Ram Mandir Donation Scam में ट्रस्ट का बड़ा बयान, SIT जांच से ठीक पहले किया बड़ा खुलासा

Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर चढ़ावा मामले में एसआईटी जांच से पहले ट्रस्ट ने बड़ा बयान दिया है। 18 हजार की नौकरी करने वाले कर्मचारियों के घर और गोबर के ढेर से लाखों का कैश बरामद हुआ है। सीएम योगी के आदेश पर आईएएस-आईपीएस की SIT ने जांच शुरू कर दी है।

Harsh Srivastava
Published on: 15 Jun 2026 10:17 AM IST
Ram Mandir Donation Scam में ट्रस्ट का बड़ा बयान, SIT जांच से ठीक पहले किया बड़ा खुलासा
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Ram Mandir Donation Scam: उत्तर प्रदेश के अयोध्या धाम में प्रभु श्री रामलला के भव्य और अलौकिक मंदिर में आने वाले देश-विदेश के करोड़ों भक्तों की अगाध आस्था इन दिनों एक बहुत बड़े राजनैतिक और सामाजिक विवाद के भंवर में फंस गई है. राम मंदिर के पावन परिसर में आने वाले गुप्त दान और भारी-भरकम चढ़ावे की राशि में करोड़ों की हेराफेरी और गबन के सनसनीखेज आरोपों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. मंदिर के ही कुछ खास कर्मचारियों पर लगे इस कथित वित्तीय घोटाले का मामला अब उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच दल (एसआईटी) की दहलीज तक पहुंच चुका है. आस्था की नगरी में मचे इस भयंकर बवंडर ने राम मंदिर ट्रस्ट से लेकर शासन-प्रशासन की रातों की नींद उड़ा दी है.

SIT की दस्तक से ठीक पहले राम मंदिर ट्रस्ट का बयान

इस पूरे मामले में जैसे ही उत्तर प्रदेश सरकार की स्पेशल जांच टीम ने अयोध्या की सीमा में कदम रखा, ठीक उससे पहले श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से पहली बार एक आधिकारिक और बेहद मजबूत प्रतिक्रिया सामने आई. ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल जी राव ने देश की जनता के सामने स्थिति साफ करते हुए कहा कि वे इस पूरी उच्च स्तरीय जांच के पूरी तरह पक्ष में हैं.

उन्होंने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि ट्रस्ट खुद काफी समय से बैंक के साथ मिलकर इस पूरे चढ़ावे का ऑडिट करवा रहा था. जब ऑडिट के दौरान भारी विसंगतियां और भ्रम की स्थिति दिखाई दी, तो ट्रस्ट के महासचिव ने स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार से एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का लिखित अनुरोध किया था, ताकि राम भक्तों के मन में रत्ती भर भी संशय न रहे.

ऐसे खुला गबन का खौफनाक राज

अयोध्या के राम मंदिर में प्रतिदिन लाखों की संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं, जो नकद राशि के साथ-साथ सोने-चांदी के आभूषणों से दान पेटियों को भर देते हैं. इसी अकूत चढ़ावे की गिनती करने वाले कुछ कर्मचारियों की किस्मत अचानक इतनी तेजी से बदली कि उनकी विलासिता भरी जिंदगी देखकर पूरा इलाका हैरान रह गया. मंदिर परिसर में महज अठारह से बीस हजार रुपये के मामूली मासिक वेतन पर काम करने वाले इन कर्मचारियों ने हाल ही के महीनों में अचानक महंगी लग्जरी गाड़ियां, आलीशान कोठियां और करोड़ों रुपये मूल्य की जमीनी संपत्तियां खरीदना शुरू कर दिया था. जैसे ही यह बात ट्रस्ट के कानों तक पहुंची, जांच की गुप्त रूपरेखा तैयार कर ली गई.

