Ayodhya News: राम मंदिर चढ़ावा जांच का दायरा बढ़ा, 8 आरोपियों के 54 रिश्तेदार भी जांच के घेरे में

Ayodhya News: राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच अब संपत्तियों तक पहुंच गई है। आठ आरोपियों के 54 रिश्तेदारों और करीबियों के पिछले दो वर्षों के संपत्ति रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं।

Newstrack Network
Published on: 12 Aug 2026 10:13 PM IST
Ram Mandir Chadhawa Case
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Ram Mandir Chadhawa Case (Image Credit-Social Media)

लखनऊ/अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और गबन के मामले की जांच अब नकदी, सीसीटीवी फुटेज और बैंक खातों से आगे बढ़कर अचल संपत्तियों तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियों ने आठ नामजद आरोपियों के साथ उनके 54 रिश्तेदारों और करीबियों से जुड़े संपत्ति रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की है। इस तरह जांच का दायरा कम से कम 62 लोगों से जुड़े रिकॉर्ड तक पहुंच गया है।

जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित तौर पर चढ़ावे से निकाली गई रकम का इस्तेमाल जमीन, मकान, फ्लैट या अन्य अचल संपत्तियां खरीदने में तो नहीं किया गया। इसके लिए पिछले दो वर्षों के दौरान संबंधित लोगों के नाम दर्ज या नामांतरित हुई संपत्तियों का विवरण जुटाया जा रहा है।

लखनऊ प्रशासन से मांगा गया संपत्ति रिकॉर्ड

जानकारी के मुताबिक अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की ओर से लखनऊ के जिलाधिकारी को पत्र भेजकर संबंधित लोगों के नाम पिछले दो वर्षों में दर्ज या नामांतरित कृषि और गैर-कृषि भूमि सहित अन्य अचल संपत्तियों का विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया है। पत्र के साथ क्षेत्राधिकारी अयोध्या की रिपोर्ट भी संलग्न किए जाने की जानकारी है।

जांच एजेंसियां बैंक खातों और नकदी लेनदेन की पड़ताल के साथ यह भी देख रही हैं कि संदिग्ध अवधि के दौरान आरोपियों या उनसे जुड़े लोगों की संपत्ति में कोई असामान्य बदलाव हुआ या नहीं।

54 रिश्तेदार और करीबी भी जांच के दायरे में

जांच में आठ प्रमुख नामजद आरोपियों के अलावा उनके 54 रिश्तेदारों और करीबियों को भी शामिल किया गया है। हालांकि किसी व्यक्ति का आरोपी से रिश्तेदार या करीबी होना अपने आप में किसी अपराध में संलिप्तता का प्रमाण नहीं है।

जांच एजेंसियां संबंधित संपत्तियों के खरीद मूल्य, भुगतान के स्रोत, बैंक लेनदेन, ऋण, पुरानी बचत, पारिवारिक हस्तांतरण और आय के अन्य वैध स्रोतों की जांच कर सकती हैं। यदि किसी संपत्ति की खरीद और कथित तौर पर गबन की रकम के बीच वित्तीय संबंध सामने आता है, तो वह जांच के लिए महत्वपूर्ण कड़ी हो सकती है।

तहसील से लेकर निबंधन विभाग तक रिकॉर्ड की पड़ताल

संपत्ति जांच के तहत केवल राजस्व रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि अलग-अलग विभागों से जानकारी जुटाए जाने की संभावना है। इसमें तहसीलों से भूमि रिकॉर्ड, निबंधन विभाग से खरीद-बिक्री के दस्तावेज, विकास प्राधिकरणों से फ्लैट और भूखंडों का विवरण तथा नगर निकायों से भवन और अन्य संपत्तियों से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है।

जांच में नामांतरण के रिकॉर्ड पर भी ध्यान दिया जा रहा है। संपत्ति का नामांतरण खरीद के अलावा विरासत, उपहार या पारिवारिक हस्तांतरण जैसे कारणों से भी हो सकता है। इसलिए किसी संपत्ति का नाम किसी व्यक्ति के नाम दर्ज होना अकेले अवैध धन का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

पिछले दो वर्षों के रिकॉर्ड पर फोकस

जांच एजेंसियों ने पिछले दो वर्षों के संपत्ति रिकॉर्ड पर विशेष ध्यान दिया है। इसका उद्देश्य कथित अनियमितताओं की अवधि और उस दौरान हुई संपत्ति खरीद या हस्तांतरण की गतिविधियों का मिलान करना है।

