राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सपा का बड़ा हमला: SIT जांच पर उठाए सवाल, न्यायिक जांच की मांग तेज

Ayodhya News: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे में कथित चोरी मामले पर सपा ने एसआईटी जांच पर सवाल उठाए हैं। पवन पांडेय ने बिना एफआईआर जांच को गैरकानूनी बताते हुए सुप्रीम कोर्ट निगरानी में न्यायिक जांच की मांग की है।

Harsh Sharma
Published on: 17 Jun 2026 3:59 PM IST
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सपा का बड़ा हमला: SIT जांच पर उठाए सवाल, न्यायिक जांच की मांग तेज
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Ayodhya News: समाजवादी पार्टी (एसपी) ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित चोरी के मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) पर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि बिना एफआईआर दर्ज किए इस तरह की जांच का कोई कानूनी आधार नहीं है। सपा नेताओं ने इसे लेकर सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए हैं। सपा नेता और पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडेय, जिन्हें पवन पांडेय के नाम से भी जाना जाता है, ने इस मामले पर खुलकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक किसी मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं होती, तब तक एसआईटी जांच का कोई मतलब नहीं है।

एसआईटी की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

पवन पांडेय ने यह भी आरोप लगाया कि जांच टीम में शामिल कुछ अधिकारी पहले से ही अन्य मामलों में जांच के घेरे में हैं। ऐसे में उनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जांच करने वाली टीम पूरी तरह निष्पक्ष और भरोसेमंद हो। राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। इस टीम में लखनऊ मंडल के कमिश्नर विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज के आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं। यह टीम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े दान और खर्च के मामलों की जांच कर रही है।

दान और आभूषणों की जांच पर फोकस

एसआईटी ने जांच के दौरान मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कई कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ की है। खास तौर पर उन कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है जो दान की गिनती और लेखा-जोखा संभालते हैं। जांच टीम ने ट्रस्ट से उन सभी कर्मचारियों की सूची भी मांगी है जो वित्तीय कार्यों से जुड़े हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि इन कर्मचारियों और उनके परिवार की संपत्ति में किसी तरह की असामान्य बढ़ोतरी तो नहीं हुई है।

सपा की न्यायिक जांच की मांग

सपा नेता पवन पांडेय ने मांग की है कि इस पूरे मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हुआ था, इसलिए ऐसी गंभीर शिकायतों पर अदालत को खुद संज्ञान लेना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज पर रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने ट्रस्ट के पदाधिकारियों और ट्रस्टियों के मंदिर परिसर में प्रवेश पर भी अस्थायी रोक लगाने की मांग की है।

पूर्व आरोपों और पारदर्शिता पर सवाल

पवन पांडेय ने एक पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह के आरोपों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महिपाल सिंह ने पहले अनियमितताओं की शिकायत की थी, लेकिन उन पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही नौकरी से हटा दिया गया। उन्होंने कहा कि अगर मंदिर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल में पारदर्शिता नहीं रखी जाएगी तो इससे लोगों का विश्वास कमजोर होगा। इसलिए पूरे प्रबंधन को अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट करनी चाहिए।

प्रबंधन में बदलाव की मांग

सपा नेता ने यह भी सुझाव दिया कि मंदिर प्रबंधन में अयोध्या के संतों, महंतों और शंकराचार्यों को भी शामिल किया जाना चाहिए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और धार्मिक संस्थानों पर जनता का भरोसा मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया और वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह साफ-सुथरी और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी तरह के विवाद से बचा जा सके।

Harsh Sharma
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Harsh Sharma

Harsh Sharma is a Content Writer at Newstrack.com.

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