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Ayodhya News: राम मंदिर के वित्तीय प्रबंधन पर उठे सवाल, महिपाल सिंह ने SIT को सौंपे 20 बिंदुओं के सबूत
Ayodhya News: अयोध्या राम मंदिर से जुड़े चढ़ावा और वित्तीय प्रबंधन मामले में पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह ने एसआईटी को 20 बिंदुओं वाले दस्तावेज सौंपे हैं।
Ayodhya News (Image Credit-Social Media)
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावा चोरी के उजागर हुए मामले में पूर्व लेखा प्रभारी (अकाउंटेंट) महिपाल सिंह द्वारा विशेष जांच दल (SIT) को दस्तावेज सौंपे जाने के बाद नया मोड़ आ गया है। लखनऊ के मंडलायुक्त और एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत द्वारा 26 जुलाई को मांगे गए लिखित सबूतों के जवाब में, व्हिसलब्लोअर महिपाल सिंह ने ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों और कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोपों के साथ 20 प्रमुख बिंदुओं पर वित्तीय अनियमितताओं की सूची और साक्ष्य एसआईटी को सौंप दिए हैं।
प्रमुख आरोप और वित्तीय अनियमितताओं का ब्योरा
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निर्माण लागत में भारी उछाल: मंदिर निर्माण का शुरुआती अनुमानित खर्च ₹800 करोड़ तय किया गया था, लेकिन योजनाबद्ध स्वरूप के बावजूद यह लागत बढ़कर ₹2,200 करोड़ तक पहुंच गई। महिपाल सिंह का आरोप है कि चहेतों को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बजट में यह बेतहाशा वृद्धि की गई।
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तकनीकी योग्यता और वास्तु दोष: निर्माण कार्यों की देखरेख के लिए सिविल इंजीनियरिंग के अनुभव से रहित इलेक्ट्रिकल इंजीनियर जगदीश आफले को प्रोजेक्ट इंजीनियर बनाया गया। इस वजह से निर्माण कार्य में वास्तु नियमों की अनदेखी हुई। साथ ही, बंशी पहाड़पुर के निःशुल्क मिल रहे पत्थरों को छोड़कर अधोमानक गुणवत्ता के पत्थर खरीदे गए।
Hindustan
चढ़ावा और बहुमूल्य धातुओं में हेरफेर:
The Federal
रामलला के झूले के लिए प्राप्त 150 किलोग्राम चांदी में से केवल 85 किलोग्राम का प्रयोग हुआ, जबकि शेष 65 किलोग्राम गायब है।
Hindustan
- सिंधी समाज की ओर से भेंट की गई 200 चांदी की ईंटें गायब हैं।
- प्राण प्रतिष्ठा के दौरान सोने के मुकुट के गायब होने के मामले में कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई।
फर्जी भुगतान और संस्थागत संपत्तियों का दुरुपयोग:
- बिना काम किए कई व्यक्तियों के नाम पर भुगतान जारी किए गए।
- रामकचेहरी कार्यालय में महज ₹3 लाख लागत के एल्युमिनियम और शीशे के केबिन निर्माण के बदले ₹16 लाख का भारी भुगतान दिखाया गया।
- ट्रस्ट के फंड से कारसेवकपुरम में स्थायी निर्माण, विहिप के आयोजन और नई कॉलोनी का निर्माण कराने के आरोप हैं।
- अनधिकृत खरीद और फर्जी रसीदें: विवादास्पद संपत्तियों को अनधिकृत लोगों से खरीदा गया, जिस पर कब्जा न मिलने से अदालती मुकदमों में भारी धनराशि व्यर्थ हुई। भरतकुटी आवास पर बिना आधिकारिक रसीद दिए लंबी अवधि तक निधि संग्रह किया गया।
Jagran
चढ़ावा चोरी का पैटर्न और प्रशासनिक ढिलाई
महिपाल सिंह के अनुसार, वर्ष 2021 में ही चढ़ावा चोरी के इस नेटवर्क का पता चल गया था। रामशंकर यादव 'टिन्नू' की शह पर बैंककर्मी रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप नोटों की अतिरिक्त गड्डियां परिसर से बाहर निकालकर चोरी करते थे।
Jagran
"जब इस पूरी चोरी का खुलासा तत्कालीन महासचिव चंपत राय के समक्ष किया गया, तो कार्रवाई करने के बजाय शांत रहने को कहा गया। अगले ही दिन डॉ. अनिल मिश्र द्वारा मुझे लेखा प्रभारी के पद से हटाकर सुभाष श्रीवास्तव (वर्तमान में गिरफ्तार) को तैनात कर दिया गया। इसके अलावा, अति-सुरक्षित क्षेत्रों में टिन्नू यादव को बिना रोक-टोक प्रवेश की अनुमति दी गई।"
— महिपाल सिंह (पूर्व लेखा प्रभारी, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र)
Hindustan
विवादास्पद अधिकारियों को वित्तीय अधिकार देने पर सवाल
ETV Bharat
जांच के बीच एक और बड़ा प्रशासनिक विरोधाभास सामने आया है। ट्रस्ट के चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) चंदन राय, जिन पर निर्माण कंपनियों के बिल रोककर रिश्वत मांगने और गलत भुगतान पारित करने के गंभीर आरोप हैं, उन्हें खातों के संचालन के लिए और अधिकृत कर दिया गया है।
The Indian Express
वर्तमान में बैंक में राशि जमा करने की प्रक्रिया अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन, इंजीनियर जगदीश आफले और सीए चंदन राय के संयुक्त हस्ताक्षरों से पूरी की जा रही है, जिस पर निष्पक्ष जांच को लेकर सवाल उठ रहे हैं। एसआईटी अब इन साक्ष्यों और संबंधित सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।


