TRENDING TAGS :
Aligarh News: अलीगढ़ में विभाजन विभीषिका की यादों के बीच गूंजा एक भारत श्रेष्ठ भारत का संकल्प
Aligarh News: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर अलीगढ़ में पुरानी यादों को याद करते हुए ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का संकल्प लिया गया।
Aligarh News(Photo-Social Media)
Aligarh News: विभाजन की उस काली रात को आज भी याद कर रूह कांप उठती है। इसी पीड़ा को न भूलने और नई पीढ़ी को सीख देने के लिए अलीगढ़ के कल्याण सिंह हैबिटेट सेंटर ऑडिटोरियम में ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ पर एक भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती विजय सिंह, सांसद सतीश कुमार गौतम, कोल विधायक अनिल पाराशर, इगलास विधायक राजकुमार सहयोगी, भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णपाल सिंह, महामंत्री शिवनारायण शर्मा और सरदार भूपेंद्र सिंह जत्थेदार ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसी दौरान लखनऊ में हुए राज्य स्तरीय कार्यक्रम का सजीव प्रसारण भी देखा गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्चुअल संबोधन में 1947 के विभाजन को देश के इतिहास का सबसे दर्दनाक अध्याय बताया। उन्होंने कहा, "लाखों लोगों ने एक रात में अपना घर, जमीन और मातृभूमि छोड़ दी। विस्थापन का वह दंश आज भी हमारे जेहन में है। इतिहास हमें सिर्फ गर्व करना नहीं सिखाता, गलतियों से सीखकर उन्हें न दोहराने की ताकत भी देता है।" सीएम ने आह्वान किया कि हर नागरिक पहले खुद को भारतीय माने, फिर किसी जाति या क्षेत्र का। तभी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का संकल्प साकार होगा। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानियों को नमन करते हुए कहा कि देश की एकता और आत्मनिर्भरता के लिए हमें हर पल सजग रहना होगा। "संकल्प का कोई विकल्प नहीं होता" - उनके इस वाक्य पर पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा।
कार्यक्रम की सबसे मार्मिक घड़ी तब आई जब विभाजन के समय विस्थापित हुए परिवारों ने अपने पूर्वजों की कहानियां सुनाईं। सरदार भूपेंद्र सिंह जत्थेदार भावुक हो गए। उन्होंने बताया, "हमारे पूर्वज लाहौर-सरगोधा में रहते थे। दंगों में सब लूट गया। हंसता-खेलता परिवार रातों-रात सब छोड़कर भागा। अलीगढ़ पहुंचे तो न सिर पर छत थी, न खाने को रोटी।" उन्होंने इस पीड़ा को याद करने और विस्थापितों को सम्मान देने के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का आभार जताया।
सरदार हरदीप सिंह, सरदार सिदक सिंह, सरदार गुरदीप सिंह, सरदार राजेंद्र सिंह, सरदार गुरमीत सिंह, सरदार ओमप्रकाश और सरदार बलवीर सिंह समेत कई परिजनों ने भी अपने संस्मरण साझा किए। सभी विस्थापित परिवारों का माल्यार्पण और शाल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए 2 मिनट का मौन रखा गया और अंत में सामूहिक ‘वंदे मातरम्’ गाया गया। समापन के बाद अतिथियों ने परिसर में लगी चित्र प्रदर्शनी देखी। तस्वीरों में विभाजन के समय के काफिले, टूटे घर, सीमा पर पलायन और पुनर्वास का संघर्ष साफ दिख रहा था। कई बुजुर्ग तस्वीरें देखकर रो पड़े।
इस मौके पर मुख्य विकास अधिकारी योगेंद्र कुमार, परियोजना निदेशक आर.के. कुरील, डीडीओ सुभाष नेमा, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अनुपम श्रीवास्तव समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन नीतू सारस्वत ने किया। विभीषिका की यादों के बीच एक ही संदेश गूंजा - बीते कल से सीखो और आने वाले कल को एकजुट होकर बनाओ।


