Ram Mandir कांड में SIT के छूटे पसीने! गायब हुए CCTV फुटेज, अब कैसे होगा खुलासा?

Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर चढ़ावा मामले की जांच में SIT के सामने नई चुनौती सामने आई है। CCTV बैकअप गायब होने से पुराने सबूत जुटाना मुश्किल हो गया है। जानिए अयोध्या मामले की पूरी जांच।

Harsh Srivastava
Published on: 20 Jun 2026 1:11 PM IST
Ram Mandir कांड में SIT के छूटे पसीने! गायब हुए CCTV फुटेज, अब कैसे होगा खुलासा?
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Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा छोटाले का मामला इस समय पूरे देश में सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है. इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें खोलने में जुटी स्पेशल टास्क फोर्स (SIT) के सामने अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली चुनौती खड़ी हो गई है. जांच के शुरुआती 6 दिनों में एसआईटी के हाथ कई अहम सुराग तो लगे हैं, लेकिन सबूतों को जुटाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है. जांच में एक बेहद हैरान करने वाला खुलासा हुआ है कि राम मंदिर परिसर की सुरक्षा में तैनात सीसीटीवी कैमरों का डिजिटल बैकअप केवल 45 दिनों तक ही सुरक्षित रहता है. इसका मतलब यह हुआ कि 45 दिन से पुरानी सारी वीडियो फुटेज सिस्टम से अपने आप गायब हो जाती थीं. इस तकनीकी अड़चन के कारण अब यह पता लगाना बेहद मुश्किल हो गया है कि करोड़ों के चढ़ावे की चोरी का यह खेल आखिर कब से और कितने महीनों या सालों से चल रहा था.

CCTV कैमरों से छेड़छाड़ के मिले सबूत

जांच एजेंसी को अपनी पड़ताल के दौरान सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ और हेरफेर किए जाने के पुख्ता संकेत मिले हैं, जिसने इस पूरे मामले को और भी ज्यादा संगीन बना दिया है. अब एसआईटी की टीम डिजिटल एक्सपर्ट्स और फोरेंसिक साइंस लैब की मदद लेने जा रही है ताकि डिलीट हो चुके पुराने वीडियो डेटा को किसी भी तरह दोबारा रिकवर किया जा सके. पुराने रिकॉर्ड्स के गायब होने से अब सारा दारोमदार इस बात पर टिक गया है कि क्या पिछले डेढ़ महीने के भीतर कैमरों की रिकॉर्डिंग के साथ कोई चालाकी की गई है. अगर ऐसा हुआ है, तो उसके तकनीकी सबूत फोरेंसिक जांच में जरूर पकड़े जाएंगे. फिलहाल एसआईटी वहां काम करने वाले संदिग्ध कर्मचारियों, मंदिर के पदाधिकारियों और पहले दबोचे गए आरोपियों के बयानों को आपस में मिलाकर देख रही है, जिनमें भारी अंतर और विरोधाभास देखने को मिल रहा है.

बयानों के भरोसे लंबी खिंचेगी जांच

डिजिटल और पुख्ता साक्ष्यों की भारी कमी के कारण अब यह पूरी जांच मुख्य रूप से गवाहों, कर्मचारियों और ट्रस्ट से जुड़े लोगों के बयानों के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई है. यही वजह है कि एसआईटी की यह तफ्तीश अब काफी लंबी और कई चरणों में पूरी होने की संभावना जताई जा रही है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या में कड़ा रुख

इस पूरे सियासी और धार्मिक बवाल के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद अयोध्या पहुंचे और उन्होंने इस संवेदनशील मामले पर एक बेहद कड़ा और आक्रामक बयान दिया. मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि रामलला के मंदिर निर्माण के लिए देश की जनता ने 500 साल तक लंबा इंतजार किया है. उन्होंने साफ लफ्जों में भरोसा दिलाया कि ट्रस्ट की मांग पर ही इस एसआईटी का गठन किया गया है, जो बहुत जल्द दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी. योगी ने चेतावनी देते हुए कहा कि भगवान के दरबार में चोरी करने वाला पापी कोई भी हो, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने विपक्ष पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग कभी रामभक्तों पर गोलियां चलवाते थे और माफियाओं के मरने पर मातम मनाते थे, वे आज हमें रामभक्ति पर उपदेश न दें.

अनावश्यक बयानबाजी पर लगी रोक

मुख्यमंत्री ने देश और प्रदेश की जनता से बड़ी अपील करते हुए कहा कि अयोध्या धाम को बदनाम करने के मकसद से चलाई जा रही अनर्गल और झूठी खबरों पर ध्यान न दें. अगर किसी भी व्यक्ति के पास इस चोरी से जुड़ा कोई भी लिखित या ठोस सबूत है, तो वह सीधे एसआईटी को सौंप सकता है. उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि लोग सिर्फ 15 दिन का धैर्य रखें, जांच रिपोर्ट आते ही दोषियों को ऐसी सजा मिलेगी जिसे इतिहास याद रखेगा. तब तक के लिए बिना वजह की बयानबाजी पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए.

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