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NEET सुसाइड पर अखिलेश का सरकार से सीधा सवाल, "क्या बेबस बेटी का आखिरी खत भी इतिहास में होगा दर्ज?"
NEET Student Suicide Case: नीट परीक्षा विवाद के बीच छात्रा की आत्महत्या पर अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार को घेरा। सुसाइड नोट ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
NEET Student Suicide Case
NEET Student Suicide Case: मध्य प्रदेश की एक नीट अभ्यर्थी की आत्महत्या के मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस घटना को लेकर केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से इस दुखद घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश के विकास के दावों के बीच एक बेबस छात्रा की दर्दनाक कहानी को भी याद रखा जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर उठाए सवाल
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि जब भाजपा सरकार के कार्यकाल में "विकसित भारत" का इतिहास लिखा जाएगा, तो क्या उसमें एक बेबस बेटी का आखिरी खत भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने भाजपा समर्थकों से भी सवाल किया कि क्या यह पत्र उनकी आंखें खोलने के लिए पर्याप्त नहीं है। उनकी यह टिप्पणी उस छात्रा के सुसाइड नोट को लेकर आई है, जिसमें उसने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए नीट परीक्षा से जुड़ी निराशा का जिक्र किया था।
डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की रहने वाली 18 वर्षीय आकांक्षा चतुर्वेदी मेडिकल क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहती थी। वह महाराष्ट्र के नागपुर में रहकर नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थी। जानकारी के अनुसार, 20 मई को उसने अपने कमरे में आत्महत्या कर ली। घटना के कुछ दिन बाद परिजनों को उसका सुसाइड नोट मिला। नोट में उसने लिखा था कि उसके माता-पिता को उस पर भरोसा था कि वह डॉक्टर बनेगी, लेकिन अब उसमें दोबारा नीट परीक्षा देने का साहस नहीं बचा है। उसने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि उसने सब कुछ बर्बाद कर दिया।
परिजनों का कहना है कि आकांक्षा डॉक्टर बनने का सपना देखती थी, लेकिन परीक्षा से जुड़े विवाद और अनिश्चितता के बाद वह मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगी थी। बताया गया कि उसने धीरे-धीरे खाना-पीना तक कम कर दिया था और गहरे तनाव में चली गई थी।
लखीमपुर खीरी में भी सामने आया था ऐसा ही मामला
यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में भी एक नीट अभ्यर्थी ने आत्महत्या कर ली थी। ईसानगर थाना क्षेत्र के रहने वाले 20 वर्षीय ऋतिक मिश्रा लंबे समय से मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। परिजनों के अनुसार, इस बार उन्हें उम्मीद थी कि उनका चयन हो जाएगा क्योंकि परीक्षा अच्छी गई थी। हालांकि, परीक्षा रद्द होने की खबर के बाद वह काफी परेशान रहने लगे थे। कुछ समय बाद उनका शव घर में फंदे से लटका मिला।
परीक्षा विवाद पर बढ़ी चिंता
इन घटनाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नई बहस छेड़ दी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद छात्रों और अभिभावकों में चिंता बढ़ी है। वहीं, राजनीतिक दल भी परीक्षा प्रणाली और उससे जुड़े विवादों को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं।


