UP News: अयोध्या चढ़ावा चोरी विवाद पर सियासत तेज, सपा के आरोपों पर भाजपा-संत समाज का पलटवार

UP News: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद पर सपा और भाजपा आमने-सामने, चंपत राय, पप्पू यादव और संत समाज के बयानों से सियासत तेज।

Newstrack Network
Published on: 3 Aug 2026 11:13 PM IST
UP News: अयोध्या चढ़ावा चोरी विवाद पर सियासत तेज, सपा के आरोपों पर भाजपा-संत समाज का पलटवार
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Ayodhya Ram Mandir Donation Theft controversy

UP News: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में 'चढ़ावा चोरी' के आरोपों को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति और धर्मनगरी का माहौल पूरी तरह गरमा गया है। संसद परिसर में बिहार के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव द्वारा साधु का भेष धारण कर चंदा जुटाने के 'सांकेतिक नाटक' के बाद शुरू हुआ विवाद अब व्यापक राजनीतिक व धार्मिक आर-पार की जंग में बदल चुका है।

एक तरफ समाजवादी पार्टी ने सरकार पर 'लीपापोती' और चंपत राय द्वारा गुप्त रूप से मंदिर व्यवस्था चलाने का गंभीर आरोप लगाया है, तो दूसरी तरफ उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और अखिल भारतीय संत समिति ने विपक्षी दलों पर सनातन धर्म व साधु-संतों का अपमान करने का आरोप लगाते हुए देशव्यापी अभियान का ऐलान किया है।सपा नेता पवन पांडेय का पलटवार: "सीएम का 15 दिन का दावा फेल, परोक्ष रूप से व्यवस्था चला रहे चंपत राय"

सांसद पप्पू यादव के प्रदर्शन के विरोध में संतों द्वारा सपा सांसद अवधेश प्रसाद के पोस्टरों पर कालिख पोतने और पुतला फूंकने के बाद पूर्व सपा मंत्री तेज नारायण पांडेय उर्फ पवन ने अयोध्या में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोर्चा खोला:18 लाख अयोध्यावासियों का अपमान: पवन पांडेय ने कहा कि जनादेश से चुने गए सांसद अवधेश प्रसाद के पोस्टरों पर कालिख पोतना और जूते मारना अयोध्या-फैजाबाद की 18 लाख और देश की 140 करोड़ जनता का सीधा अपमान है।

15 दिन का दावा बनाम 1 महीने की लीपापोती: उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधते हुए कहा, "सीएम ने दावा किया था कि 15 दिनों में चढ़ावा चोरी मामले में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, लेकिन एक महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी केवल लीपापोती की जा रही है।"

चंपत राय व अनिल मिश्र पर आरोप: सपा नेता ने आरोप लगाया कि चंपत राय आज भी अयोध्या में रहकर गुप्त रूप से मंदिर व्यवस्था का संचालन कर रहे हैं और सबसे प्रभावशाली बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि संघ, भाजपा व वीएचपी से जुड़े अनिल मिश्र की कोष संचालन में प्रभावी भूमिका रही है, फिर भी किसी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब सभी को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एसआईटी (SIT) की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।

पप्पू यादव के वेश पर सफाई: पवन पांडेय ने स्पष्ट किया कि पप्पू यादव ने भगवा वस्त्र राम मंदिर के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज के संदर्भ में पहने थे और अगर इससे किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें माफी मांगनी चाहिए।डिप्टी CM ब्रजेश पाठक का तीखा हमला: "सपा, कांग्रेस और पप्पू यादव को जनता सबक सिखाएगी"प्रयागराज दौरे पर पहुँचे उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने संसद् में हुए प्रदर्शन की कड़े शब्दों में निंदा की:

संतों का स्वांग रचना अपमान: ब्रजेश पाठक ने कहा कि चढ़ावा चोरी के मामले में कोई भी साधु-संत शामिल नहीं था, फिर भी संसद परिसर में संतों का स्वांग रचा गया जो पूरे संत समाज का अपमान है। पप्पू यादव, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के इस रवैये को देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी।

अस्पतालों का औचक निरीक्षण: अपने प्रयागराज प्रवास के दौरान डिप्टी सीएम ने स्वरूपरानी नेहरू (SRN) चिकित्सालय का जायजा लिया और पाई गई कमियों पर अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। इसके साथ ही उन्होंने मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में निर्माणाधीन पीडियाट्रिक (बाल रोग) अस्पताल के कार्य की भी समीक्षा की।

वाराणसी से 'देशव्यापी सनातन शंखनाद' का ऐलान: संतों का कड़ा प्रतिकासंसद परिसर में हुए घटनाक्रम के विरोध में अखिल भारतीय संत समिति की वाराणसी में एक आपातकालीन बैठक आयोजित की गईहर जिले में होंगी जनसभाएं: संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद ने कहा कि राजनीति में बार-बार भगवा वस्त्रों, सनातन धर्म और साधु-संतों को निशाना बनाया जा रहा है। इसका मुंहतोड़ जवाब देने के लिए देशभर में 'सनातन शंखनाद' अभियान चलाया जाएगा।

जनजागरण अभियान: इसके तहत देश के हर जिले में संत समाज की सभाएं, जनजागरण और सार्वजनिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि सनातन धर्म का अपमान करने वाले राजनीतिक चेहरों को बेनकाब किया जा सके।श्रीकाशी विद्वत परिषद का समर्थन: इस देशव्यापी अभियान को 'श्रीकाशी विद्वत परिषद' ने भी अपना पूर्ण समर्थन देने की आधिकारिक घोषणा की है।अयोध्या के चढ़ावा चोरी प्रकरण ने अब एक सामान्य जांच से इतर बड़ा राजनीतिक व सामाजिक रूप ले लिया है। एक ओर विपक्ष एसआईटी जांच की निष्पक्षता और ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्तारूढ़ दल और संत समाज इसे सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश बताकर आर-पार के मूड में हैं।

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