Ram Janmabhoomi Donation Row: कौन हैं न्यासी जिन पर थी मंदिर की अमानत की सुरक्षा की जिम्मेदारी

Ram Mandir Donation Row: चोरी और अमानत में खयानत विवाद के बाद श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और उसके ट्रस्टी चर्चा में हैं। जानिये इनके बारे में सबकुछ

Ramkrishna Vajpei
Published on: 17 Jun 2026 6:09 PM IST
Shri Ram Temple
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Shri Ram Temple News (Social Media).jpg

Ram Janmabhoomi Donation Row: अयोध्या में श्रीराम मंदिर के दान में कथित करोडों की धोखाधड़ी और चोरी का मामला तूल पकड़ चुका है। इसमें ट्रस्ट से जुड़े कुछ सदस्यों की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एसआईटी टीम मामले की जांच कर रही है। कुछ लोगों पर चंदे में गड़बड़ी और उससे जुड़े कुछ लोगों पर अचानक संपत्ति बढ़ने के आरोप भी सवालों के घेरे में हैं। ऐसे में श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टियों के बारे में लोग जानना चाह रहे हैं। आखिर मंदिर के ट्रस्टी कौन लोग हैं जिनके ऊपर करोड़ों हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक इस मंदिर की अमानत की सुरक्षा की जिम्मेदारी है। प्रस्तुत है ट्रस्ट से जुड़े सदस्यों का संपूर्ण लेखा जोखा।

क्या है श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट

अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि में निर्मित श्री राम मंदिर के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन भारत सरकार ने किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी 2020 को लोकसभा में ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी।

ट्रस्ट के 15 में से 12 सदस्यों को भारत सरकार ने नामित किया था और ट्रस्ट की पहली बैठक के दौरान तीन अतिरिक्त सदस्यों को चयनित किया गया था।


पद्मश्री श्री.के. परासरण

पद्मश्री श्री.के. परासरण इसके फाउंडर ट्रस्टी सदस्य हैं। यह उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठतम अधिवक्ता हैं। खास बात यह है कि ट्रस्ट परासरण के घर के पते पर ही पंजीकृत किया गया है।

जानकारी के मुताबिक कानून के बड़े जानकार और भारत के दो बार अटॉर्नी जनरल रहे के. परासरन, अयोध्या में मंदिर-मस्जिद ज़मीन विवाद में हिंदू पक्ष के मुख्य वकील थे।

पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार पराशरण ने सुप्रीम कोर्ट में "राम लला विराजमान" के पक्ष में पूरी विवादित ज़मीन पर कब्ज़े के लिए सफलतापूर्वक दलीलें दीं।

सुनवाई के दौरान, 92 साल के इस सीनियर वकील ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि उसे अपने सामने आए सभी मामलों में "पूरा और सही न्याय" करना चाहिए और उनकी आखिरी इच्छा इस केस को पूरा करना है।

सबसे आगे की लाइन में बैठकर, उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाते हुए सुना।

फ़ैसला आते ही, हिंदू पक्ष के वकीलों ने उन्हें घेर लिया और बधाई दी, लेकिन 90 से ज़्यादा उम्र के इस वकील ने अपनी भावनाओं पर काबू रखा।

कुछ मिनटों बाद, अपने जूनियर्स की मदद से वे कोर्टरूम से बाहर आए और लोगों को अपने मोबाइल फ़ोन पर उनकी तस्वीरें लेने दीं।

हिंदू धर्मग्रंथों का हवाला देकर अपनी दलीलें रखने वाले विद्वान हिंदू के. परासरन को सुप्रीम कोर्ट के जज और मद्रास हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजय किशन कौल ने 'इंडियन बार का पितामह' कहा था।


स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज

केंद्र सरकार ने स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती को न्यास का सदस्य बनाया है। हालांकि राम मंदिर आंदोलन में ये अग्रिम पंक्ति के नेताओं में नहीं रहे लेकिन मार्गदर्शक के रूप में इनकी भूमिका रही है, वह लंबे समय तक आंदोलन का समर्थन और मार्गदर्शन करने वाले प्रमुख संतों में गिने जाते रहे हैं।

विश्व हिंदू परिषद द्वारा चलाए गए राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान शिलापूजन, शिलायात्राओं तथा धर्म संसदों में उन्होंने सक्रिय रूप से भाग लिया है।

इनके बारे में विहिप की धर्म संसदों में अध्यक्ष के रूप में शामिल होने और विहिप नेता अशोक सिंघल के उनसे परामर्श लेने की बात कही जाती है।

हालांकि शंकराचार्य की पदवी को लेकर इनका विवाद अदालत में विचाराधीन है और मंदिर की दिशा को लेकर विहिप से वैचारिक मतभेद की बात भी मंदिर आंदोलन के समय चर्चा में रहती थी।


