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Aligarh News: खैर ब्लॉक में प्रधान vs प्रशासक की जंग तेज: या तो विकास दो, या कुर्सी दो
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Panchayat Leaders Demand (Social Media).jpg
Aligarh News:-जनपद के खैर ब्लॉक में पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही गांव की राजनीति में गर्मी बढ़ गई है। ग्राम प्रधान अध्यक्ष चौधरी विजय सिंह बिरौला और ग्राम प्रधान संग्रामपुर चौधरी विष्णु ने सरकार के फैसले पर सीधा सवाल उठा दिया है। दोनों का कहना है। कि प्रधानों को हटाकर प्रशासक बैठाना विकास का पहिया रोक देगा।
बिरौला गांव के प्रधान और खैर ब्लॉक प्रधान संघ के अध्यक्ष चौधरी विजय सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि उनके कुछ साथी चुनाव जल्दी कराने की मांग लेकर हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। उनका तर्क सीधा है: चुनाव जल्दी होगा तो प्रत्याशियों का खर्चा भी कम होगा और गांव का विकास भी रफ्तार पकड़ेगा।
"जब चुनाव लटकता है। तो खर्चा बढ़ता है। प्रत्याशी को बार-बार गांव का चक्कर लगाना पड़ता है। पैसा खर्च होता है। और समय बर्बाद होता है। अगर जल्दी चुनाव हो जाए तो न पैसा बचेगा, न विकास रुकेगा," विजय सिंह ने कहा।
उनकी सबसे बड़ी नाराजगी सरकार के उस फैसले पर है। जिसमें प्रधानों को हटाकर अधिकारियों को प्रशासक बना दिया गया है। विजय सिंह ने इसे गलत तरीका बताया। "या तो डीएम साहब खुद हर गांव जाकर गली-मोहल्ले की नाली, खड़ंजा, लाइट का काम कराएं। या फिर हम चुने हुए प्रधानों को जिम्मेदारी सौंप दें। बीच का रास्ता विकास रोक रहा है। कोई भी प्रधान इस व्यवस्था से संतुष्ट नहीं है," उन्होंने कहा।
उधर संग्रामपुर गांव के प्रधान चौधरी विष्णु ने भी सुर में सुर मिलाया। उन्होंने कहा कि अगर चुनाव समय पर हो जाए तो नए और पुराने दोनों तरह के प्रत्याशियों को फायदा होगा। खर्चा कम होगा तो जीता हुआ प्रतिनिधि गांव की सड़क, पानी और सफाई पर ज्यादा पैसा लगा पाएगा।
"प्रशासक बना देना सबसे गलत कदम है। अब हर छोटे काम के लिए डीएम ऑफिस या एसडीएम ऑफिस के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। फाइल इधर से उधर घूम रही है। गांव वाला आदमी अधिकारी के सामने अपनी बात खुलकर नहीं रख पाता। नतीजा ये है। कि विकास का पहिया धीमा पड़ गया है," चौधरी विष्णु ने दुख जताया।
दोनों प्रधानों का एक ही दर्द है। चुना हुआ प्रधान गांव की एक-एक गली जानता है। किस मोहल्ले में पानी भरता है, कहां लाइट का तार टूटा है, किसके घर शौचालय नहीं बना। प्रशासक के पास इतना समय कहां कि वो हर गांव की जरूरत समझे।
खैर ब्लॉक के गांवों में अभी विकास कार्य ठप से पड़े हैं। प्रधानों का कहना है। कि प्रशासक सिर्फ फाइल चलाते हैं, धरातल पर काम नहीं कराते। जनता भी परेशान है। क्योंकि उसकी सुनवाई करने वाला अपना आदमी अब कुर्सी पर नहीं बैठा।
अब सबकी नजरें हाईकोर्ट पर टिकी हैं। अगर कोर्ट चुनाव जल्दी कराने का आदेश देता है। तो खैर ब्लॉक की राजनीति का नक्शा बदल जाएगा। प्रत्याशियों को राहत मिलेगी और गांव वालों को अपना प्रतिनिधि चुनने का मौका।
विजय सिंह का आखिरी वाक्य सब कुछ कह गया: "गांव का विकास गांव वाला ही कर सकता है। अफसर फाइल से विकास नहीं करते, प्रधान चौखट से करते हैं।"
अब देखना ये है। कि सरकार और कोर्ट इस मांग को कैसे देखते हैं। एक तरफ चुनाव की मांग, दूसरी तरफ प्रशासक राज। खैर ब्लॉक की पंचायत चुनावी रणभूमि बन चुकी है।


