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Aligarh News : अलीगढ़ में जनगणना 2027 हेतु HLB सैटेलाइट मैप के आसान उपयोग के निर्देश जारी
Aligarh News : अलीगढ़ में जनगणना 2027 की तैयारी तेज, HLB सैटेलाइट मैप, GPS और गूगल मैप से सर्वे प्रक्रिया समझाने के निर्देश जारी
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Aligarh News: उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जनपद मे आगामी जनगणना 2027 को सफल और त्रुटिरहित बनाने के लिए HLB सैटेलाइट मैप को समझने एवं उपयोग करने का आसान तरीका जारी किया गया है। इसमें जनगणना कार्य में लगे कर्मचारियों और प्रगणकों को सैटेलाइट मैप, GPS और Google Map की मदद से क्षेत्र चिन्हित करने, मकानों की नंबरिंग और आंकड़ों के सत्यापन की पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई गई है। जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार शुरुआत में HLB सैटेलाइट मैप को समझना थोड़ा कठिन लग सकता है। लेकिन नियमित अभ्यास और सही तरीके से काम करने पर यह प्रक्रिया बेहद आसान हो जाती है।
इस प्रकार किया जाएगा कार्य
1- GPS की मदद से HLB की सीमा पहचानें: सबसे पहले मोबाइल GPS ऑन कर पूरे HLB क्षेत्र की सीमा को समझने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें मुख्य सड़क, नाला, खेत, दीवार और अन्य स्थायी सीमाओं को चिन्हित करने को कहा गया है।
2- Google Map पर रास्तों को ट्रेस करें: इसके बाद Google My मेप्स के जरिए HLB क्षेत्र के अंदर आने वाली सड़कों, गलियों और रास्तों को ट्रेस करने के निर्देश दिए गए हैं।ताकि क्षेत्र का सही नक्शा तैयार हो सके।
3- फील्ड में जाकर सत्यापन करें: मैप पर बनाए गए रास्तों का फील्ड में जाकर मिलान और सुधार करने को कहा गया है। यदि कोई नया रास्ता, गली या बदलाव दिखाई दे तो उसे तुरंत अपडेट करने के निर्देश हैं।
4- मकानों की नंबरिंग और अंतिम नक्शा तैयार करें: जनगणना कर्मियों को घर-घर जाकर मकानों की नंबरिंग करते हुए अंतिम नक्शा तैयार करना होगा। नक्शे में सभी मकानों का सही स्थान और क्रम अंकित किया जाएगा।
5- मकानों पर स्पष्ट नंबर लिखे जाएंगे: जनगणना के दौरान प्रत्येक मकान पर स्पष्ट और साफ नंबर लिखने के निर्देश दिए गए हैं। ताकि पहचान और सर्वे में कोई परेशानी न हो।
6- 34 प्रश्नों की प्रविष्टि होगी: मकान नंबर के आधार पर टैबलेट या मोबाइल में लॉगिन कर 34 बिंदुओं की जानकारी दर्ज की जाएगी। इसमें परिवार और मकान से संबंधित जरूरी विवरण शामिल होंगे।
7- अंतिम जांच और सत्यापन: पूरी प्रक्रिया के बाद नक्शा, मकान नंबर और दर्ज जानकारी का सत्यापन किया जाएगा। किसी प्रकार की त्रुटि मिलने पर दोबारा जांच कर सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं।
जारी किए गए विशेष निर्देश
दरअसल इस प्रशिक्षण सामग्री में मुख्य सड़क, मंदिर, स्कूल, तालाब, बाजार जैसे स्थायी स्थानों की पहचान करने, स्थानीय लोगों और ग्रामीण नागरिकों से जानकारी लेने तथा मोबाइल जीपीएस और दिशा (नार्थ ) का सही उपयोग करने पर विशेष जोर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार 2 से 3 दिन तक क्षेत्र में नियमित भ्रमण करने के बाद सैटेलाइट मैप को समझना आसान हो जाता है। विभाग ने संदेश दिया है। कि “सही समझ, सही जनगणना”।


