राम मंदिर निर्माण पर सामने आया चंपत राय का 9 पन्नों का पत्र, नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर बड़ा खुलासा

Champat Rai Letter: राम मंदिर निर्माण को लेकर चंपत राय ने 9 पन्नों का पत्र जारी किया है। इसमें नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका, निर्माण समिति के फैसलों, मंदिर परिसर और दर्शन व्यवस्था का जिक्र है।

Alakha Singh
Published on: 20 Aug 2026 8:28 PM IST (Updated on: 20 Aug 2026 11:01 PM IST)
राम मंदिर निर्माण पर सामने आया चंपत राय का 9 पन्नों का पत्र, नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका पर बड़ा खुलासा
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Ram Mandir Champat Rai Letter: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने राम मंदिर निर्माण और ट्रस्ट के कामकाज को लेकर 9 पन्नों का एक पत्र जारी किया है। पत्र में उन्होंने मंदिर निर्माण समिति के पूर्व अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका और निर्माण प्रक्रिया से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं का जिक्र किया है।

चंपत राय के पत्र के मुताबिक, राम मंदिर निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका बेहद अहम रही। उन्होंने दावा किया कि निर्माण से संबंधित निर्णय मंदिर निर्माण समिति की बैठकों में लिए जाते थे और नृपेंद्र मिश्रा स्वयं को इन फैसलों का प्रमुख मानते थे।

नृपेंद्र मिश्रा को मिली थी बड़ी जिम्मेदारी

पत्र में चंपत राय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद भारत सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया। इसमें वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा को पदेन न्यासी नियुक्त किया गया।

चंपत राय के अनुसार, भारत सरकार के सुझाव पर नृपेंद्र मिश्रा को मंदिर निर्माण समिति और मंदिर से जुड़े विभिन्न कार्यों के प्रबंधन की समिति का अध्यक्ष बनाया गया। पत्र में कहा गया कि उन्होंने पूरी निर्माण प्रक्रिया में खुद को मुख्य मार्गदर्शक और उत्तरदायी प्रमुख के तौर पर स्थापित किया।



लार्सन एंड टुब्रो और टाटा को लेकर भी जिक्र

चंपत राय ने पत्र में पूर्व वीएचपी नेता अशोक सिंहल के सुझावों और प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सिंहल के सुझाव नृपेंद्र मिश्रा को बताए गए थे और उन्हीं सुझावों के आधार पर मंदिर निर्माण के लिए लार्सन एंड टुब्रो (L&T) का चयन किया गया।

इसके साथ ही परियोजना के लिए एक समकक्ष स्तर की प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी (PMC) की आवश्यकता को देखते हुए टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (TCE) को चुना गया।



'निर्माण समिति में ही होते थे सभी अहम फैसले'

चंपत राय ने अपने पत्र में नृपेंद्र मिश्रा की कार्यशैली का विस्तार से जिक्र किया। उनके मुताबिक, नृपेंद्र मिश्रा ने अपनी सहायता के लिए मंदिर निर्माण समिति में अपनी पसंद के कुछ लोगों को शामिल किया था।

पत्र में कहा गया कि इनमें से एक व्यक्ति को पिछले छह वर्षों में केवल एक-दो बार अयोध्या बुलाया गया, जबकि एक अन्य व्यक्ति से सुरक्षा संबंधी सुझाव लिए गए। वहीं, पूर्व NBCC चेयरमैन अनूप मित्तल मंदिर निर्माण समिति की बैठकों में नियमित रूप से नृपेंद्र मिश्रा के साथ शामिल होते थे।

चंपत राय के मुताबिक, मंदिर निर्माण समिति की बैठक सामान्य तौर पर हर महीने होती थी और कुछ समय तक 15 दिन में एक बार भी बैठक हुई। उन्होंने दावा किया कि मंदिर निर्माण से जुड़े प्रत्येक महत्वपूर्ण निर्णय इसी समिति में लिया जाता था।

पत्र में यह भी कहा गया कि समिति में निर्णय लिए बिना कोई कार्य नहीं किया गया। यदि कोई निर्णय समिति की मंजूरी के बिना लिया गया या कोई काम कर भी दिया गया, तो उसे मान्यता नहीं दी गई या बाद में हटा दिया गया।



कोरोना महामारी के बीच शुरू हुआ था मंदिर निर्माण

चंपत राय ने पत्र में मंदिर निर्माण की शुरुआत का भी उल्लेख किया है। उनके मुताबिक, जून 2020 में कोरोना महामारी के बेहद कठिन दौर के बीच मंदिर निर्माण का काम शुरू हुआ।

पत्र में नृपेंद्र मिश्रा के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा गया है कि उनके अथक प्रयासों के परिणामस्वरूप पत्थरों से बने विशाल मंदिर का निर्माण जून 2026 तक पूरा हुआ और इसे समाज को समर्पित किया गया।