गोबर के ढेर से लेकर अलमारी तक बिखरे मिले नोट

स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमों ने बिना वक्त गंवाए मुख्य आरोपी कर्मचारी लवकुश मिश्रा को अपनी कस्टडी में ले लिया है. सुरक्षा एजेंसियों ने जब लवकुश के पुश्तैनी ठिकाने पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों की आंखें फटी की फटी रह गईं.

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नोटों की गड्डियों को छिपाने के लिए चोरों वाले शातिर दिमाग का इस्तेमाल किया गया था. कुछ लाख रुपये जहां घर की गुप्त अलमारियों से मिले, वहीं नोटों का एक बहुत बड़ा हिस्सा कथित तौर पर घर के पीछे बने गोबर के ढेर के भीतर पॉलीथीन में लपेटकर छिपाया गया था. पुलिस ने मौके से करीब दस लाख रुपये की नकद रकम तुरंत जब्त कर ली है. इसके साथ ही मंदिर की दान पेटी संभालने वाले एक अन्य कर्मचारी को भी उठाकर गुप्त स्थान पर पूछताछ शुरू कर दी गई है.

18 हजार की नौकरी में 1.5 करोड़ की जमीन

इस महाघोटाले के केंद्र में मौजूद आरोपियों की संपत्तियों का जो ब्योरा सामने आ रहा है, वह किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी है. जांच एजेंसियों के हाथ लगे कुछ पुख्ता दस्तावेजों के अनुसार, महज बीस हजार कमाने वाले एक कर्मचारी ने हाल ही में अयोध्या के पास करीब डेढ़ करोड़ रुपये की बेशकीमती कृषि और व्यावसायिक भूमि अपने नाम करवाई है. वहीं, दूसरे आरोपी के नाम पर भी चालीस लाख रुपये के मुख्य हाईवे के पास वाले प्लॉट की रजिस्ट्री मिली है. मीनापुर फगौली गांव के रहने वाले स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जब से इन लड़कों की राम मंदिर के भीतर चढ़ावे की गिनती में ड्यूटी लगी थी, तब से इनके पूरे परिवार के तेवर और रहन-सहन राजा-महाराजाओं जैसे हो गए थे.

पिता ने किया बेटे का बचाव

इस बीच, मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा के लाचार पिता बच्चूलाल ने मीडिया के सामने आकर अपने बेटे का पुरजोर बचाव किया है. भावुक होते हुए पिता ने कहा कि उनका बेटा पूरी तरह निर्दोष है और उसे एक सोची-समझी साजिश के तहत फंसाया जा रहा है. हालांकि, उन्होंने अपने घर से भारी मात्रा में नकद राशि मिलने की बात को स्वीकारा, लेकिन साथ ही यह दलील भी दी कि फैजाबाद में जो आलीशान मकान बन रहा है, उससे उनके बेटे का कोई वित्तीय लेना-देना नहीं है. परिजनों का दावा है कि उन्होंने अपने पूर्वजों की खेती की जमीन को बैंक और स्थानीय साहूकारों के पास गिरवी रखकर इस पैसे का इंतजाम किया था. एसआईटी की टीम अब बैंक खातों के जरिए इस दावे की सच्चाई परख रही है.

IAS और IPS के हाथों में कमान

उत्तर प्रदेश सरकार ने इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए बेहद कड़ा रुख अपनाया है. मुख्यमंत्री के निर्देश पर मात्र 15 घंटे के भीतर गठित की गई 3 सदस्यीय एसआईटी की कमान लखनऊ मंडल के वरिष्ठ आईएएस कमिश्नर विजय विश्वास पंत को सौंपी गई है. उनके साथ तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी किरन एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को इस टीम का मुख्य सदस्य बनाया गया है. सरकार ने इस हाई-प्रोफाइल कमेटी को साफ हिदायत दी है कि वे 7 दिनों के भीतर अपनी प्राथमिक जांच रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर इस पूरे घोटाले की अंतिम विस्तृत रिपोर्ट सीधे शासन को सौंपें. राम नगरी में पल-पल बदलते इस घटनाक्रम से भ्रष्टाचारियों के खेमे में भारी दहशत का माहौल है.

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