Ram Mandir Scam Expose: पूर्व इंजीनियर करेगा राम मंदिर कांड का खुलासा! सबूतों के साथ SIT के सामने होंगे पेश, कई दिग्गज होंगे बेनक़ाब

Ram Mandir Scam Expose: राम मंदिर मामले में डॉ. अनिल मिश्रा पर 40% कमीशन का आरोप लगाने वाले पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा को SIT ने तलब किया है। जानिए चंपत राय के बयान और सीमेंट फर्जीवाड़े की पूरी इनसाइड स्टोरी।

Harsh Srivastava
Published on: 20 Jun 2026 3:41 PM IST (Updated on: 20 Jun 2026 3:41 PM IST)
Ram Mandir Scam Expose: पूर्व इंजीनियर करेगा राम मंदिर कांड का खुलासा! सबूतों के साथ SIT के सामने होंगे पेश, कई दिग्गज होंगे बेनक़ाब
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Ram Mandir Scam Expose: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) के सामने हर दिन एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ आ रहा है. इस हाई-प्रोफाइल मामले में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा पर भ्रष्टाचार के बेहद संगीन और सीधे आरोप लगाने वाले पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा को एसआईटी ने अब तलब कर लिया है. जांच एजेंसी ने उन्हें अपने दावों के समर्थन में पुख्ता सबूत और साक्ष्य पेश करने के लिए बुलाया है. दीनानाथ वर्मा ने खुद मीडिया को बताया कि एसआईटी के एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के पीआरओ मुकुल वर्मा का उनके पास फोन आया था. पूर्व इंजीनियर ने जांच टीम के सामने पेश होने के लिए अपनी रजामंदी तो दे दी है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने अपनी जान का खतरा बताते हुए सरकार से कड़े सुरक्षा घेरे की मांग की है.

महासचिव चंपत राय ने क्या कहा?

सोशल मीडिया पर वायरल हुए अपने एक वीडियो इंटरव्यू में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पुराने कार्यकर्ता और रिटायर्ड इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने कई हैरान करने वाले दावे किए हैं. उनका कहना है कि राम मंदिर मामले में फैसला आने के बाद खुद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने उन्हें फोन करके मंदिर निर्माण से जुड़े कामों की जिम्मेदारी संभालने के लिए बुलाया था. दीनानाथ के मुताबिक, विवाद की शुरुआत तब हुई जब निर्माण सामग्री की सप्लाई शुरू हुई और उन्होंने देखा कि सामान की असली लागत से कहीं ज्यादा बड़े-बड़े बिल बनकर आ रहे हैं. जब उन्होंने इस धांधली की शिकायत सीधे महासचिव चंपत राय से की, तो चंपत राय ने बेहद निराशाजनक अंदाज में कहा कि जाने दीजिए, यहां सब चोर हैं.

डॉ. अनिल मिश्रा पर 40 प्रतिशत कमीशन का आरोप

पूर्व लेखाकार महिपाल के बाद अब खुद को ट्रस्ट का पूर्व इंजीनियर बताने वाले दीनानाथ वर्मा ने सोशल मीडिया पर सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि ट्रस्ट के रसूखदार सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा हर बड़ी सप्लाई और काम में सीधे 40 प्रतिशत का मोटा कमीशन वसूलते थे. उन्होंने दावा किया कि एल्युमिनियम के काम को डॉ. मिश्रा ने अपने एक चहेते आदमी को दिलवाया था, जिसका रेट और डिजाइन खुद चंपत राय ने रजिस्टर में दर्ज किया था, लेकिन बाद में उसका बिल भी डेढ़ गुना बनकर आया. जब दीनानाथ ने ठेकेदार से इस बारे में कड़ाई से पूछा, तो उसने कबूला कि उसे कुल राशि का 40 प्रतिशत हिस्सा मिश्रा जी की जेब में डालना पड़ा है. दीनानाथ का दावा है कि जब उन्होंने इस बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग चंपत राय को सुनाई, तो वे भी पूरी तरह सन्न रह गए थे.

सीमेंट की बोरियों का फर्जीवाड़ा

भ्रष्टाचार के खेल का पर्दाफाश करते हुए पूर्व इंजीनियर ने बताया कि जब उन्होंने कैशियर से सामान की लिस्ट और वाउचर मांगे, तो पता चला कि साइट पर असल में केवल 200 बोरी सीमेंट का इस्तेमाल हुआ था, जबकि फर्जी तरीके से 300 बोरी सीमेंट का बिल पास कराया गया था. उनका आरोप है कि यह पूरा घोटाला राम कचहरी मंदिर के प्रांगण में ट्रस्ट का दफ्तर बनने के साथ ही शुरू हो गया था. दीनानाथ ने कहा कि जब डॉ. अनिल मिश्रा को भनक लगी कि उनकी चोरी पकड़ी जा रही है और काम में दखलअंदाजी बढ़ गई है, तो उन्होंने चंपत राय पर दबाव बनाकर उन्हें निर्माण कार्य से पूरी तरह अलग करवा दिया.

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