तकनीकी चुनौतियों को विशेषज्ञों की मदद से सुलझाया गया

चंपत राय ने बताया कि निर्माण के दौरान जब भी कोई तकनीकी चुनौती या बाधा सामने आई, नृपेंद्र मिश्रा ने देश के योग्य विशेषज्ञों को अयोध्या बुलाया।

विशेषज्ञों की सलाह से तकनीकी समस्याओं का समाधान किया गया। पत्र के अनुसार, अधिकांश विशेषज्ञों ने बिना पारिश्रमिक लिए सेवाभाव से अपने सुझाव दिए।

मुख्य मंदिर के अलावा भी कई निर्माण

पत्र में अयोध्या के राम मंदिर परिसर में हुए निर्माण कार्यों का भी विवरण दिया गया है। चंपत राय के अनुसार, मुख्य मंदिर के अलावा परिसर में कई अन्य महत्वपूर्ण निर्माण किए गए हैं।

इनमें चारों ओर परकोटा और उससे जुड़े छह मंदिर, सप्तऋषि मंदिर, कुबेर टीला, जटायु प्रतिमा, शेषावतार मंदिर, हुतात्मा स्मारक, अतिथि गृह और ऑडिटोरियम शामिल हैं। इसके अलावा परिसर में करीब 3.25 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार का भी निर्माण किया गया है।

रोजाना 75 हजार से ज्यादा श्रद्धालु कर रहे दर्शन

चंपत राय के पत्र में रामलला के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या का भी उल्लेख है।

पत्र के मुताबिक, 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के बाद से रोजाना 75,000 से अधिक श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर रहे हैं। कुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर तीन लाख से अधिक प्रतिदिन तक पहुंच गई थी।

पत्र में दावा किया गया है कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद दर्शन व्यवस्था सुचारू रही और कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई।

श्रद्धालुओं को कई सेवाएं मुफ्त

चंपत राय ने ट्रस्ट की ओर से उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का भी जिक्र किया है। उनके मुताबिक, श्रद्धालुओं के लिए लॉकर, पेयजल, व्हीलचेयर और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं।

प्राथमिक चिकित्सा के तहत एलोपैथिक और होम्योपैथिक सेवाओं के साथ फिजियोथेरेपी की सुविधा भी उपलब्ध होने की बात पत्र में कही गई है।

इसके अलावा आरती पास और प्रसाद भी मुफ्त दिए जाने का दावा किया गया है। चंपत राय ने कहा कि ट्रस्ट ने किसी भी सेवा के लिए कभी कोई शुल्क नहीं लिया।

ट्रस्ट के लेन-देन को लेकर क्या कहा?

पत्र में ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है। चंपत राय के अनुसार, ट्रस्ट के सभी लेन-देन कैशलेस और ऑनलाइन माध्यम से होते हैं। इनमें RTGS के जरिए भुगतान किए जाने की बात कही गई है।

उन्होंने कहा कि बैंक खातों के लिए ट्रस्ट ने कोई चेकबुक नहीं ली है। पत्र में सरकारी करों के 100 प्रतिशत अनुपालन और दिल्ली की प्रतिष्ठित फर्मों से ऑडिट कराए जाने का भी दावा किया गया है।

सुबह 6:30 से रात 9:45 तक रामलला के दर्शन

पत्र के मुताबिक, श्रद्धालु सुबह 6:30 बजे से रात 9:45 बजे तक रामलला के दर्शन कर सकते हैं।

दोपहर में 12:30 से 1 बजे तक ठाकुर जी के विश्राम के लिए मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। हालांकि, चंपत राय के मुताबिक, यदि उस समय श्रद्धालुओं की संख्या बहुत अधिक होती है तो कपाट बंद नहीं किए जाते और दर्शन व्यवस्था जारी रहती है।

इन लोगों को मिलता है मुफ्त सुगम दर्शन पास

चंपत राय ने मुफ्त सुगम दर्शन पास की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी दी है। पत्र के मुताबिक, न्यास के काउंटर पर संबंधित दस्तावेज दिखाकर 60 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिक, दिव्यांग, शारीरिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति और गर्भवती महिलाएं सुगम दर्शन पास ले सकते हैं।

इसके अलावा 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मां भी अपने साथ एक व्यक्ति के साथ मुफ्त सुगम दर्शन पास प्राप्त कर सकती हैं। चंपत राय ने दोहराया कि न्यास की ओर से दर्शन पास, आरती पास, प्रसाद समेत बताई गई सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

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Alakha Singh is a journalist with having more than one decade of experience in digital media. Alakha Singh has covered Loksabha Elections 2014 and 2019 closely with the several state assembly elections. He has expertise in SEO oriented content writing on various topics and issues. At HT Digital Alakha Singh has been recognised as one of the top performer of the team for many years continuously. Earlier he worked with HT Digital for more than 8 years and 2.5 years with Amar Ujala web. In initial days of his career Alakha Singh also worked as a reporter (stringer) with NBT Gurgaon. He pursued P.G. Diploma from South Campus, University of Delhi in 2013 and MAMC from Kurukshetra University in 2014. He Belongs to District Banda of Uttar Pradesh.

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