Aligarh News: CHC खैर में जच्चा की थाली जांचने पहुंचे अधीक्षक, गुणवत्ता परखी, बोले समझौता नहीं

Aligarh News: CHC खैर में अधीक्षक डॉ. रोहित भाटी ने जच्चा-बच्चा की थाली का औचक निरीक्षण कर भोजन की गुणवत्ता परखी और लापरवाही पर सख्ती के संकेत दिए।

Lakshman Singh Raghav
Published on: 29 Sept 2026 2:05 PM IST
Aligarh News
X

Aligarh News(Photo-Social Media)

Aligarh News: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खैर में मंगलवार को उस वक्त हड़कंप मच गया जब अधीक्षक डॉ. रोहित भाटी अचानक प्रसूता वार्ड में जच्चा की थाली परखने पहुंच गए। दोपहर के भोजन के समय हुए इस औचक निरीक्षण में उन्होंने स्वयं सहायता समूह द्वारा परोसे जा रहे खाने की एक-एक परत की पड़ताल की। डॉ. भाटी सीधे बेड पर भर्ती गर्भवती महिलाओं के पास गए। हाथ में थाली नहीं, सवाल थे। उन्होंने पूछा - खाना समय पर मिलता है? पेट भरता है? स्वाद कैसा है? दूध रोज मिलता है? महिलाओं ने बताया कि खाना समय पर और ठीक मिल रहा है। लेकिन अधीक्षक सिर्फ जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने खुद थाली उठाकर देखी। दाल की गाढ़ापन, चावल की सफाई, रोटी की सिकाई और सब्जी की मात्रा को बारीकी से परखा।

मौके पर मौजूद स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को उन्होंने दो टूक कहा कि गर्भवती का भोजन सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, दो जिंदगियों के पोषण के लिए है। रसोई से लेकर थाली तक साफ-सफाई, पोषण मानक और निर्धारित मात्रा - दाल, चावल, रोटी, सब्जी और दूध में कोई कटौती बर्दाश्त नहीं होगी। भोजन में लापरवाही मिली तो कार्रवाई तय है।

निरीक्षण केवल थाली तक सीमित नहीं रहा। डॉ. भाटी ने वार्ड की दीवारों पर लगे स्वास्थ्य जागरूकता होर्डिंग्स का भी अवलोकन किया। वार्ड में नवजात शिशु की सुरक्षा के तीन सुनहरे नियमों के बड़े-बड़े पोस्टर लगे हैं। पहला - जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू करें और दिन-रात मिलाकर 8 से 10 बार स्तनपान कराते रहें। दूसरा - जन्म के समय ही तीन जीवनरक्षक टीके पोलियो, बीसीजी और हेपेटाइटिस-बी जरूर लगवाएं। तीसरा - कंगारू मदर केयर, यानी शिशु को ठंड से बचाने के लिए मां या पिता की छाती की त्वचा से चिपकाकर गर्म रखें।

कम वजन के नवजात की देखभाल पर भी पोस्टर में स्पष्ट संदेश है - शिशु को भीड़-भाड़ से दूर रखें, छूने से पहले हाथ धोएं और रोने पर तुरंत स्तनपान कराएं। खतरे के संकेतों को लेकर भी चेतावनी लिखी है। यदि शिशु स्तनपान नहीं कर रहा, झटके आ रहे हैं, बहुत सुस्त है, सांस लेने में दिक्कत या बुखार है तो बिना देर किए तुरंत स्वास्थ्य केंद्र लाएं।

अंत में डॉ. रोहित भाटी ने कहा कि जच्चा-बच्चा की सुरक्षा हमारी पहली प्राथमिकता है। प्रसव के बाद 48 घंटे तक अस्पताल में भर्ती रहना मां और नवजात दोनों के लिए जीवनरक्षक है। इस दौरान जरूरी जांच, टीके और पोषण की सेवाएं मिल पाती हैं। उन्होंने स्टाफ को निर्देश दिए कि हर गर्भवती को भोजन के साथ-साथ स्वास्थ्य शिक्षा भी अनिवार्य रूप से दी जाए।

Lakshman Singh Raghav
ABOUT THE AUTHOR

Lakshman Singh Raghav

अलीगढ़ रिपोर्टरlakshmansingh@newstracksite.vocalwire.com

अलीगढ़ से जिला रिपोर्टर लक्ष्मन सिंह राघव

Next Story