Aligarh News: खैर हाईवे पर महाजाम का खौफ: रोडवेज, एंबुलेंस और गैस टैंकर एक साथ फंसे

Aligarh News: अलीगढ़ के खैर हाईवे पर भीषण जाम लगने से रोडवेज बसें, एंबुलेंस और गैस टैंकर फंस गए। यातायात प्रभावित होने से राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

Lakshman Singh Raghav
Published on: 11 Oct 2026 10:29 AM IST
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Aligarh News(Photo-Social Media)

Aligarh News: खैर अलीगढ़-पलवल हाईवे पर स्थित नवीन गल्ला मंडी के पास लगा महाजाम अब पूरे क्षेत्र के लिए सिरदर्द बन गया है। शनिवार दोपहर 12 बजे से शुरू हुआ यह जाम रविवार सुबह तक नहीं खुल सका। धान से लदी सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉलियों ने मंडी की हर सड़क, गली और मुख्य हाईवे को पूरी तरह से बंद कर दिया है। आलम यह है। कि वाहन तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है।

इस महाजाम में सबसे खौफनाक स्थिति यह है कि इसी हाईवे पर रोजाना गुजरने वाले रोडवेज बस, एंबुलेंस और गैस से भरे टैंकर भी इसमें फंस गए हैं। शनिवार रात को अलीगढ़ से पलवल की ओर जा रही रोडवेज की तीन बसें, एक एंबुलेंस और दो गैस टैंकर जाम में फंसे रहे। कई घंटे तक फंसे रहने के कारण बसों में बैठे यात्री परेशान रहे, वहीं एंबुलेंस में एक गंभीर मरीज भी फंसा रहा जिसे समय पर अस्पताल पहुंचाना जरूरी था।

जाम में फंसे लोगों ने बताया कि ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को इतनी बारीकी से आड़ा-तिरछा खड़ा किया गया है। कि कोई भी वाहन आगे या पीछे नहीं बढ़ सकता। चारों तरफ ट्रैक्टर ही ट्रैक्टर नजर आ रहे हैं। रात के समय ट्रैक्टरों के हेडलाइट और टेललाइट जलते रहे, जिससे पूरा इलाका जगमगाता रहा, लेकिन कोई भी वाहन रेंगने की स्थिति में नहीं था।

इस जाम में गैस टैंकर का फंसा होना सबसे बड़ा खतरा बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है। कि अगर किसी गैस सिलेंडर या LPG टैंकर के वाल्व में हल्का सा भी रिसाव हुआ तो गैस जमीन के पास फैल जाएगी। जाम में लगे वाहनों के गर्म इंजन, हेडलाइट की चिंगारी या किसी के द्वारा पी गई बीड़ी-सिगरेट से गैस तुरंत आग पकड़ लेगी। छोटा सा रिसाव कुछ सेकंड में आग के गोले में बदल सकता है। अगर बड़ा कैप्सूल टैंकर गर्म होकर पता नहीं कितनी बड़ी तबाही मच जाएगी। जाम में फंसे लोगों के पास भागने का कोई रास्ता नहीं होगा।

दूसरा खतरा केमिकल टैंकरों से है। अगर अमोनिया या क्लोरीन जैसे जहरीले पदार्थ से लदा टैंकर लीक हुआ तो जहरीली गैस नीचे की तरफ फैलेगी। रात के समय हवा कम चलती है, इसलिए यह गैस एक जगह जमा हो जाएगी। इससे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सांस लेने में भारी दिक्कत होगी, आंखों में जलन होगी और कई लोग बेहोश भी हो सकते हैं।

रोडवेज बस और एंबुलेंस का फंसा होना इस खतरे को और बढ़ा देता है। बस में 40 से 50 सवारियां होती हैं, जिनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। अगर आग लगी तो ड्राइवर दरवाजा नहीं खोल पाएगा क्योंकि चारों तरफ ट्रैक्टर लगे हैं। भगदड़ मचने पर हालात बेकाबू हो जाएंगे। एंबुलेंस के लिए तो हर मिनट कीमती होता है, लेकिन यह एंबुलेंस घंटों तक जाम में फंसी रही। अगर मरीज को समय पर इलाज नहीं मिला तो उसकी जान भी जा सकती है।

स्थानीय लोगों का कहना है। कि उन्होंने 20 साल में ऐसा महाजाम नहीं देखा। किसानों का कहना है। कि मंडी में धान रखने की जगह नहीं है, इसलिए वे ट्रैक्टर लेकर हाईवे पर खड़े हैं। वहीं स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों का आरोप है। कि मंडी प्रशासन ने पहले से तैयारी नहीं की और पुलिस ने छुट्टी वाले दिन अतिरिक्त बल तैनात नहीं किया। इसी लापरवाही के कारण किसानों को हाईवे बंद करना पड़ा और आम जनता को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है। कि अगर इस जाम के दौरान कोई बड़ा हादसा हो गया तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। मंडी प्रशासन कहेगा कि ट्रैक्टरों को रोकना पुलिस का काम था, पुलिस कहेगी कि मंडी में जगह बनाना प्रशासन का काम था। इस बीच फंसेगा सिर्फ आम आदमी, जिसकी जान और माल दोनों खतरे में हैं।

प्रशासन से तत्काल मांग है। कि ट्रैक्टरों के लिए मंडी के बाहर वैकल्पिक पार्किंग की व्यवस्था की जाए, मुख्य अलीगढ़-पलवल हाईवे को हर हाल में खाली कराया जाए और जाम की स्थिति में एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड के लिए एक लेन हमेशा सुरक्षित रखी जाए। नहीं तो खैर का यह महाजाम एक दिन महा त्रासदी में बदल सकता है।

Lakshman Singh Raghav
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Lakshman Singh Raghav

अलीगढ़ रिपोर्टरlakshmansingh@newstracksite.vocalwire.com

अलीगढ़ से जिला रिपोर्टर लक्ष्मन सिंह राघव

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