Auraiya News: रक्षाबंधन पर बांधी थी राखी, कुछ दिन बाद बहन ने भाई को दी मुखाग्नि

Auraiya News: औरैया के दिबियापुर में रक्षाबंधन की खुशियां मातम में बदलीं, दिल्ली हादसे में पवन की मौत के बाद बहन प्रियांशी ने दी अंतिम विदाई।

Ashraf Ansari
Published on: 8 Sept 2026 6:17 PM IST
Brother Killed in Delhi buildings
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रक्षाबंधन पर बांधी थी राखी, कुछ दिन बाद बहन ने भाई को दी मुखाग्नि (Photo- Newstrack)

Auraiya News: औरैया के दिबियापुर में मंगलवार को एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। जिस घर में कुछ दिन पहले रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहनों के स्नेह और खुशियों के साथ मनाया गया था, उसी घर से मंगलवार को इकलौते बेटे पवन कुमार की अर्थी उठी। चारों बहनों ने रक्षाबंधन पर जिस भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र की कामना की थी, उन्हें ही अब उसे अंतिम विदाई देनी पड़ी।

दिल्ली में पांच मंजिला हॉस्टल की इमारत गिरने से मौत

दिबियापुर कस्बे के कैलाश बाग स्थित बाबू दयारामनगर निवासी रिटायर्ड होम्योपैथी फार्मासिस्ट विशंभर सिंह के इकलौते बेटे पवन कुमार की दिल्ली में पांच मंजिला हॉस्टल की इमारत गिरने से मौत हो गई थी। हादसे में जान गंवाने वाले छह छात्रों में पवन भी शामिल था। सोमवार देर रात पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसका शव घर पहुंचा। शव देखते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई।

पवन की चारों बहनें भाई के शव से लिपटकर बिलखती रहीं। मां मीरा देवी का रो-रोकर बुरा हाल था, जबकि पिता विशंभर सिंह बेटे की मौत के सदमे में बेसुध नजर आए। परिजनों को इस हालत में देखकर आसपास मौजूद लोग भी भावुक हो उठे।

मंगलवार सुबह पवन की अंतिम यात्रा घर से निकली तो बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उसमें शामिल हुए। हर कोई परिवार के दुख में सहभागी बनकर अंतिम विदाई देने पहुंचा। दिबियापुर के मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी की गईं। इस दौरान माहौल पूरी तरह गमगीन रहा।

बहन प्रियांशी ने अपने भाई को दी मुखाग्नि

सबसे मार्मिक क्षण तब आया, जब पवन की बहन प्रियांशी ने अपने भाई को मुखाग्नि दी। कुछ दिन पहले जिस हाथ से उसने भाई की कलाई पर राखी बांधी थी, उसी बहन को मंगलवार को भाई की अंतिम विदाई की जिम्मेदारी निभानी पड़ी। यह दृश्य देखकर मुक्तिधाम में मौजूद लोगों की आंखें भर आईं।

पवन चार बहनों का इकलौता भाई था और परिवार के लिए बेहद खास था। उसकी असमय मौत ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया है। रक्षाबंधन की खुशियां देखते ही देखते मातम में बदल गईं और बहनों की आंखों से बहते आंसू भाई की यादों को बयां करते रहे।

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