Aligarh News: अलीगढ़ डिफेंस नोड में 3 कंपनियों के भूमि आवंटन रद्द, यूपीडा की सख्त कार्रवाई

Aligarh News: अलीगढ़ डिफेंस नोड में यूपीडा ने पांच साल बाद भी काम शुरू न करने वाली 3 कंपनियों के भूमि आवंटन रद्द किए। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में जवाबदेही और समयबद्ध निवेश पर सख्ती।

Newstrack Network
Published on: 5 Jun 2026 4:50 PM IST
Aligarh Defense Node
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Aligarh Defense Node (Image Credit-Social Media)

लखनऊ। उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC) के अलीगढ़ फेज-01 डिफेंस नोड में उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन कंपनियों के भूमि आवंटन रद्द कर दिए हैं। लगभग पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद संबंधित कंपनियों द्वारा निर्माण और औद्योगिक गतिविधियां शुरू न किए जाने पर यह कदम उठाया गया है। यूपीडा की इस कार्रवाई को रक्षा क्षेत्र में समयबद्ध निवेश, जवाबदेही और ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यूपीडा ने स्पष्ट किया है कि डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में आवंटित भूमि का उपयोग केवल रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण गतिविधियों के लिए किया जाना है। ऐसे में जिन कंपनियों ने तय समय सीमा में उत्पादन इकाइयों की स्थापना नहीं की और न ही रोजगार सृजन की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया, उनके खिलाफ लीज अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई की गई।

दरअसल, उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर देश की प्रमुख रणनीतिक औद्योगिक परियोजनाओं में शामिल है, जिसकी स्थापना रक्षा विनिर्माण क्षमता बढ़ाने और देश को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से की गई थी। यह कॉरिडोर प्रदेश के छह प्रमुख नोड—अलीगढ़, आगरा, लखनऊ, कानपुर, झांसी और चित्रकूट में विकसित किया जा रहा है।

यूपीडा के मुताबिक, सरकार द्वारा निवेशकों को सब्सिडी दरों पर पूर्व विकसित औद्योगिक भूमि और ‘रेडी-टू-मूव’ आधारभूत संरचना उपलब्ध कराई जाती है, ताकि परियोजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन हो सके। इसके बावजूद कुछ कंपनियों ने वर्षों तक कोई ठोस प्रगति नहीं दिखाई, जिससे क्षेत्रीय औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन प्रभावित हो रहा था।

रद्द किए गए आवंटनों में जय साई अनु को जुलाई 2021 में 4.5 हेक्टेयर भूमि 100 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश पर आवंटित की गई थी, लेकिन निर्धारित समय में कोई विनिर्माण सुविधा स्थापित नहीं की गई। इसी तरह नवराज मेटल्स को जून 2021 में 1.6 हेक्टेयर भूमि 20 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव के साथ आवंटित की गई थी, लेकिन निर्माण कार्य में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं पाई गई। वहीं पीबीएम इंसुलेशन्स को जून 2021 में 0.4 हेक्टेयर भूमि चार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव पर दी गई थी, लेकिन कंपनी परियोजना क्रियान्वयन में अपेक्षित रुचि नहीं दिखा सकी।

यूपीडा अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल दंडात्मक कार्रवाई नहीं है, बल्कि भूमि संसाधनों के प्रभावी उपयोग और डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की विश्वसनीयता बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्राधिकरण का कहना है कि भविष्य में भी ऐसे आवंटियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी, जो तय समय सीमा में परियोजनाएं शुरू नहीं करेंगे।

यूपीडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने कहा कि डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है और यहां उपलब्ध भूमि रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक संसाधन है। इसलिए केवल गंभीर और प्रतिबद्ध निवेशकों को ही अवसर दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की यह सख्ती न केवल वास्तविक निवेशकों को प्रोत्साहित करेगी, बल्कि प्रदेश में निवेश-अनुकूल और परिणामोन्मुख औद्योगिक माहौल को भी मजबूत करेगी।

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