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राम मंदिर को कब मिलेगा नया बॉस? नृपेंद्र मिश्रा बताई नए CEO की ताकत, सरकार का नहीं होगा कोई दखल
Ram Mandir CEO: राम मंदिर ट्रस्ट में बड़े बदलाव के बीच नए CEO की नियुक्ति प्रक्रिया तेज हो गई है। नृपेंद्र मिश्रा ने नए CEO की शक्तियों, चयन प्रक्रिया और सरकार की भूमिका को लेकर बड़ा बयान दिया।
Ram Mandir CEO: अयोध्या का भव्य राम मंदिर इन दिनों देश की सुर्खियों में सबसे ऊपर बना हुआ है। मंदिर परिसर में हुए बड़े दान चोरी कांड के बाद से ही यहां लगातार कड़े और बड़े फैसले लिए जा रहे हैं। इस महा-घोटाले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन, गुनहगारों के खिलाफ एफआईआर (FIR) और उनकी धरपकड़ के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अंदर एक बड़ा भूचाल आ गया। चंपत राय और अनिल मिश्रा जैसे कद्दावर पदाधिकारियों के इस्तीफे स्वीकार होने और कृष्ण मोहन को अंतरिम महामंत्री बनाए जाने के बाद, अब राम मंदिर प्रशासन इतिहास के सबसे बड़े प्रशासनिक फेरबदल से गुजर रहा है। 22 जनवरी को हुई ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा के बाद यह पहला मौका है जब व्यवस्था को पूरी तरह से बदला जा रहा है। अब मंदिर के संचालन को बेहद पेशेवर बनाने के लिए पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया सुपर-फास्ट मोड में आ गई है।
सरकार का नहीं होगा कोई दखल
राम मंदिर में मचे इस अभूतपूर्व बवाल के बीच अब हर किसी के मन में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या नए सीईओ के आने के बाद ट्रस्ट का दबदबा खत्म हो जाएगा? क्या सीईओ पूरी तरह से स्वतंत्र होगा या वह केंद्र और राज्य सरकार के इशारों पर काम करेगा? इन सभी जलते हुए सवालों पर से राम मंदिर कंस्ट्रक्शन कमेटी के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने पूरी तरह पर्दा हटा दिया है। रविवार को मीडिया से खास बातचीत करते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने साफ शब्दों में कहा कि जो भी नया सीईओ बनकर आएगा, वह मंदिर के तमाम वित्तीय (फाइनेंशियल) लेन-देन और व्यवस्थाओं का मुख्य जिम्मा संभालेगा। मगर सबसे बड़ी बात यह है कि राम मंदिर ट्रस्ट या नए सीईओ के रोजमर्रा के कामकाज में सरकार का कोई भी दखल या हस्तक्षेप बिल्कुल नहीं होगा।
ट्रस्ट के असिस्टेंट होंगे नए CEO
नृपेंद्र मिश्रा ने सीईओ की असली पावर और पोजीशन को साफ करते हुए बताया कि तकनीकी और व्यावहारिक रूप से देखा जाए तो सीईओ पूरी तरह से ट्रस्ट के एक असिस्टेंट (सहायक) के रूप में ही अपनी सेवाएं देंगे। सरकार का इसमें कोई रोल नहीं होगा और यह पूरी तरह से ट्रस्ट पर ही निर्भर करेगा कि वह नवनियुक्त सीईओ को कितने और क्या-क्या अधिकार सौंपना चाहता है। मंदिर के स्टाफ का पूरा बंदोबस्त और प्रशासनिक नियंत्रण करने के लिए कौन जिम्मेदार होगा, यह सब कुछ भी अंततः ट्रस्ट के तय दायरे के भीतर ही तय किया जाएगा। इस बेहद अहम और हाई-प्रोफाइल पद के लिए सबसे काबिल उम्मीदवार का नाम सुझाने के लिए 3 सदस्यों का एक विशेष और निष्पक्ष पैनल भी गठित कर दिया गया है।
3 दिग्गजों की कमेटी करेगी फैसला
गौरतलब है कि बीते 6 जुलाई को राम मंदिर ट्रस्ट ने इस विशेष सीईओ पद की भर्ती के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का आधिकारिक ऐलान किया था। इस शक्तिशाली कमेटी में देश के 3 बड़े दिग्गजों को शामिल किया गया है, जिनमें रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी और एनआईटी रायपुर के पूर्व चेयरमैन सुरेश हवारे शामिल हैं। इसी 3 सदस्यीय कमेटी ने शनिवार को दिल्ली में हुई एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक के बाद राम मंदिर के सीईओ के चयन को लेकर सारी योग्यताओं (अर्हताओं) और आवेदन भेजने की आखिरी तारीख की घोषणाएं सार्वजनिक कर दी थीं।
चयन प्रक्रिया से दूर रहेंगे नृपेंद्र मिश्रा
जब नृपेंद्र मिश्रा से पूछा गया कि क्या वे भी इस सीईओ को चुनने वाली कमेटी का हिस्सा होंगे, तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे उम्मीदवारों के नामों की सिफारिश करने वाली इस चयन समिति की किसी भी बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि इतनी बड़ी चोरी की घटना के बावजूद अयोध्या आने वाले रामभक्तों के मन में व्यवस्था को लेकर कोई नाराजगी नहीं है। मिश्रा ने कहा, "अगर आप अंगद टीला या सुग्रीव किला के पास जाकर आम श्रद्धालुओं से बात करेंगे, तो मैं आपको पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि भगवान राम, यहां की पूजा पद्धति या मंदिर की व्यवस्था को लेकर भक्तों के मन में अटूट आस्था है और कोई शिकायत नहीं है।"
22 जुलाई की महा-बैठक पर सस्पेंस
ट्रस्ट के भीतर चल रही अंदरूनी उथल-पुथल और आगामी बदलावों के बारे में बात करते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने एक और बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि 6 जुलाई को हुई ट्रस्ट की अहम बैठक में वे खुद शामिल नहीं थे, इसलिए उनकी मौजूदगी में कोई निर्णय नहीं लिया गया। जब मीडिया ने उनसे 22 जुलाई को होने वाली अगली बड़ी बैठक में शामिल होने पर सवाल दागा, तो उन्होंने कहा, "बैठक 22 जुलाई को तय है, लेकिन मुझे अभी तक इसका मुख्य एजेंडा नहीं पता है। कृपया यह बात समझें कि हम इस पूरे सिस्टम में बिना वोटिंग राइट्स (मतदान के अधिकार) वाले पदेन निदेशक (एक्स-ऑफिशियो डायरेक्टर) हैं। अगर एजेंडा मंदिर के कंस्ट्रक्शन (निर्माण) से जुड़ा होगा, तभी मैं शामिल होने का फैसला लूंगा।"


