगा।

Jyotsana Singh

Jyotsana Singh

Editor

Next Story