Ram Mandir Donation Scam केस में बड़ा एक्शन! PMO तक पहुंची जांच की आंच, आज Ayodhya पहुंच रही SIT

Ayodhya Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में जांच तेज। तीन सदस्यीय एसआईटी आज अयोध्या पहुंचेगी, जबकि मामला पीएमओ तक पहुंचने की चर्चा है। ट्रस्ट पदाधिकारियों, कर्मचारियों और संदिग्धों से पूछताछ की तैयारी।

Aditya Kumar Verma
Published on: 15 Jun 2026 10:01 AM IST
Ayodhya Ram Mandir Donation Scam Case
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Ayodhya Ram Mandir Donation Scam: अयोध्या में राम मंदिर (Ram Mandir) के चढ़ावे में कथित गबन (Embezzlement) का मामला सामने आने के बाद अब इसकी गूंज केंद्र तक पहुंच गई है। मामले के तूल पकड़ने के बाद केंद्र सरकार भी सक्रिय हो गई है। रविवार को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से एक वरिष्ठ अधिकारी के मंदिर पहुंचने की चर्चा रही। बताया जा रहा है कि अधिकारी अपने स्तर पर जानकारी जुटाकर रिपोर्ट पीएमओ को सौंपेंगे। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। इसी बीच मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) सोमवार को अयोध्या पहुंचेगी और जांच शुरू करेगी।

शुरू होगी एसआईटी की जांच

राम मंदिर की दान राशि में हेरफेर का मामला पिछले सप्ताह सामने आया था। इसके बाद से ट्रस्ट (Trust) के पदाधिकारी अपने स्तर पर गोपनीय जांच में जुटे हुए हैं। ट्रस्ट कार्यालय के आसपास बाहरी लोगों की आवाजाही पर भी रोक लगा दी गई है।

यहां शनिवार को श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध और मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इस टीम में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरण एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन को शामिल किया गया है। चर्चा थी कि एसआईटी रविवार से जांच शुरू करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अब टीम सोमवार को अयोध्या पहुंचकर जांच प्रक्रिया शुरू करेगी।

ट्रस्ट पदाधिकारियों और कर्मचारियों से होगी पूछताछ

सूत्रों के अनुसार एसआईटी ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जानकारी लेने के साथ मंदिर के कर्मचारियों और चिह्नित संदिग्धों से भी पूछताछ करेगी। इसके अलावा ट्रस्ट द्वारा अब तक की गई आंतरिक जांच का पूरा ब्योरा भी जुटाया जाएगा।

जांच केवल धन के लेन-देन और तकनीकी पहलुओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि कहीं किसी स्तर पर संरक्षण, लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं हुई। यदि किसी ट्रस्टी या पदाधिकारी की संलिप्तता अथवा प्रशासनिक चूक के प्रमाण मिलते हैं तो उनके अधिकार सीमित किए जा सकते हैं।

साक्ष्य मिलने के बाद भी अब तक दर्ज नहीं हुई FIR

मामले में एक सप्ताह पहले गबन के साक्ष्य मिलने की बात सामने आई थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक किसी भी स्तर पर एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं कराई गई है। यही वजह है कि मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है और जांच को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

अधिकारियों से मिले बिना लौट गए विनय कटियार

आपको बताते चलें कि, राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर शिकायत दर्ज कराने का एलान करने वाले पूर्व सांसद और वरिष्ठ भाजपा नेता विनय कटियार रविवार को अधिकारियों से मिले बिना ही लखनऊ लौट गए।

उन्होंने शनिवार को अयोध्या पहुंचने के दौरान कहा था कि वह रविवार सुबह डीआईजी और एसएसपी से मिलकर कथित घोटाले के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ शिकायत देंगे और दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की मांग करेंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि श्रद्धालुओं के दान में किसी ने गड़बड़ी की है तो उसे जेल भेजा जाना चाहिए। हालांकि रविवार को उनका अधिकारियों से मिलने का कार्यक्रम नहीं हो सका और वह बिना कोई औपचारिक शिकायत दर्ज कराए ही लखनऊ रवाना हो गए।

नृपेंद्र मिश्र ने दानपेटियों और व्यवस्था का किया निरीक्षण

वहीं राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने रविवार को श्रीराम जन्मभूमि परिसर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने दानपेटियों और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

उन्होंने चढ़ावा संग्रह, सुरक्षा व्यवस्था और बैंक में राशि जमा कराने तक की पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली। साथ ही रामलला (Ramlala) के गर्भगृह में रखी दान पेटियों का भी जायजा लिया।

नृपेंद्र मिश्र ने जांच के लिए गठित एसआईटी पर भरोसा जताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 24 घंटे से भी कम समय में जांच समिति का गठन कर दिया है और समिति की संस्तुतियों को लागू किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट निगरानी में जांच की मांग

वहीं समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के सांसद अवधेश प्रसाद ने रविवार को पत्रकार वार्ता कर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ वित्तीय अनियमितता का नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा हुआ है।

अवधेश प्रसाद ने कहा कि उन्हें प्रदेश सरकार की एसआईटी पर भरोसा नहीं है। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के निर्देशन में गठित स्वतंत्र समिति से कराई जाए। साथ ही ट्रस्ट को भंग कर जिम्मेदार पदाधिकारियों को पद से हटाया जाए।

ट्रस्ट कार्यालय में लगाया गया नया हाई सिक्योरिटी लॉकर

वहीं यहां दान से जुड़े प्रकरण के सामने आने के बाद ट्रस्ट ने व्यवस्थाओं में बदलाव भी शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में ट्रस्ट कार्यालय में नया उच्च सुरक्षा वाला लॉकर लगाया गया है।

इस लॉकर का उद्देश्य दानपेटियों से प्राप्त नकदी, बहुमूल्य आभूषणों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं के सुरक्षित रखरखाव की व्यवस्था को और मजबूत बनाना है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की देखरेख में इस नए लॉकर को आधुनिक सुरक्षा मानकों के अनुरूप स्थापित कराया गया है।

जांच पर टिकी सभी की निगाहें

राम मंदिर चढ़ावा गबन प्रकरण अब प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन चुका है। एक ओर एसआईटी जांच शुरू करने जा रही है तो दूसरी ओर मामले को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से सवाल भी उठाए जा रहे हैं। अब सभी की नजरें एसआईटी की जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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