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Auraiya News: औरैया से बड़ी खबर, जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए दो दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण संपन्न
Auraiya News: औरैया में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न, किसानों को प्राकृतिक कृषि की दी गई जानकारी।
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Auraiya News: उत्तर प्रदेश के औरैया शहर के मोहल्ला बनारसीदास स्थित अपेक्षा महिला एवं बाल विकास समिति कार्यालय में जैविक कृषि विषय पर आयोजित दो दिवसीय रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। प्रशिक्षण में महिला किसानों, प्रगतिशील किसानों तथा कृषि कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और जैविक खेती से जुड़ी विभिन्न तकनीकों एवं सिद्धांतों की जानकारी प्राप्त की।
प्रशिक्षण के दूसरे दिन मुख्य प्रशिक्षक जितेंद्र ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि मिट्टी की उर्वरता हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और प्रकृति के नियमों के अनुरूप खेती करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रकृति कम लेकर अधिक देती है, इसलिए किसानों को टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाना चाहिए।
जितेंद्र ने व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखते हुए सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि परिवार की रोटी, कपड़ा, मकान और औषधि जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति खेतों से सुनिश्चित करना आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
प्रशिक्षण के दौरान किसानों को पोषक चक्र सिद्धांत की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि फसल की प्रत्येक अवस्था में उसकी पोषण संबंधी आवश्यकताएं अलग-अलग होती हैं, इसलिए संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाना जरूरी है। इसके साथ ही फसल पोषण प्रबंधन, पुराने उपलों (कंडों) के उपयोग से होने वाले लाभ तथा स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए प्राकृतिक कीटनाशकों के निर्माण और उपयोग की व्यावहारिक जानकारी भी प्रदान की गई। प्रशिक्षक ने स्पष्ट किया कि प्राकृतिक खेती केवल एक कृषि तकनीक नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने का एक जीवन दर्शन है।उन्होंने किसानों को खेती की लागत कम करने, स्थानीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने तथा मिट्टी की जैविक सक्रियता बनाए रखने के उपायों से भी अवगत कराया। प्रशिक्षण के समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने प्राप्त ज्ञान को अपने खेतों में व्यवहारिक रूप से अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ किया गया।