स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ जी महराज

तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ जी महराज उडुपी के पेजावर मठ की परंपरा के प्रमुख संत हैं और अपने गुरु स्वामी विश्वेशतीर्थ के उत्तराधिकारी हैं। स्वामी विश्वेशतीर्थ राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं और विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। उन्होंने राम मंदिर निर्माण के पक्ष में लगातार समर्थन दिया और अयोध्या से जुड़े धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।


युगपुरुष परमानंद गिरी जी

ट्रस्ट के सदस्य युग पुरुष महामंडलेश्वर स्वामी परमानंद गिरि जी महाराज का जन्म 1930 के दशक के उत्तरार्ध में गंगा के पास मावी धाम में हुआ था।

उन्हें उनके गुरु स्वामी अखंडानंद जी महाराज ने शिष्य के रूप में स्वीकार किया था। वे संत बन गए और कर्म योगी तथा ज्ञानी योगी के रूप में विख्यात हैं।

उन्होंने वर्ष 2000 में संयुक्त राष्ट्र में आयोजित आध्यात्मिक नेताओं के विश्व सहस्राब्दी शांति शिखर सम्मेलन को भी संबोधित किया था। उन्होंने योग और वेदांत पर 150 से अधिक पुस्तकें और कई प्रवचन लिखे हैं।

स्कूलों, अस्पतालों, आश्रमों, वृद्धाश्रमों और गौशालाओं सहित उनकी अनेक मानवीय परियोजनाएं समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्यरत हैं। उनका संदेश सरल है: "स्वयं को जानो और हम सब एक हैं।"


ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी

ये भारत के प्रमुख वैदिक विद्वानों, कथावाचकों और संतों में गिने जाते हैं। इनका पूर्व नाम आचार्य किशोरजी मदनगोपाल व्यास था। स्वामी गोविंद देव गिरी का जन्म 25 जनवरी 1949 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के बेलापुर में हुआ था।

वे वेद, उपनिषद, भगवद्गीता, रामायण और भागवत पर अपने प्रवचनों के लिए प्रसिद्ध हैं। मंदिर निर्माण के लिए देशव्यापी निधि समर्पण अभियान, धन-संग्रह, ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और मंदिर परियोजना के सार्वजनिक संवाद में उनकी प्रमुख भूमिका रही है।


डाक्टर अनिल मिश्र

ट्रस्ट के स्थायी सदस्य डाक्टर अनिल मिश्र पेशे से होम्योपैथिक चिकित्सक हैं। आप राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से लम्बे समय से जुड़े हुए हैं। आप को संघ में प्रांत कार्यवाह के रूप में बड़ी जिम्मेदारी भी मिली थी।

राम मंदिर आंदोलन में भी आपकी सक्रिय भूमिका रही है। खास बात यह है कि अनिल मिश्र न तो बड़े मठ के महंत हैं, न ही राष्ट्रीय स्तर के कानून के जानकार बल्कि वे अयोध्या के स्थानीय प्रतिनिधि और राम मंदिर आंदोलन के जमीनी कार्यकर्ता रहे हैं।

इसी रूप में इन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया। खास बात यह है कि प्राण प्रतिष्ठा के पूर्व अनुष्ठानों में उन्हें प्रमुख यजमान की भूमिका मिली थी।


कृष्ण मोहन (पूर्व आईएफएस)

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के सदस्य पूर्व आईएफएस अधिकारी कृष्ण मोहन को बाद में ट्रस्टी मनोनीत किया गया। यह नियुक्ति राम मंदिर के ट्रस्टी रहे कामेश्वर चौपाल के स्थान पर हुई है, जिनका फरवरी 2025 में निधन हो गया था।

कृष्ण मोहन ने लखनऊ विश्वविद्यालय से 70 के दशक में एमएससी की पढ़ाई पूरी की थी। एटॉमिक एनर्जी के क्षेत्र में पांच साल काम किया है।

महाराष्ट्र कैडर में उनका चयन भारतीय वन सेवा में हुआ था। 2012 में वह सेवानिवृत हुए। इसके बाद से समाज सेवा के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहे। सर्वसम्मति से कृष्ण मोहन को सदस्य नियुक्त किया गया है।


महंत नृत्यगोपाल दास

महंत नृत्य गोपाल दास अयोध्या के सबसे बड़े मंदिर, मणि राम दास की छावनी के प्रमुख और राम जन्मभूमि न्यास औरश्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के प्रमुख हैं, जो अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए गठित संस्थान हैं।

वे श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के भी प्रमुख हैं। वह 1984 से राम जन्मभूमि आंदोलन से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। 2006 में जब रामचन्द्र दास परमहंस की मृत्यु हुई तब उन्होंने राम जन्मभूमि न्यास के प्रमुख का पद संभाला था। वह केंद्र सरकार द्वारा गठित नये ट्रस्ट के भी मुखिया हैं।


