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योगी मंत्रिमंडल में नाम न होने पर छलका BJP विधायक का दर्द, फेसबुक पर लिखी 'बगावती' पोस्ट, फिर तुरंत लिया 'यू-टर्न'
Asha Maurya Post on UP Cabinet Expansion: योगी मंत्रिमंडल में जगह न मिलने पर BJP विधायक आशा मौर्य का दर्द सोशल मीडिया पर छलक पड़ा। फेसबुक पर ‘बगावती’ पोस्ट के बाद मचा सियासी हड़कंप, फिर अचानक बदले सुर। जानिए यूपी BJP के अंदर क्या चल रहा है।
Asha Maurya Post on UP Cabinet Expansion: उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल विस्तार की हलचल के बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सबको चौंका दिया है। सीतापुर के सिधौली से भाजपा विधायक आशा मौर्य के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सनसनी फैला दी। कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार टीम योगी में आशा मौर्य को भी जगह मिल सकती है, लेकिन जब मंत्रियों की फाइनल लिस्ट में उनका नाम शामिल नहीं दिखा, तो विधायक का दर्द सोशल मीडिया के जरिए बाहर आ गया। हालांकि, बाद में आलाकमान की सक्रियता के चलते उन्होंने अपने सुर बदल लिए, लेकिन तब तक सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो चुका था।
बागी तेवर और फिर 'यू-टर्न'
मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट के बीच आशा मौर्य ने पहले एक बेहद तीखा पोस्ट फेसबुक पर साझा किया था। उस पोस्ट में उन्होंने भाजपा की वर्तमान कार्यशैली पर सीधे सवाल उठाते हुए लिखा था कि "बीजेपी को अब संघर्षशील लोगों की आवश्यकता नहीं है, यहाँ तो बागी और दलबदलू नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।" उन्होंने स्पष्ट रूप से संकेत दिया था कि पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। लेकिन खबर है कि जैसे ही यह पोस्ट वायरल हुई, हाईकमान की ओर से उन्हें सख्त फटकार लगी। इसके तुरंत बाद उन्होंने वह पोस्ट डिलीट कर दी और एक नया, संयमित पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने संगठन के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई।
35 वर्षों का संघर्ष और मन की वो टीस
अपने नए पोस्ट में आशा मौर्य ने भावनात्मक रूप से अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि पिछले 35 वर्षों से उन्होंने पार्टी और संगठन के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी के साथ कार्य करना ही उनका एकमात्र उद्देश्य रहा है। हालांकि, उन्होंने दबी जुबान में अपनी नाराजगी स्वीकार करते हुए लिखा, "एक समर्पित कार्यकर्ता होने के नाते मन में थोड़ी पीड़ा अवश्य हुई है, क्योंकि वर्षों की मेहनत और संघर्ष हर कार्यकर्ता के लिए भावनात्मक होता है।" उन्होंने आगे कहा कि यह पीड़ा उनके संकल्प को कमजोर नहीं करेगी, बल्कि उन्हें समाज के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए और अधिक मजबूती प्रदान करेगी।
नाराजगी पर सफाई: "परिवार में थोड़ा बहुत गुस्सा आ जाता है"
जब इस विवाद ने तूल पकड़ा, तो आशा मौर्य ने मीडिया के सामने आकर अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि वे पार्टी से कतई नाराज नहीं हैं। उनके शब्दों में, "भाजपा मेरा परिवार है और परिवार में थोड़ा बहुत गुस्सा आ जाता है।" उन्होंने बड़े ही दार्शनिक अंदाज में कहा कि भाग्य में जो होता है, वही मिलता है। शायद सरकार को लगा होगा कि अन्य लोग उनसे अधिक योग्य हैं, इसलिए उन्हें मौका दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे संगठन के हर फैसले का सम्मान करती हैं और आगे भी एक कार्यकर्ता के रूप में पूरी मजबूती से जनसेवा का कार्य करती रहेंगी।
यूपी की राजनीति का नया मोड़
आशा मौर्य का यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति के एक बड़े सच को उजागर करता है। दरअसल, योगी मंत्रिमंडल के इस विस्तार में कई ऐसे चेहरों को जगह मिली है जो दूसरी पार्टियों से भाजपा में शामिल हुए हैं। पुराने कार्यकर्ताओं के मन में इसी बात को लेकर एक अनकही टीस है, जो कभी-कभी आशा मौर्य की तरह सोशल मीडिया पर छलक जाती है। फिलहाल, आशा मौर्य ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं और पार्टी ने भी मामले को शांत करने की कोशिश की है, लेकिन 2027 के चुनाव से पहले अपने पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को संतुष्ट रखना भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।


