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Ram Janmabhoomi Trust: कौन होगा राम जन्मभूमि ट्रस्ट का नया महासचिव? 11 जुलाई की बैठक पर टिकी निगाहें
Ram Janmabhoomi Trust: अयोध्या राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे की पुष्टि ट्रस्ट ने कर दी है। 11 जुलाई की बैठक में नए पदाधिकारियों पर फैसला हो सकता है। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया कि चढ़ावा और आभूषण पूरी तरह सुरक्षित हैं।
Ram Janmabhoomi Trust: अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। पिछले कुछ समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देवगिरी ने शनिवार को एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। इस बयान में उन्होंने साफ किया कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा का इस्तीफा उन्हें प्राप्त हो गया है।
इन दोनों के पद छोड़ने के बाद अब यह सवाल हर किसी के मन में है कि इनकी जगह कौन लेगा और यह अहम जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी। फिलहाल किसी नए नाम का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि आगामी 11 जुलाई को ट्रस्ट की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है, जिसमें इन इस्तीफों पर विचार किया जाएगा और भविष्य को लेकर कई बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
श्रद्धालुओं का चढ़ावा और आभूषण पूरी तरह सुरक्षित
राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े हालिया विवादों और दोनों वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे की खबरों के बीच भक्तों के मन में भी कई तरह की आशंकाएं जन्म ले रही थीं। इसे दूर करने के लिए ट्रस्ट ने अपनी तरफ से स्थिति बिल्कुल स्पष्ट कर दी है।
ट्रस्ट ने सभी श्रद्धालुओं को आश्वस्त किया है कि प्रभु श्री राम के चरणों में जो भी चांदी की ईंटें, गहने या अन्य बहुमूल्य वस्तुएं भेंट की गई थीं, वे सब शत-प्रतिशत सुरक्षित हैं। अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर सौंपी गई एक-एक वस्तु का पूरा हिसाब-किताब ट्रस्ट के पास पूरी तरह से मौजूद है, इसलिए राम भक्तों को किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
अनिल मिश्रा की जगह ले सकते हैं कृष्ण मोहन
डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद अब इस बात की सुगबुगाहट काफी तेज हो गई है कि उनका दायित्व कृष्ण मोहन को सौंपा जा सकता है। राम जन्मभूमि परिसर से जुड़े सूत्रों का भी यही मानना है। कृष्ण मोहन का नाम हाल ही में तब सबसे ज्यादा सुर्ख़ियों में आया, जब उन्होंने चढ़ावा चोरी मामले में आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई और खुद वादी बने। एफआईआर दर्ज होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर लोग उनके बारे में काफी सर्च कर रहे हैं।
अगर उनके बैकग्राउंड की बात करें तो सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में संघचालक से लेकर क्षेत्रीय संघचालक तक का एक लंबा सफर तय किया है। संघ उनके काम करने के तरीके से काफी प्रभावित रहा है और उनके समर्पण को देखते हुए ही उन्हें मंदिर में यह अहम जिम्मेदारी दी गई थी। जानकारों की मानें तो उनका दामन पूरी तरह बेदाग रहा है और संगठन का शीर्ष नेतृत्व उनके काम की काफी तारीफ करता है। ऐसे में बदली हुई परिस्थितियों के बीच डॉ. अनिल मिश्रा की जगह कृष्ण मोहन को यह प्रमुख जिम्मेदारी मिलना लगभग तय माना जा रहा है।


