अयोध्या दीपोत्सव 2026: सरयू तट पर 2200 बटुक करेंगे महाआरती, 30 लाख दीपों से जगमगाएगी रामनगरी

Ayodhya Deepotsav 2026: अयोध्या दीपोत्सव 2026 में 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य है। छह और सात नवंबर को सरयू तट पर 2200 बटुक महाआरती करेंगे। सीएम योगी आदित्यनाथ 5100 बत्तियों की विशेष आरती का शुभारंभ करेंगे।

Newstrack Network
Published on: 19 Oct 2026 6:16 PM IST
Ayodhya Deepotsav 2026
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Ayodhya Deepotsav 2026 (Image Credit-Social Media)

अयोध्या, 19 अक्टूबर 2026। भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में इस वर्ष दीपोत्सव को ऐतिहासिक स्वरूप देने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सरयू के तट पर एक साथ 2200 बटुकों की महाआरती के माध्यम से नया विश्व रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है। छह और सात नवंबर को आयोजित होने वाले इस विशेष कार्यक्रम में हजारों दीपों की रोशनी, वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और घंटा-घड़ियाल की ध्वनि के बीच सरयू की आरती होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस आयोजन में शामिल होंगे और 5100 बत्तियों की विशेष महाआरती का शुभारंभ करेंगे। दीपोत्सव के अंतर्गत इस बार 30 लाख दीप प्रज्ज्वलित करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। हालांकि, दोनों कीर्तिमान आयोजनों की सफलता और निर्धारित मानकों के सत्यापन के बाद ही आधिकारिक रूप से स्थापित माने जाएंगे।

2200 बटुक एक साथ करेंगे सरयू की महाआरती

रामनगरी में दीपोत्सव केवल दीप प्रज्ज्वलन का आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि सरयू की आरती, धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से यह एक बड़े उत्सव का रूप ले चुका है। इस वर्ष सामूहिक महाआरती को विशेष महत्व दिया जा रहा है। आयोजन की योजना के अनुसार, 2200 बटुक एक साथ सरयू की आरती करेंगे। सभी प्रतिभागियों के लिए एक समान वेशभूषा निर्धारित की गई है। बटुक पीतांबरी धारण करके महाआरती में शामिल होंगे। आयोजन में महिलाओं की भागीदारी भी प्रस्तावित है। सामूहिक आरती के दौरान प्रतिभागियों की निर्धारित स्थिति, समय और समन्वय पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि धार्मिक अनुष्ठान की गरिमा के साथ विश्व रिकॉर्ड के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं भी पूरी की जा सकें।

छह और सात नवंबर को सरयू तट पर विशेष आयोजन

सरयू तट पर होने वाली महाआरती के लिए छह और सात नवंबर को विशेष तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन स्थल पर एक साथ बड़ी संख्या में प्रतिभागियों की उपस्थिति को देखते हुए उनके बैठने या खड़े होने की व्यवस्था, प्रवेश और निकास मार्ग तथा आरती की सामग्री का प्रबंधन महत्वपूर्ण होगा। शंख, घंटा-घड़ियाल और मंत्रोच्चार के बीच एक साथ आरती करते बटुकों का दृश्य इस वर्ष के दीपोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होने की उम्मीद है। सभी प्रतिभागियों की एक समान पीतांबरी वेशभूषा आयोजन को दृश्यात्मक एकरूपता प्रदान करेगी।

1100 अर्चकों से शुरू हुआ रिकॉर्ड का सिलसिला, अब 2200 का लक्ष्य

इस बार महाआरती के माध्यम से पिछले वर्षों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, वर्ष 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद आयोजित दीपोत्सव में 1100 अर्चकों ने एक साथ सरयू की आरती करके विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इसके बाद वर्ष 2025 में सामूहिक आरती के प्रतिभागियों की संख्या बढ़ाकर 2100 की गई। इस वर्ष 2200 बटुकों की भागीदारी का प्रस्ताव है। यदि निर्धारित संख्या में प्रतिभागी विश्व रिकॉर्ड के मानकों के अनुरूप सामूहिक आरती करते हैं और उसका सत्यापन होता है, तो अयोध्या के नाम एक और उपलब्धि दर्ज हो सकती है।

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की निगरानी में होगी प्रतिभागियों की गणना

