आज़म खान के केस में अचानक क्या…जस्टिस विक्रम डी चौहान ने खुद को क्यों कर लिया अलग?

Azam Khan PAN Card Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज़म खान और अब्दुल्ला आज़म खान के ड्यूल पैन कार्ड मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। अब इस मामले की सुनवाई नई पीठ करेगी।

Aditya Kumar Verma
Published on: 6 Aug 2026 9:22 PM IST
Azam Khan Dual PAN Card Case | Justice Vikram D Chauhan
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Azam Khan PAN Card Case: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आज़म खान (Mohammad Azam Khan) और उनके बेटे पूर्व विधायक मोहम्मद अब्दुल्ला आज़म खान (Mohammad Abdullah Azam Khan) से जुड़े ड्यूल पैन कार्ड (Dual PAN Card) मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान (Justice Vikram D Chauhan) ने स्वयं को इस केस की सुनवाई से अलग कर लिया है। अब दोनों पुनरीक्षण याचिकाओं (Revision Petitions) की सुनवाई नई पीठ करेगी।

टॉप-10 मामलों में सूचीबद्ध था केस

मोहम्मद आज़म खान (Mohammad Azam Khan) और मोहम्मद अब्दुल्ला आज़म खान (Mohammad Abdullah Azam Khan) की दोनों पुनरीक्षण याचिकाएं गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में टॉप-10 मामलों के रूप में सूचीबद्ध थीं।

पिछली सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान (Justice Vikram D Chauhan) ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal), एनआई जाफरी (N.I. Jafri), एडवोकेट शाश्वत आनंद (Shashwat Anand) और अंकुर आज़ाद (Ankur Azad) की ओर से आज़म खान और अब्दुल्ला आज़म खान का पक्ष सुना था।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अंतरिम जमानत (Interim Bail) की अर्जी पर जल्द सुनवाई की मांग करते हुए दलील दी थी कि दोनों पुनरीक्षणकर्ताओं को इस मामले में सम्मानपूर्वक बरी किया जाना चाहिए। इसके बाद अदालत ने दोनों मामलों को 6 अगस्त को टॉप-10 मामलों में सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था।

जज ने खुद को किया अलग

एडवोकेट शाश्वत आनंद (Shashwat Anand) के मुताबिक गुरुवार सुबह अदालत की कार्यवाही शुरू होने पर आज़म खान और अब्दुल्ला आज़म खान की ओर से मामले का मौखिक उल्लेख किया गया।

इसी दौरान न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान (Justice Vikram D Chauhan) ने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। उन्होंने निर्देश दिया कि दोनों पुनरीक्षण याचिकाओं (Revision Petitions) को नई पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

यतीमखाना मामले में भी जज कर चुके हैं रिक्यूज़

आज़म खान (Mohammad Azam Khan) परिवार से जुड़े मामलों में यह न्यायिक रिक्यूज़ल (Judicial Recusal) का दूसरा मामला है।

इससे पहले 21 नवंबर 2025 को न्यायमूर्ति समीर जैन (Justice Sameer Jain) ने भी यतीमखाना (Yatimkhana) प्रकरण से जुड़े मामलों की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था।

30 जुलाई को भी एक जज ने छोड़ी थी सुनवाई

इससे पहले 30 जुलाई को कोडीन युक्त कफ सिरप (Codeine Cough Syrup) मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति कृष्ण पहल (Justice Krishna Pahal) ने भी खुद को केस से अलग कर लिया था।

बताया गया था कि आरोपियों की ओर से जमानत (Bail) के लिए सिफारिश कराने की कोशिश की गई थी, जिससे न्यायमूर्ति कृष्ण पहल नाराज हो गए थे।

दर्जनों आरोपियों ने जमानत के लिए हाईकोर्ट (High Court) में याचिकाएं दाखिल की थीं और उन सभी पर एक साथ सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख तय की गई थी। सुनवाई के दौरान याचियों के वकीलों के साथ राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी (Anoop Trivedi) और एजीए प्रथम परितोष कुमार मालवीय (Paritosh Kumar Malviya) भी मौजूद थे।

सुनवाई शुरू होते ही अदालत ने कहा था कि बहस के बाद आदेश सुरक्षित रखा जा सकता था, लेकिन वादकारी पक्षों की ओर से पीठासीन न्यायाधीश तक पहुंच बनाने और संपर्क स्थापित करने के प्रयास किए गए। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि यदि ऐसे आचरण को नजरअंदाज किया गया तो इससे न्यायपालिका (Judiciary) की स्वतंत्रता कमजोर होगी और आम जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा भी प्रभावित होगा।

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आदित्य कुमार वर्मा उत्तर प्रदेश के पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 8 वर्षों से अधिक का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारतीय राजनीति, अपराध, स्वास्थ्य और मानवीय सरोकारों से जुड़ी खबरों की व्यापक रिपोर्टिंग की है। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है और वे रिपोर्टर, एंकर तथा सब-एडिटर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं। साथ ही वो उत्तर प्रदेश की राजनीति, शासन-प्रशासन और नौकरशाही व्यवस्था की गहरी समझ रखते हैं। पत्रकारिता के अलावा उन्हें पुस्तकों का अध्ययन, लेखन, कविता-लेखन और पाठ और यात्राएं करना विशेष रूप से पसंद है। विभिन्न संस्कृतियों और समाजों को करीब से जानने-समझने की उनकी रुचि ने उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाया है, जिसका सकारात्मक प्रभाव उनकी लेखन शैली और रिपोर्टिंग में भी देखने को मिलता है।

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