Ram Mandir Controversy: रामलला के दरबार में धनकुबेर बने कर्मचारी! आलीशान कोठी-लग्जरी गाड़ियों का साम्राज्य

Ram Mandir Controversy: राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच ट्रस्ट से जुड़े कुछ कर्मचारियों की बढ़ती संपत्ति और बदली जीवनशैली पर सवाल उठ रहे हैं। आलीशान मकान, लग्जरी गाड़ियां, होटल और हॉस्टल कारोबार को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

Aditya Kumar Verma
Published on: 15 Jun 2026 12:59 PM IST (Updated on: 15 Jun 2026 1:02 PM IST)
Ram Mandir Controversy
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Image Source- Ai

Ram Mandir Controversy: अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर (Ram Mandir) के चढ़ावे में कथित चोरी और गड़बड़ी के आरोपों को लेकर सियासत लगातार गरमाई हुई है। आरोप-प्रत्यारोप के इस दौर में सबसे ज्यादा सवाल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) से जुड़े कुछ कर्मचारियों और लोगों को लेकर उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय यह है कि ट्रस्ट से जुड़ने के बाद कई कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति और जीवनशैली में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

लोगों का कहना है कि जिन लोगों की आय सीमित थी, उनके पास अब आलीशान मकान, कई वाहन और अन्य संपत्तियां दिखाई दे रही हैं। यही वजह है कि इनकी आय और खर्च को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

महंत कमलनयन दास ने भी उठाए थे सवाल

गौरतलब हो कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास (Nritya Gopal Das) के शिष्य और मणिराम दास छावनी (Maniram Das Chhawani) के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास (Kamalnayan Das) ने भी पिछले दिनों कुछ कर्मचारियों की बदली हुई जीवनशैली पर सवाल खड़े किए थे।

उन्होंने कहा था कि कुछ वर्ष पहले जो लोग साइकिल से चलते थे, आज उनके पास चार पहिया वाहन और आलीशान मकान हैं। उनके इस बयान के बाद कर्मचारियों की आय और व्यय को लेकर चर्चा और तेज हो गई।

मंदिर कर्मचारी बनने के बाद बदले माली हालत

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ वर्ष पहले कारसेवकपुरम (Karsevakpuram) में काम करने वाले कुछ लोग ट्रस्ट के गठन के बाद मंदिर कर्मचारी के रूप में पहचाने जाने लगे। इसके बाद उनकी आर्थिक स्थिति में तेजी से बदलाव देखने को मिला।

बताया जाता है कि कुछ कर्मचारियों का प्रभाव इतना बढ़ गया कि उनकी हनक परिसर में तैनात पुलिस अधिकारियों से भी ऊपर समझी जाने लगी। सूत्रों के अनुसार कुछ कर्मचारियों के पास चौबीसों घंटे पुलिस का वायरलेस सेट तक रहता है।

हॉस्टल, वाहन और जमीनों में निवेश की चर्चा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक कर्मचारी ने करीब एक वर्ष पहले लगभग 12 कमरों वाले हॉस्टल (Hostel) का शुभारंभ किया। उसके पास तीन चार पहिया वाहन, एक महंगा दो पहिया वाहन और कई स्थानों पर जमीन में निवेश होने की चर्चा है। इसी तरह कुछ अन्य कर्मचारियों के बारे में भी कहा जा रहा है कि उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार किया है और कई संपत्तियां खरीदी हैं।

आलीशान शादियों और नए कारोबार की भी चर्चा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक कर्मचारी ने कुछ महीने पहले अपने बेटे का विवाह बेहद भव्य तरीके से किया था। इस आयोजन में कई प्रभावशाली लोगों की मौजूदगी बताई जाती है और विवाह का खर्च तथा तामझाम लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा।

बताया जा रहा है कि संबंधित कर्मचारी ने अपने कारोबार को बढ़ाते हुए डंपर भी खरीदा है। वहीं कुछ कर्मचारी चार पहिया वाहन खरीदकर उन्हें परिसर में किराये पर भी चला रहे हैं।

ट्रस्ट कर्मचारी और होटल कारोबार का मॉडल

वहीं नगर के लोगों का कहना है कि कुछ परिवारों ने अपने बेटों को ट्रस्ट का कर्मचारी बनाकर होटल (Hotel) व्यवसाय से भी जोड़ रखा है। इससे उन्हें दोहरा लाभ मिल रहा है।

सूत्रों के मुताबिक श्रद्धालुओं को पास बनवाने, दर्शन कराने, ठहराने, भोजन और स्थानीय भ्रमण जैसी सुविधाओं का पैकेज उपलब्ध कराया जाता है। दावा किया जाता है कि ट्रेवल एजेंट (Travel Agent) भी ऐसे लोगों के संपर्क में रहते हैं और दर्शन व्यवस्था के बदले अच्छी आमदनी होती है।

लाखों के जेवर खरीदने की भी चर्चा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक प्रभावशाली कर्मचारी के भतीजे से कुछ दिन पहले पुलिस ने पूछताछ भी की थी। चर्चा है कि उसने हाल ही में लाखों रुपये के आभूषण खरीदे हैं। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि कई लोगों ने अपने खास परिचितों को ट्रस्ट में कर्मचारी के रूप में नियुक्त करा रखा है।

परिसर में अफसरों जैसी हनक होने के आरोप

वहीं राम जन्मभूमि परिसर (Ram Janmabhoomi Complex) से जुड़े सूत्रों का दावा है कि कुछ कर्मचारियों के सामने सुरक्षा कर्मी भी बेहद नरम रुख अपनाते हैं। कहा जाता है कि परिसर के प्रतिबंधित क्षेत्रों में भी कुछ कर्मचारियों को आने-जाने की पूरी छूट रहती है।

आरोप यह भी हैं कि वे समय-समय पर अपने परिचित लोगों को ऐसे क्षेत्रों तक ले जाते हैं, जहां आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित है। इसके अलावा उन्हें दर्शन और पूजा कार्यक्रमों में भी प्रमुख रूप से शामिल कराया जाता है।

मोबाइल प्रतिबंध के बावजूद रील और फोटो का दावा

आपको बताते चलें कि राम जन्मभूमि परिसर में मोबाइल फोन (Mobile Phone) ले जाना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद आरोप हैं कि कुछ कर्मचारी अपने परिचितों को मोबाइल के साथ अंदर ले जाते हैं और वहां फोटो तथा वीडियो रील (Reel) भी बनवाई जाती हैं।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि सोशल मीडिया (Social Media) पर ऐसी कई रीलें मौजूद हैं, जबकि सामान्य श्रद्धालुओं के लिए परिसर के भीतर मोबाइल ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

चढ़ावा विवाद के बीच बढ़ी निगाहें

वहीं राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच अब ट्रस्ट से जुड़े कुछ कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति, संपत्ति और रहन-सहन को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों ने इस पूरे मामले को और अधिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल इन चर्चाओं और आरोपों के बीच लोगों की नजरें जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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