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Aligarh News: खैर से थाने तक कप्तान की सख्ती का असर, पहुंचते ही फरियादियों की तुरंत हो रही सुनवाई
Aligarh News: खैर में कप्तान की सख्ती के बाद पुलिस स्टाफ की कार्यशैली बदली, थाने पहुंचते ही फरियादियों की तुरंत सुनवाई हो रही है।
Aligarh News(Photo-Social Media)
Aligarh News: खैर जनपद के कप्तान की कार्यशैली इन दिनों खैर क्षेत्र में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है। सरकारी अस्पताल के सामने चाय की दुकानों पर बुजुर्ग, महिलाएं और युवा एक ही बात कह रहे हैं - ऐसा कप्तान ना पहले आया था ना आएगा। अब इस चर्चा में एक नई बात और जुड़ गई है - कप्तान साहब ने अपने पुलिस स्टाफ की लगाम ऐसी कसी है। कि थाने जाते ही फरियादियों की तुरंत सुनवाई हो रही है।
पहले जहां थानों के चक्कर काटने पड़ते थे, अब तस्वीर बदली हुई है। खैर, जवां, अकराबाद, चंडौस और बन्नादेवी तक के थानों में फरियाद लेकर पहुंचने वाले लोगों को बाहर नहीं बैठना पड़ रहा। कप्तान के सख्त निर्देश हैं - थाने आया हर व्यक्ति सम्मानित है, उसकी बात पहले सुनो। खैर कस्बे के बुजुर्ग बताते हैं। कि एसएसपी नीरज जादौन ने आते ही 202 उपनिरीक्षकों का तबादला कर दिया था। शहर वालों को देहात और देहात वालों को शहर भेज दिया। इससे थानों में सालों से जमे पुराने सिस्टम की जड़ें हिल गईं। जो पुलिसकर्मी जनता की नहीं सुनते थे, उन पर कार्रवाई हुई। अभी हाल ही में 7 दरोगा और एक ड्राइवर को भ्रष्टाचार और लापरवाही में सस्पेंड करने की खबर ने पूरे स्टाफ में संदेश दे दिया कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
सरकारी अस्पताल के सामने चाय पी रही महिला कहती हैं, "पहले थाने में रिपोर्ट लिखवाने जाती थी तो टाल दिया जाता था। पिछले हफ्ते मेरी बहू गई, तो महिला कांस्टेबल ने तुरंत बैठाया, पानी पिलाया और एफआईआर लिखी। ये बदलाव कप्तान की वजह से ही है।" युवा भी यही कहते हैं। कि अब थाने में दलाली खत्म हो गई है। फरियादी सीधे थानाध्यक्ष से मिल पा रहा है। हर थाने में जनसुनवाई को प्राथमिकता दी जा रही है। मिशन शक्ति अभियान-5 के तहत महिला बीट अधिकारी खुद गांव-गांव चौपाल लगा रही हैं।
चाय दुकानदार का कहना है, "कप्तान साहब ने लगाम कस रखी है। पुलिस वाले अब समय से ड्यूटी पर आते हैं, वर्दी में रहते हैं। और लोगों से बदतमीजी नहीं करते। इसलिए लोग कह रहे हैं। ऐसा कप्तान पहले नहीं आया।" पुलिस सूत्रों का कहना है। कि अलीगढ एसएसपी नीरज कुमार ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया है। कि कोई भी फरियादी अगर थाने से निराश लौटा तो संबंधित प्रभारी की जवाबदेही तय होगी। इसी का नतीजा है। कि अलीगढ़ में अपराधियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई के साथ-साथ जनता की सुनवाई भी सबसे तेज हो रही है।


