आकाश आनंद की सियासी बर्बादी के पीछे कौन? जानिए मायावती के फैसले के पीछे की बड़ी वजह

BSP Aakash Anand Crisis: आकाश आनंद को मायावती ने फिर BSP के राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटाया, जबकि ईशान आनंद को बड़ी जिम्मेदारी मिली। आखिर आकाश के सियासी पतन के पीछे कौन है और मायावती ने इतना बड़ा फैसला क्यों लिया?

Harsh Srivastava
Published on: 10 Sept 2026 8:37 AM IST
आकाश आनंद की सियासी बर्बादी के पीछे कौन? जानिए मायावती के फैसले के पीछे की बड़ी वजह
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BSP Akash Anand Crisis: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के भीतर इन दिनों ऐसा सियासी बवंडर उठा है, जिसने देश भर के राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। दलित राजनीति का सबसे बड़ा चेहरा मानी जाने वाली बसपा प्रमुख मायावती ने एक बार फिर ऐसा अप्रत्याशित फैसला लिया है, जिसने पार्टी के भावी नेतृत्व पर बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। कभी मायावती के राजनीतिक वारिस के रूप में देखे जाने वाले आकाश आनंद को तीसरी बार राष्ट्रीय समन्वयक के पद से हटाकर किनारे कर दिया गया है। लेकिन इस बार का सियासी झटका पहले से कहीं ज्यादा गहरा है, क्योंकि मायावती ने आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद (ईशू) को संगठन में तीसरे नंबर की बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद हर किसी की जुबान पर बस एक ही सवाल तैर रहा है कि आखिर वह कौन सा शख्स है, जिसकी वजह से आकाश आनंद का बना-बनाया करियर दांव पर लग गया है?

आकाश आनंद का डिमोशन

बसपा के संगठनात्मक ढांचे में हुए इस अचानक फेरबदल से पार्टी कार्यकर्ताओं में हड़कंप मच गया है। मायावती ने न केवल आकाश आनंद को नंबर दो की हैसियत से बेदखल किया, बल्कि उनके छोटे भाई ईशान आनंद को सीधे संगठन में शीर्ष स्तर पर स्थापित कर दिया है। नए समीकरणों के मुताबिक बसपा में अब सबसे ऊपर मायावती हैं, दूसरे स्थान पर उनके भाई आनंद कुमार और तीसरे नंबर पर ईशान आनंद आ चुके हैं। इस कठोर फैसले की कड़वाहट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निराश आकाश आनंद ने अपने सभी सोशल मीडिया हैंडल से पार्टी पदाधिकारी का पद हटाकर खुद को केवल एक साधारण समर्थकों की श्रेणी में सीमित कर लिया है।

क्या मायावती को सता रही है पार्टी छिन जाने की चिंता?

राजनीतिक विश्लेषकों और अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि मायावती के इस चौंकाने वाले कदम के पीछे कोई प्रशासनिक नाकामी नहीं, बल्कि एक गहरा मानसिक डर है। यह डर आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ की बढ़ती राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से जुड़ा है। मायावती को यह चिंता लगातार सता रही है कि आने वाले समय में आकाश आनंद के जरिए उनके ससुर पूरे संगठन पर काबिज न हो जाएं। कांशीराम और मायावती द्वारा दशकों के संघर्ष से खड़ी की गई पार्टी का नियंत्रण किसी भी सूरत में आकाश के ससुराल वालों के पास न चला जाए, इसी डर ने मायावती को यह सख्त और कठोर निर्णय लेने पर मजबूर किया है।

ससुर रिश्ते तोड़ने के बाद भी नहीं टला संकट

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे त्रासदीपूर्ण सच्चाई यह है कि आकाश आनंद ने मायावती के विश्वास को जीतने के लिए अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ से हर तरह का नाता तोड़ लिया था। जब उन्हें अहसास हुआ कि बहनजी उनके ससुर से सख्त नाराज हैं, तो उन्होंने पारिवारिक आयोजनों में जाना, फोन पर बात करना और मुलाकातें तक बंद कर दी थीं। लेकिन इसके बावजूद अशोक सिद्धार्थ पर्दे के पीछे से पार्टी के अन्य समन्वयकों और बड़े नेताओं से संपर्क साधे हुए थे। जब-जब उनके इस बैकडोर दखल की जानकारी मायावती तक पहुंची, तब-तब इसका खामियाजा सीधे तौर पर आकाश आनंद को अपने पद से हाथ धोकर चुकाना पड़ा।

क्या अब कभी नहीं हो पाएगी आकाश की वापसी?

मायावती के राजनीतिक मिजाज को करीब से जानने वालों का मानना है कि जब वे किसी पर से भरोसा खो देती हैं, तो अपना फैसला बदलना उनके स्वभाव में नहीं होता। अब जबकि उन्होंने ईशान आनंद के रूप में पार्टी के भीतर एक नया और समानांतर नेतृत्व खड़ा कर दिया है, तो आकाश आनंद के लिए पुरानी प्रतिष्ठा हासिल करना लगभग नामुमकिन सा नजर आ रहा है। अपने ही ससुर की छाया और पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी के बीच फंसे आकाश आनंद का राजनीतिक भविष्य फिलहाल गहरे अंधकार में लटक गया है।

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Harsh Srivastava

Former Content Writer Mail ID - newstrack@gmail.comharshsri764@gmail.com

Harsh Srivastava is a journalist currently working as Desk In-Charge at NewsTrack, Lucknow. He began his journalism career in 2023 and has previously worked with Hindustan, Times Internet and India News. He holds a Master’s degree in Journalism and Mass Communication (MJMC). His key areas of interest include politics, elections and crime, with a wider focus on governance, public policy and current affairs. He writes research-driven and SEO-focused digital stories, combining journalistic depth with an understanding of digital audiences. Harsh has covered the 2026 West Bengal Assembly Election, several state elections and bypolls, and extensively followed the Delhi CJP protest and its developments. His work includes news reports, explainers, features and analytical stories. Originally from Varanasi, Harsh has worked across Varanasi, Delhi and Lucknow, with experience spanning reporting, digital journalism, content writing and editorial operations.

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