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की ओर से निश्चल बरोट के आयोजन में उपस्थित रहने और महाआरती में शामिल बटुकों की संख्या की गणना करने की जानकारी दी गई है। किसी भी सामूहिक आयोजन का रिकॉर्ड केवल घोषित संख्या के आधार पर नहीं बनता। वास्तविक प्रतिभागियों की उपस्थिति और निर्धारित प्रक्रिया का सत्यापन आवश्यक होता है। इसलिए आयोजन समिति के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती होगी कि सभी प्रतिभागी समय पर अपने निर्धारित स्थानों पर पहुंचें और सामूहिक आरती की प्रक्रिया व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो। विश्व रिकॉर्ड की आधिकारिक पुष्टि सत्यापन के बाद ही की जा सकेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे 5100 बत्तियों की विशेष आरती का शुभारंभ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति भी इस आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री सरयू तट पर पहुंचकर बटुकों का उत्साहवर्धन करेंगे और अतिथियों के साथ महाआरती का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर 5100 बत्तियों की विशेष महाआरती का आयोजन प्रस्तावित है। सरयू आरती के बाद म्यूजिकल ग्रीन आतिशबाजी शो की भी योजना बनाई गई है। इसके पश्चात मुख्यमंत्री राम की पैड़ी परिसर पहुंचकर दीपोत्सव के मुख्य कार्यक्रम में भाग लेंगे। कार्यक्रम का अंतिम समय और विस्तृत क्रम प्रशासनिक तैयारियों के अनुसार निर्धारित होगा।

30 लाख दीपों से जगमगाएगी रामनगरी

दीपोत्सव में 30 लाख दीप जलाने का लक्ष्य अपने आप में व्यापक तैयारी की मांग करता है। इतनी बड़ी संख्या में दीपों की व्यवस्था, उन्हें निर्धारित स्थानों पर सजाने, प्रज्ज्वलित करने और निर्धारित अवधि तक जलाए रखने के लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों तथा आयोजन से जुड़े कर्मचारियों के समन्वय की आवश्यकता होगी। राम की पैड़ी और सरयू तट पर होने वाले कार्यक्रमों में श्रद्धालुओं तथा पर्यटकों की संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात, अग्निशमन और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं का प्रबंधन भी महत्वपूर्ण रहेगा।

भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की परंपरा से जुड़ा है दीपोत्सव

अयोध्या के दीपोत्सव का धार्मिक महत्व भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की परंपरा से जुड़ा है। दीपों के माध्यम से प्रकाश और उल्लास की अभिव्यक्ति भारतीय सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। रामनगरी में इस परंपरा को बड़े सार्वजनिक आयोजन के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। सरयू की महाआरती इस उत्सव में नदी के प्रति श्रद्धा और धार्मिक अनुष्ठान का एक अलग आयाम जोड़ती है। इसी कारण दीपोत्सव में दीपों की संख्या के साथ सामूहिक आरती भी प्रमुख आकर्षण बनती जा रही है।

सफाई, सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों पर भी रहेगा जोर

विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारियों के बीच आयोजन के पर्यावरणीय पक्ष पर ध्यान देना भी आवश्यक होगा। सरयू नदी के तट पर बड़ी संख्या में दीपों, पूजन सामग्री और दर्शकों की उपस्थिति के कारण सफाई तथा कचरा प्रबंधन की पर्याप्त व्यवस्था महत्वपूर्ण है। म्यूजिकल ग्रीन आतिशबाजी के प्रस्तावित कार्यक्रम में भी सुरक्षा और पर्यावरण संबंधी लागू मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा। किसी बड़े धार्मिक आयोजन की सफलता केवल उसकी भव्यता या रिकॉर्ड से नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की सुविधा, सार्वजनिक सुरक्षा और आयोजन स्थल की स्वच्छता से भी निर्धारित होती है।

लगातार तीसरे वर्ष बढ़ेगी सामूहिक महाआरती में प्रतिभागियों की संख्या

इस वर्ष का दीपोत्सव इसलिए भी विशेष माना जा रहा है क्योंकि सामूहिक महाआरती के प्रतिभागियों की संख्या लगातार तीसरे वर्ष बढ़ाने की योजना है। वर्ष 2024 में 1100 अर्चकों से शुरू हुई रिकॉर्ड बनाने की यह श्रृंखला वर्ष 2025 में 2100 तक पहुंची और अब 2200 बटुकों की सामूहिक भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। इस क्रम में आयोजन के विस्तार के साथ व्यवस्थाओं की गुणवत्ता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा।

छह और सात नवंबर को अयोध्या में जुटेंगे श्रद्धालु

छह और सात नवंबर को अयोध्या का सरयू तट एक बार फिर धार्मिक आस्था और सामूहिक आयोजन का केंद्र बनेगा। एक ओर 2200 बटुकों की महाआरती से नया विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है, तो दूसरी ओर 30 लाख दीपों से रामनगरी को आलोकित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री की उपस्थिति, 5100 बत्तियों की विशेष आरती और प्रस्तावित आतिशबाजी इस आयोजन को और व्यापक स्वरूप देंगे। अब यह देखना होगा कि अयोध्या इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को किस तरह सफलतापूर्वक पूरा करती है और क्या इस वर्ष भी दीपोत्सव के नाम नया विश्व कीर्तिमान दर्ज होता है।

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