BJP के वोट बैंक में सेंध लगाने की तैयारी! अखिलेश ने क्यों जुटाए ये बड़े चेहरे? इन वोटों पर बड़ा दांव

Akhilesh Yadav PDA Strategy: यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने PDA अभियान को मजबूत करते हुए बीजेपी के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप समेत कई नेताओं को सपा में शामिल कराया। कीर्ति कश्यप को टिकट देने का भी वादा किया।

Aditya Kumar Verma
Published on: 28 Oct 2026 11:37 AM IST
Akhilesh Yadav PDA Strategy
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Akhilesh Yadav PDA Strategy: उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Election) को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। अखिलेश यादव अब अपने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) अभियान को और मजबूत करने में जुटे हैं। इसी रणनीति के तहत मंगलवार को लखनऊ में आंवला से बीजेपी के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप (Dharmendra Kashyap) और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप (Kirti Kashyap) समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए।

बताया जा रहा है कि हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Election) में टिकट नहीं मिलने से धर्मेंद्र कश्यप बीजेपी से नाराज चल रहे थे। अब उनके समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद अखिलेश यादव ने इसे पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक फायदा बताया है। लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने कहा कि धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी के पीडीए आंदोलन से जुड़ने के बाद बरेली, रुहेलखंड और पूरे उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की ताकत कई गुना बढ़ गई है।

कीर्ति कश्यप को विधानसभा टिकट देने का वादा

धर्मेंद्र कश्यप के साथ उनकी बेटी कीर्ति कश्यप के सपा में शामिल होने को भी आगामी विधानसभा चुनाव (UP Assembly Election) की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कीर्ति कश्यप को विधानसभा चुनाव का टिकट देने का वादा भी किया।

अखिलेश यादव ने कहा, "पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप के PDA आंदोलन से जुड़ने से बरेली, रुहेलखंड और पूरे उत्तर प्रदेश में हमारी ताकत कई गुना बढ़ गई है।"

धर्मेंद्र कश्यप अकेले ऐसे नेता नहीं हैं, जिन्होंने हाल के दिनों में समाजवादी पार्टी का दामन थामा है। अखिलेश यादव लगातार अलग-अलग पिछड़े और दलित समुदायों से जुड़े प्रभावशाली नेताओं को पार्टी में शामिल कर रहे हैं।

बीजेपी के वोट बैंक पर अखिलेश की नजर

अखिलेश यादव की इस रणनीति में गैर-यादव ओबीसी (Non-Yadav OBC) और गैर-जाटव दलित (Non-Jatav Dalit) समुदायों पर खास फोकस नजर आ रहा है। इन समुदायों को उत्तर प्रदेश में बीजेपी के समर्थक वोट बैंक के तौर पर माना जाता है। ऐसे में समाजवादी पार्टी इन समुदायों के प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़कर अपना वोट शेयर बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

इसी रणनीति के तहत सोमवार को राम बहादुर पासी (Ram Bahadur Pasi) समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। राम बहादुर पासी पूर्व आईएएस अधिकारी (Former IAS Officer) रह चुके हैं और पहले बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) से जुड़े थे। उन्होंने 2017 का विधानसभा चुनाव (2017 Assembly Election) मोहनलालगंज से बीएसपी के टिकट पर लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार से कड़े मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा था।

इसके बाद राम बहादुर पासी ने बीएसपी छोड़ दी और 2022 में बीजेपी में शामिल हो गए थे। अब उन्होंने बीजेपी का साथ छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है।

दारा सिंह प्रजापति भी सपा में शामिल

राम बहादुर पासी के साथ बीएसपी के पूर्व नेता दारा सिंह प्रजापति (Dara Singh Prajapati) भी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। दारा सिंह प्रजापति ने 2024 का लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) मुजफ्फरनगर से बीएसपी के टिकट पर लड़ा था। उन्हें इस चुनाव में 1.43 लाख वोट मिले थे।

दारा सिंह प्रजापति को मिले वोटों का असर चुनाव परिणाम पर भी पड़ा था। उनके चुनाव लड़ने के कारण बीजेपी उम्मीदवार संजीव बालियान (Sanjeev Balyan) चुनाव हार गए थे। दारा सिंह प्रजापति राष्ट्रीय प्रजापति महासभा (Rashtriya Prajapati Mahasabha) के नेता भी हैं। यह संगठन प्रजापति समुदाय के कल्याण के लिए काम करता है।

अखिलेश यादव ने दारा सिंह प्रजापति और राम बहादुर पासी के सपा में शामिल होने को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति से जोड़ते हुए कहा, "राम बहादुर पासी और दारा सिंह के शामिल होने से अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बीजेपी के लिए मुश्किलें बढ़ जाएंगी।"

सैंथवार समुदाय के नेता भी सपा के साथ

इनके अलावा सैंथवार समुदाय (Sainthwar Community) से आने वाले बीजेपी के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर (Kushagra Sagar) भी सोमवार को समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। उनके सपा में आने को भी अखिलेश यादव की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वह गैर-प्रमुख ओबीसी और अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) समुदायों के प्रभावशाली नेताओं को पार्टी के साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी अलग-अलग सामाजिक समूहों के प्रभावशाली चेहरों को अपने साथ जोड़ने पर जोर दे रही है। पार्टी की कोशिश खास तौर पर उन विधानसभा क्षेत्रों में अपनी कमजोरियों को दूर करने की है, जहां मुकाबला कड़ा माना जाता है।

आने वाले दिनों में और चेहरे जुड़ने के संकेत

धर्मेंद्र कश्यप, कीर्ति कश्यप, राम बहादुर पासी, दारा सिंह प्रजापति और कुशाग्र सागर के सपा में शामिल होने के बाद अब पार्टी की नजर दूसरे प्रभावशाली नेताओं पर भी है। आने वाले दिनों में और भी कई नेता समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं।

इस तरह विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव का फोकस सिर्फ पार्टी संगठन को मजबूत करने पर नहीं है, बल्कि अलग-अलग पिछड़े और दलित समुदायों के प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़कर पीडीए (PDA) के आधार को मजबूत करने पर भी है। बरेली और रुहेलखंड से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक हुई इन राजनीतिक एंट्री को इसी रणनीति के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।

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Aditya Kumar Verma

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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