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Ram Mandir Donation Scam: कैसे 2 कर्मचारियों ने कर दिया राम मंदिर में करोड़ों का खेल? जानिए कैसे खुली पोल
Ayodhya Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में दानपात्रों से चढ़ावे की चोरी का बड़ा मामला सामने आया है। सिर्फ 18-20 हजार कमाने वाले कर्मचारियों की करोड़ों की संपत्ति से खुला राज, जानिए कैसे सामने आया पूरा मामला और SIT जांच की पूरी कहानी।
Ayodhya Ram Mandir Donation Scam: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भव्य राम मंदिर में हर दिन देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था का सैलाब उमड़ता है। रामलला के दर्शन करने वाले ये भक्त मंदिर के दानपात्रों में दिल खोलकर सोना, चांदी और करोड़ों रुपये का नकद चढ़ावा अर्पित करते हैं। लेकिन इसी पावन परिसर से एक ऐसा शर्मनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। भगवान के चरणों में आने वाले इस पवित्र दान की रखवाली और गिनती करने के लिए जिन कर्मचारियों को रखा गया था, उन्हीं पर करोड़ों रुपये की चोरी करने का संगीन आरोप लगा है। इस महाघोटाले का राजफाश तब हुआ जब जांच एजेंसियों की नजर इन कर्मचारियों की अचानक बदली आलीशान जिंदगी पर पड़ी।
18 हजार कमाने वालों ने खरीदी करोड़ों की जमीनें
राम मंदिर ट्रस्ट की तरफ से दानपात्रों से नकदी निकालने और उनकी गिनती करने के बेहद जिम्मेदारी वाले काम के लिए कुछ विशेष कर्मचारी तैनात किए गए थे। इन कर्मचारियों का मासिक वेतन मात्र 18 से 20 हजार रुपये था। लेकिन जांच के दौरान तब सबके होश उड़ गए जब यह पता चला कि इतनी कम तनख्वाह पाने वाले इन मामूली कर्मियों ने देखते ही देखते करोड़ों रुपये की कीमती जमीनें और बड़े-बड़े भूखंड खरीद डाले हैं। एक आरोपी कर्मचारी ने जहां सीधे डेढ़ करोड़ रुपये की भारी-भरकम जमीन अपने नाम करा ली, वहीं दूसरे ने 40 लाख रुपये का आलीशान प्लॉट खरीद लिया। आमदनी और संपत्ति के बीच का यह जमीन-आसमान का अंतर ही इस पूरे घपले के उजागर होने की सबसे पहली वजह बना।
गोबर के ढेर और आलमारी से बरामद हुए लाखों रुपये
इस पूरे डाके की परतें तब खुलीं जब पुलिस और खुफिया विभाग की संयुक्त टीम ने रुदौली के शुजागंज इलाके में रहने वाले मुख्य आरोपी कर्मचारी लवकुश मिश्रा के घर पर अचानक छापेमारी की। सादे कपड़ों में पहुंची छह सदस्यीय जांच टीम को तलाशी के दौरान घर की आलमारी के अलावा बाहर लगे गोबर के ढेर से 10 लाख रुपये की मोटी नकदी बरामद हुई। आरोपी के पिता ने हालांकि दावा किया है कि यह रकम उन्होंने अपनी खेती की जमीन गिरवी रखकर जुटाई थी, लेकिन पुलिस को इस थ्योरी पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। इस भंडाफोड़ के बाद से ही इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और एक अन्य संदिग्ध कर्मी को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
अखिलेश यादव के एक ट्वीट से मचा हड़कंप
इस महाघोटाले को सबसे पहले राजनीतिक और सामाजिक पटल पर लाने का काम उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को बेहद आक्रामक ढंग से उठाते हुए लिखा कि इस बड़ी साजिश की जड़ें बहुत पास हैं और दोषियों को पकड़ने में अगर पुलिस असमर्थ है तो वे खुद मदद करने को तैयार हैं। विपक्ष के इस तीखे हमले के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। इस टीम को 15 दिनों के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने का सख्त आदेश दिया गया है।
अधिकारियों और नेताओं में भारी आक्रोश
राम मंदिर के चढ़ावे में हुए इस बड़े भ्रष्टाचार को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता विनय कटियार ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं के संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है, इसलिए मंदिर के पैसे पर डाका डालने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी अयोध्या का आपातकालीन दौरा किया है। वर्तमान में जांच एजेंसियां मंदिर परिसर के भीतर लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों के फुटेज और वित्तीय खातों के रिकॉर्ड्स को खंगालने में जुटी हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह खेल कितने समय से चल रहा था।