यदि किसी व्यक्ति की आय और वित्तीय क्षमता की तुलना में उसी अवधि में बड़ी संपत्ति खरीदी गई है, तो जांचकर्ता उसके भुगतान के स्रोत की पड़ताल कर सकते हैं। इसके लिए रजिस्ट्री दस्तावेज, बैंक खाते, चेक या आरटीजीएस भुगतान, ऋण और आय से जुड़े रिकॉर्ड अहम हो सकते हैं।

संपत्ति मिलना अपराध का प्रमाण नहीं

इस मामले में कानूनी तौर पर यह अंतर महत्वपूर्ण है कि किसी आरोपी या उसके रिश्तेदार के नाम संपत्ति मिल जाना अपने आप अपराध सिद्ध नहीं करता। जांच एजेंसियों को संपत्ति की खरीद और कथित अवैध रकम के बीच सीधा वित्तीय संबंध स्थापित करना होगा।

इसी तरह किसी रिश्तेदार के नाम संपत्ति होने की स्थिति में उसकी स्वतंत्र आय, बैंक ऋण, विरासत या अन्य वैध स्रोतों की भी जांच करनी होगी। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा।

चढ़ावा गिनती व्यवस्था में SBI की भूमिका बढ़ी

चढ़ावा प्रकरण के बाद मंदिर में नकदी गिनने और जमा करने की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहले की व्यवस्था में शामिल कर्मचारियों को हटाने के बाद अब भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कर्मचारियों की निगरानी में चढ़ावे की नकदी गिनने की प्रक्रिया संचालित की जा रही है। बैंक ने इस व्यवस्था में 11 अतिरिक्त नियमित कर्मचारियों को लगाए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

नई व्यवस्था का उद्देश्य नकदी की गिनती से लेकर बैंक में जमा होने तक प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और निगरानी योग्य बनाना है।

नकदी प्रबंधन में ऑडिट ट्रेल पर जोर

चढ़ावे की बड़ी रकम को देखते हुए नकदी प्रबंधन में पारदर्शिता के लिए प्रत्येक चरण का रिकॉर्ड रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दानपात्र खोलने, नकदी निकालने, गिनती, पैकिंग, सीलिंग और बैंक में जमा करने तक की प्रक्रिया का रिकॉर्ड तैयार होने से किसी भी स्तर पर रकम में अंतर की स्थिति में उसकी पहचान करना आसान हो सकता है।

राम मंदिर के CEO पद के लिए इंटरव्यू जारी

इसी बीच श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के पूर्णकालिक CEO के चयन की प्रक्रिया भी चल रही है। जानकारी के मुताबिक पांच हजार से अधिक आवेदनों के बाद 18 उम्मीदवारों को अंतिम चरण के लिए चुना गया है। इनमें पूर्व IAS, IPS अधिकारियों और पूर्व सैन्य अधिकारियों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं।

उम्मीदवारों से मंदिर प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, बड़े आयोजनों में भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, श्रद्धालु सुविधाओं और भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं। अयोध्या में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए भीड़ प्रबंधन और संकट की स्थिति में प्रशासनिक क्षमता को भी चयन प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

वित्तीय पारदर्शिता होगी बड़ी चुनौती

चढ़ावा विवाद के बीच नए CEO के सामने वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता बड़ी जिम्मेदारी होगी। मंदिर ट्रस्ट के पास नकद दान के अलावा डिजिटल दान, बैंक जमा, आभूषण और अन्य परिसंपत्तियां भी हैं। ऐसे में इनके लेखांकन, सुरक्षा और ऑडिट के लिए मजबूत व्यवस्था की जरूरत होगी।

ट्रस्ट की आगामी बैठक में नए CEO के साथ पूर्णकालिक महासचिव की नियुक्ति पर भी निर्णय होने की संभावना है। पिछली बैठक में इन नियुक्तियों को अगली बैठक तक टाल दिया गया था।

जांच के साथ व्यवस्था में भी बदलाव

राम मंदिर चढ़ावा मामले में एक ओर जांच एजेंसियां पुराने लेनदेन, बैंक खातों और अब संपत्ति रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर मंदिर प्रशासन नकदी प्रबंधन और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बदलाव कर रहा है।

आठ आरोपियों के 54 रिश्तेदारों और करीबियों की संपत्ति जांच इस मामले की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन गई है। अब जांच का फोकस केवल कथित तौर पर रकम निकाले जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पता लगाने पर भी है कि यदि कोई अवैध धन निकाला गया था तो उसका इस्तेमाल कहां और किस तरीके से हुआ।

हालांकि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष सामने आने तक किसी भी आरोपी या उसके रिश्तेदार को दोषी मानना उचित नहीं होगा। मामले में अंतिम स्थिति जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और अदालत के निर्णय से ही स्पष्ट होगी।

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