TRENDING TAGS :
राम मंदिर कांड के मास्टरमाइंड भंडाफोड़! टिन्नू का भतीजा निकला 'महाचोर', CCTV से खुला करोड़ों का राज
Ram Mandir Theft Expose: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच के दौरान बड़ा खुलासा हुआ है। SIT के मुताबिक टिन्नू यादव के भतीजे मनीष यादव की भूमिका जांच के केंद्र में है। पुलिस की स्पेशल जांच टीम (SIT) को मिले सीसीटीवी फुटेज में सीधे तौर पर तीन मुख्य लोग नोटों की बड़ी-बड़ी गड्डियों पर हाथ साफ करते हुए दिखाई दिए हैं।
Ram Mandir Theft Expose: अयोध्या के भव्य और पावन श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में हुई करोड़ों रुपयों की चोरी की पुलिस जांच जैसे-जैसे आगे की तरफ बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसमें शामिल शातिर चोरों की करतूतों के काले पन्ने एक-एक कर खुलने लगे हैं। इस पूरे मामले में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू का सगा भतीजा मनीष यादव नोटों की गिनती वाली टीम में भर्ती होते ही इस पूरे चोर गिरोह का मुख्य सरगना बन बैठा था। पुलिस की स्पेशल जांच टीम (SIT) को मिले सीसीटीवी फुटेज में सीधे तौर पर तीन मुख्य लोग नोटों की बड़ी-बड़ी गड्डियों पर हाथ साफ करते हुए दिखाई दिए हैं। इनमें अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा शामिल हैं। ये तीनों शातिर तरीके से नोटों की गड्डियों को अपनी जेबों में पार कर देते थे, जबकि बाकी के 3 अन्य आरोपी सीसीटीवी कैमरे के आगे एक अभेद्य घेरा बनाकर खड़े हो जाते थे ताकि चोरी छुप सके।
सिफारिश पर भर्ती और पहले ही दिन से डाका
एसआईटी की जांच रिपोर्ट से यह सनसनीखेज सच सामने आया है कि मनीष यादव की मंदिर परिसर में नौकरी खुद उसके ताऊ रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू की मजबूत सिफारिश पर लगाई गई थी। टिन्नू ने ही मनीष को नौकरी दिलाने के लिए सारे कागजात स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के रत्नेश चतुर्वेदी को सौंपे थे। इसके बाद रत्नेश ने एक प्राइवेट सिक्योरिटी सर्विस के जरिए मनीष की संविदा पर भर्ती करवा दी। रिकॉर्ड के अनुसार, 15 अप्रैल 2026 को मनीष की नौकरी लगी और इसके कुछ ही दिनों बाद, 11 मई 2026 के सीसीटीवी कैमरे में वह चढ़ावे के लाखों रुपये चोरी करते हुए रंगे हाथों कैद हो गया।
सिर्फ 50 दिन में बनी चोरी की बड़ी योजना
चोरों के आका टिन्नू यादव ने खुद सीधे तौर पर पैसे नहीं चुराए, बल्कि अपनी जगह मोहरे के रूप में अपने भतीजे मनीष को आगे कर दिया। मनीष यादव गणना कक्ष में सिर्फ 50 दिन ही काम कर पाया था, लेकिन इतने कम समय में ही वह इस पूरे काले खेल का सबसे बड़ा खिलाड़ी बन गया। अयोध्या के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि आमतौर पर जब कोई नया कर्मचारी आता है, तो उसे सिस्टम को समझने में थोड़ा समय लगता है। लेकिन मनीष 26 अप्रैल को काम पर आता है और पहले ही दिन से पैसे चुराने में लग जाता है। यह साफ इशारा करता है कि उसकी भर्ती ही सिर्फ और सिर्फ मंदिर का चढ़ावा लूटने के मकसद से कराई गई थी।
ताऊ के रसूख का उठाया पूरा फायदा
चूंकि राम मंदिर ट्रस्ट के अंदर की कई अनधिकृत और गुप्त जिम्मेदारियां टिन्नू यादव के पास थीं, इसलिए टिन्नू के परिवार का होने के नाते मनीष की धौंस नोटों की गिनती वाले पूरे कमरे में चलती थी। पहले से वहां चोरी की ताक में बैठे पुराने गणनाकर्मियों ने भी बिना देर किए मनीष को अपने गिरोह में शामिल कर लिया। देखते ही देखते मनीष ने चोरी की पूरी कमान अपने हाथों में ले ली। एसआईटी को 27 अप्रैल से 5 जून तक की फुटेज मिली है, जिसने इस पूरे रैकेट की पोल खोल दी। हालांकि, सबसे ज्यादा नकदी और संपत्ति अविनाश शुक्ला के ठिकानों से मिली है, जिसके लिए मनीष एक मुख्य मददगार की भूमिका निभा रहा था।
टिन्नू और मनीष की रिमांड पर सुनवाई
इस महा-घोटाले की तह तक जाने के लिए पुलिस ने रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू और मनीष यादव की 7 दिनों की कस्टडी रिमांड की मांग की है। मामले के विवेचक और क्षेत्राधिकारी आशुतोष तिवारी ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर दोनों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने की अनुमति मांगी है। पुलिस को पूरा भरोसा है कि कस्टडी में लेकर की जाने वाली इस कड़ी पूछताछ के दौरान चोरी किए गए करोड़ों रुपयों और अन्य ठिकानों के बारे में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। अदालत इस अर्जी पर शुक्रवार को अपना फैसला सुनाएगी।
79 लाख या 3 करोड़? असली आंकड़ा क्या है!
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा रहस्य और विवाद चोरी की गई कुल रकम को लेकर खड़ा हो गया है। शुरुआत में पुलिस को कुल 79 लाख रुपये की बरामदगी की बात बताई गई थी, लेकिन बाद में राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने आशंका जताई कि कुल चोरी करीब 3 करोड़ रुपये की हो सकती है। अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही है कि क्या ट्रस्ट के अंदर ही अंदर आरोपियों से पूरे 3 करोड़ रुपये वसूल कर लिए गए थे, लेकिन पुलिस और कानूनी कार्रवाई से बचने व मामले को छोटा दिखाने के लिए कागजों पर केवल 79 लाख रुपये की ही बरामदगी दर्ज कराई गई? इस रहस्यमयी खेल की जांच भी अब तेजी से चल रही है।