चम्पत राय महासचिव

राम मंदिर आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं चम्पत राय। जिनकी मंदिर आंदोलन की शुरुआत से ही सक्रिय भागीदारी रही है। उन्होंने 1990 के दशक से राम जन्मभूमि आंदोलन की रणनीति, दस्तावेज़ीकरण और न्यायालयी लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी कारण तमाम लोग उन्हें रामलला का पटवारी भी कहते रहे हैं। वह 2020 में ट्रस्ट बनने के बाद महासचिव नियुक्त हुए। मंदिर भूमि खरीद विवाद उनके नाम से जुड़ा सबसे चर्चित विवाद था। यह मामला 2021 में तूल पकड़ गया था। आरोप लगाया गया था कि राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई कुछ जमीन का मूल्य बहुत कम समय में कई गुना बढ़ाकर खरीदा गया। आरोपों में ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों और भूमि विक्रेताओं का नाम आया था। चंपत राय ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया था और कहा था कि सभी खरीद कानूनी प्रक्रिया के अनुसार हुई हैं। बाद में इस मामले में कोई ऐसा न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार सिद्ध किया हो।


महंत दिनेन्द्र दास

ये अयोध्या के प्रमुख संतों में से हैं और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी हैं। उनकी विशेष पहचान इस बात से है कि वे राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में पक्षकार रहे निर्मोही अखाड़े के प्रतिनिधि के रूप में ट्रस्ट में शामिल किए गए थे। खास बात यह है कि निर्मोही अखाड़ा राम जन्मभूमि विवाद का सबसे पुराना पक्षकार माना जाता है। 1885 में महंत रघुवीर दास द्वारा दायर मुकदमे से लेकर आधुनिक दौर की कानूनी लड़ाई तक अखाड़ा इस मामले से जुड़ा रहा। महंत दिनेन्द्र दास इसी अखाड़े के प्रतिनिधि के रूप में आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा रहे हैं।


ज्ञानेश कुमार आईएएएस (सेवानिवृत्त)

ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के केरल कैडर के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं। वर्तमान में वह भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में सेवा दे रहे हैं। जब केंद्र सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया था, तब ज्ञानेश कुमार केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे। ज्ञानेश ने गृह मंत्रालय के अधिकारी के रूप में राम मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट की स्थापना और प्रशासनिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ये भी ट्रस्ट के आधिकारिक ट्रस्टी हैं।


अवनीश अवस्थी रिटा. आईएएस

अवनीश कुमार अवस्थी उत्तर प्रदेश कैडर के 1987 बैच के सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं। अवस्थी को सेवानिवृत्त होने के बाद 2022 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया था। अवस्थी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बहुत करीबी माने जाते हैं। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी को ऊर्जा का अतिरिक्त प्रभार भी दिया है। एके शर्मा राज्य में ऊर्जा मंत्री हैं। वे उत्तर प्रदेश सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, जहां उन्होंने गृह एवं गोपनीयता , धार्मिक मामलों और सूचना जैसे कई विभागों का प्रभार संभाला। उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का "दाहिना हाथ" कहा जाता है। यह ट्रस्ट के आधिकारिक ट्रस्टी हैं।

जिलाधिकारी अयोध्या

अयोध्या के जिलाधिकारी इस ट्रस्ट के पदेन सदस्य है और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में शामिल हैं। ट्रस्ट के नियमों के अनुसार, यह पद अयोध्या के वर्तमान डीएम के लिए आरक्षित है जो कि हिंदू धर्म का पालन करने वाले होने चाहिए।


नृपेंद्र मिश्र (सेवानिवृत्त आईएएस)

नृपेंद्र मिश्र श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट गठन समिति के चेयरमैन के रूप में पदेन (Ex-officio) सदस्य हैं। वे ट्रस्ट द्वारा गठित मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और ट्रस्ट के आधिकारिक सदस्य हैं।

नियमतः ट्रस्ट में नौ स्थायी और छह नामित सदस्य होते हैं। लेकिन बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र का निधन होने के बाद से एक पद रिक्त है जिसे भरने पर विचार चल रहा है।

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Ramkrishna Vajpei

Ram Krishna Vajpei is a veteran journalist, political analyst, and data journalism expert with a distinguished career spanning more than four decades. Since beginning his journalism journey in 1982, he has worked across print, broadcast, and digital media platforms, specializing in in-depth research and analytical reporting on socio-political issues. An advocate of modern data journalism and the application of AI and large language models (LLMs) in media, he is also actively involved in mentoring and training aspiring journalists. Vajpei is currently pursuing a PhD in Media Studies.

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