अखिलेश यादव के 'चवन्नी' बयान पर गरमाई सियासत, जयंत चौधरी का पलटवार; नंदगांव में RLD समर्थकों का फूटा गुस्सा

अखिलेश यादव के 'चवन्नी से रुपया' वाले बयान पर RLD में नाराजगी बढ़ गई है। जयंत चौधरी ने पलटवार किया तो नंदगांव में RLD कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया।

Alakha Singh
Published on: 20 Aug 2026 3:57 PM IST (Updated on: 20 Aug 2026 4:04 PM IST)
अखिलेश यादव के चवन्नी बयान पर गरमाई सियासत, जयंत चौधरी का पलटवार; नंदगांव में RLD समर्थकों का फूटा गुस्सा
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Akhilesh Yadav Chavanni Statement on Jayant Chaudhary: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की सियासत गरमाने लगी है। समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव के राष्ट्रीय लोकदल (RLD) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को लेकर दिए गए कथित 'चवन्नी' वाले बयान ने सपा और RLD के बीच पुरानी तल्खी को फिर सामने ला दिया है। अब जयंत चौधरी के पलटवार के बाद विवाद और बढ़ गया है।

अखिलेश यादव ने 16 अगस्त को लखनऊ में वीरांगना महारानी अवंती बाई लोधी की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में पुराने सहयोगियों पर निशाना साधते हुए कहा था कि “हम लोगों ने चवन्नी का रुपया बना दिया, फिर भी हमें छोड़कर चले गए।” अखिलेश ने इस दौरान किसी नेता का नाम नहीं लिया, लेकिन बयान को जयंत चौधरी और RLD के सपा से अलग होकर भाजपा के नेतृत्व वाले NDA में जाने से जोड़कर देखा गया।

जयंत चौधरी ने दिया करारा जवाब

अखिलेश यादव के बयान पर जयंत चौधरी ने पलटवार करते हुए लोकतंत्र में जनता की भूमिका को सबसे ऊपर बताया। जयंत ने कहा कि जनता जनार्दन ही सब कुछ बनाती और बिगाड़ती है। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव कुछ ऐसा बयान देते हैं कि उनके सहयोगी सोचने को मजबूर हो जाएं। उनके इस जवाब को अखिलेश यादव के 'चवन्नी से रुपया' वाले तंज का सीधा राजनीतिक उत्तर माना जा रहा है।


नंदगांव में RLD कार्यकर्ताओं की नाराजगी

इस बयान के बाद मथुरा के नंदगांव विकासखंड में RLD कार्यकर्ता भी खुलकर सामने आए। कार्यकर्ताओं ने अखिलेश यादव की टिप्पणी को अनुचित और अपमानजनक बताते हुए नाराजगी जताई।

RLD समर्थकों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अखिलेश यादव को पुराने सहयोगियों पर तंज कसते हुए यह कहते सुना जा सकता है कि “हमने चवन्नी का रुपया बना दिया और उन्होंने हमें ही छोड़ दिया।”

कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इस तरह की टिप्पणी राजनीतिक सहयोगियों और किसान राजनीति से जुड़े नेताओं के सम्मान के खिलाफ है। उनका कहना है कि गठबंधन में राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों से इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणी उचित नहीं है।

RLD छात्र संगठन भी उतरा मैदान में

विवाद अब केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार RLD के छात्र संगठन ने भी अखिलेश यादव की 'चवन्नी से रुपया' टिप्पणी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। RLD समर्थकों ने इसे जयंत चौधरी की राजनीतिक हैसियत को कमतर दिखाने की कोशिश बताया है।

RLD की ओर से यह तर्क भी सामने आया है कि समाजवादी पार्टी की अपनी राजनीतिक यात्रा में चौधरी चरण सिंह परिवार और किसान राजनीति की विरासत का योगदान रहा है। पार्टी नेताओं ने अखिलेश की टिप्पणी को इसी संदर्भ में निशाने पर लिया है।

2022 में साथ थे अखिलेश और जयंत, 2024 में बदला समीकरण

अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच मौजूदा राजनीतिक टकराव की जड़ 2022 के विधानसभा चुनाव के गठबंधन तक जाती है। उस चुनाव में सपा और RLD ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। RLD ने 33 सीटों पर चुनाव लड़कर 8 सीटें जीती थीं।

हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले RLD ने सपा से दूरी बना ली और भाजपा के नेतृत्व वाले NDA में शामिल हो गई। यही राजनीतिक बदलाव अब अखिलेश यादव के निशाने पर दिखाई दे रहा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, RLD ने अखिलेश के हालिया 'चवन्नी' संदर्भ को जयंत चौधरी और पार्टी के NDA में जाने पर कटाक्ष के रूप में लिया है।

अखिलेश का NDA के सहयोगियों पर भी निशाना

अखिलेश यादव ने केवल जयंत चौधरी पर ही निशाना नहीं साधा। उन्होंने भाजपा के सहयोगी दलों को लेकर भी कहा है कि भाजपा की चुनावी सफलता में सहयोगियों की भूमिका महत्वपूर्ण है और सहयोगियों को अधिक सीटें मिलनी चाहिए।

हालिया राजनीतिक बयानबाजी में अखिलेश ने दावा किया है कि भाजपा अपने सहयोगियों को साथ बनाए रखने के लिए उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में सीटें देने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्टों में उनके हवाले से RLD के लिए 73 और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के लिए 39 सीटों की संभावित चर्चा सामने आई है। हालांकि यह आंकड़े फिलहाल राजनीतिक दावे हैं, आधिकारिक सीट बंटवारा नहीं।

पश्चिमी यूपी में असर की चर्चा

'चवन्नी' विवाद का सबसे बड़ा राजनीतिक असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में देखा जा सकता है, जहां RLD का किसान और जाट राजनीति से जुड़ा पारंपरिक प्रभाव माना जाता है। ऐसे में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच बढ़ती बयानबाजी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी यूपी के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

फिलहाल विवाद ने एक बार फिर सपा-RLD के पुराने गठबंधन, जयंत चौधरी के NDA में जाने और पश्चिमी यूपी में दोनों दलों की राजनीतिक जमीन को लेकर बहस तेज कर दी है। आने वाले दिनों में यदि दोनों पक्षों की ओर से और तीखे बयान सामने आते हैं तो यह मुद्दा 2027 चुनाव की गठबंधन राजनीति का बड़ा सियासी नैरेटिव बन सकता है।

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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