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Azam Khan Politics End: बाप-बेटे जेल में, दांव पर रामपुर! आजम खान के बिना विधानसभा चुनाव में कैसे बचेगी सपा की साख?
Azam Khan Politics End: आगामी यूपी विधानसभा चुनाव से पहले रामपुर में समाजवादी पार्टी की साख दांव पर है। आजम खान और उनके बेटे के जेल में होने से सपा के सामने अपना गढ़ बचाने की सबसे बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
Azam Khan Latest News UP Politics: अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां अभी से तेज हो गई हैं। सभी प्रमुख पार्टियों ने अपनी रणनीतियों को धार देना शुरू कर दिया है। प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी की भी तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। लेकिन सपा के लिए इस बार सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है कभी उसका अभेद्य गढ़ रहा रामपुर। पार्टी के लिए वहां सबसे बड़ी चुनौती अपने परंपरागत वोट और राजनीतिक वर्चस्व को बचाए रखने की है। इसका सीधा सा कारण है पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान और उनके पूरे परिवार का जेल में होना। फिलहाल जैसी परिस्थितियां हैं, उनमें उनका जेल से बाहर आना बेहद मुश्किल लग रहा है। इसकी वजह से सपा के लिए वहां बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
बाप-बेटे की सजा ने पार्टी की बढ़ाईं धड़कनें
पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान और उनके पूर्व विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम दोनों दो पैन कार्ड मामले में जेल की सलाखों के पीछे हैं। बीते दिनों आजम की सजा बढ़कर 10 साल हो गई है, जिसके बाद उनके भविष्य को लेकर चर्चाओं ने फिर जोर पकड़ लिया है। मौजूदा अड़चनों को देखते हुए माना जा रहा है कि दोनों बाप-बेटे के विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावनाएं बिल्कुल क्षीण हो गई हैं। अगर दोनों चुनावी मैदान में उतरते, तो रामपुर शहर और स्वार जैसी सीटों पर सपा मजबूत होती, क्योंकि आजम खान रामपुर सीट से दस बार और अब्दुल्ला आजम स्वार सीट से दो बार चुनकर विधानसभा पहुंच चुके हैं।
रामपुर में भाजपा का क्लीन स्वीप प्लान
बंगाल चुनाव में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय जनता पार्टी आत्मविश्वास से ओत-प्रोत दिख रही है। अब पार्टी का मुख्य लक्ष्य देश के सबसे बड़े सूबे में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का है। इसी कड़ी में रामपुर जिले की सभी विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करना भी उसका प्रमुख लक्ष्य है। फिलहाल जिले की पांच में से तीन विधानसभा सीटों रामपुर शहर, बिलासपुर और मिलक पर भाजपा काबिज है, जबकि स्वार सीट पर सहयोगी अपना दल का कब्जा है। रामपुर शहर सीट, जो कभी आजम खान का अभेद्य किला मानी जाती थी, उस पर 2022 में हुए उपचुनाव में भाजपा के आकाश सक्सेना ने जीत हासिल कर ली थी।
एक सीट पर सिमटी सपा के लिए बड़ी चुनौती
सपा के पास इस समय केवल चमरौआ सीट ही बची है। इस सीट पर आजम खान के करीबी नसीर खान विधायक हैं। हालांकि, बढ़ती उम्र के साथ अगले साल होने वाले चुनाव को लेकर उनकी सक्रियता पर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। इसके अलावा बड़ा सवाल यह भी है कि जेल में बंद आजम खान को पार्टी टिकट बंटवारे के दौरान कितनी अहमियत देती है, क्योंकि लोकसभा चुनाव में पार्टी ने आजम खान की पसंद को दरकिनार करते हुए मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को टिकट थमा दिया था। इसके विरोध में स्थानीय स्तर पर आजम खान के समर्थकों ने चुनाव प्रचार से दूरी बना ली थी, जिससे पार्टी के भीतर गहरे मतभेद उजागर हो गए थे।
PDA के भरोसे सपा
तमाम मतभेद, गुटबाजी और चुनौतियों के बावजूद स्थानीय सपा नेताओं को लगता है कि उम्मीदवारों का अंतिम फैसला आजम खान की सहमति के बाद ही होगा। इसके साथ ही पार्टी अपने सबसे सफल फॉर्मूले पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वाली रणनीति पर विशेष फोकस कर रही है।
इसे लेकर सपा जिलाध्यक्ष अजय सागर का कहना है, पार्टी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए पूरी तरह तैयार है। पार्टी ने सभी पांचों विधानसभा सीटों पर अपने चुनावी कार्यालय खोल दिए हैं और बूथ स्तर तक एजेंटों की नियुक्ति कर दी गई है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर सीट पर प्रत्याशियों के चयन में आजम खान की भूमिका निर्णायक रहेगी।


