Auraiya News: कृषक-वैज्ञानिक संवाद में किसानों को रेशमकीट पालन की तकनीकी जानकारी दी गई

Auraiya News: औरैया में कृषक-वैज्ञानिक संवाद में 50 किसानों को रेशमकीट पालन की तकनीक बताई गई, महिला किसानों को रोजगार और अतिरिक्त आय के लिए प्रेरित किया गया।

Ashraf Ansari
Published on: 14 Aug 2026 11:12 AM IST
Auraiya News: कृषक-वैज्ञानिक संवाद में किसानों को रेशमकीट पालन की तकनीकी जानकारी दी गई
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Auraiya News: औरैया में किसानों को वैज्ञानिक रेशमकीट पालन की तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से कृषक-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम अपेक्षा महिला एवं बाल विकास समिति और आधुनिक महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) के संयुक्त सहयोग से बनारसी दास, औरैया में आयोजित हुआ। इसमें करीब 50 महिला और पुरुष किसानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों की समस्याओं का समाधान करना और विशेष रूप से महिला कृषकों को रेशम उत्पादन से जोड़कर रोजगार व अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध कराना रहा।

कार्यक्रम में किसानों ने रेशमकीट पालन से जुड़े विभिन्न विषयों पर वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों से सीधे संवाद किया। अपेक्षा महिला एवं बाल विकास समिति की सचिव शिप्रा मिश्रा और अध्यक्ष रीना पांडे ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र, गोंडा के वैज्ञानिक-डी श्री छत्रपाल, सहायक रेशम विकास अधिकारी श्रीमती पूजा शर्मा और उनके सहयोगी राघवेंद्र सिंह ने किसानों को तकनीकी जानकारी दी।

वैज्ञानिकों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से रेशमकीट के जीवन चक्र की विस्तृत जानकारी दी। किसानों को बताया गया कि रेशमकीट अंडा, लार्वा, कोया और वयस्क अवस्था से होकर गुजरता है। इसके साथ ही पालन गृह की स्वच्छता, तापमान और आर्द्रता का उचित नियंत्रण, गुणवत्तापूर्ण शहतूत की पत्तियों का उपयोग तथा रेशमकीटों की नियमित निगरानी को सफल उत्पादन के लिए बेहद जरूरी बताया गया।

वैज्ञानिकों ने कहा कि रेशम उत्पादन के लिए शहतूत पौधरोपण सबसे महत्वपूर्ण आधार है। किसानों को खेतों की मेड़ों और अन्य उपलब्ध भूमि पर शहतूत के पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया गया। इसके अलावा रेशमकीट पालन के लिए जरूरी उपकरण, पालन गृह की स्थापना और विभागीय योजनाओं के तहत उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी भी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान करीब 5-6 किसानों ने शहतूत पौधरोपण कर भविष्य में रेशमकीट पालन शुरू करने में रुचि दिखाई। महिला किसानों को घरेलू स्तर पर रेशमकीट पालन अपनाकर रोजगार और अतिरिक्त आय बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। अधिकारियों ने पात्र किसानों को विभिन्न विभागीय योजनाओं से जोड़ने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम से क्षेत्र में रेशम उत्पादन के विस्तार की नई संभावनाएं बनी हैं।

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