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Bahraich Salar Masood Ghazi Dargah पर वित्तीय गड़बड़ी के आरोप! BJP ने की पुराने रिकॉर्ड की SIT जांच की मांग
Bahraich Salar Masood Ghazi Dargah: UP के अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की है।
Bahraich Salar Masood Ghazi Dargah
Bahraich Salar Masood Ghazi Dargah: उत्तर प्रदेश के बहराइच में स्थित सैयद सालार मसूद गाजी दरगाह एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है। दरगाह के प्रबंधन और वित्तीय लेन-देन को लेकर गंभीर रूप से अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, जिसके बाद राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) अल्पसंख्यक मोर्चा, UP के अध्यक्ष कुंवर बासित अली ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग की है।
क्या है आरोप ?
पत्र में आरोप लगाया गया है कि बीते करीब 20 सालों के दौरान दरगाह के आय-व्यय, चढ़ावे (दान), संपत्तियों और अन्य वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता की कमी रही है। इसके साथ ही वक्फ संपत्तियों के आवंटन, बिक्री और हस्तांतरण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किये गए हैं। मांग की गई है कि पुराने खातों और रिकॉर्ड का ख़ास ऑडिट कराया जाए ताकि सभी वित्तीय गतिविधियों की विस्तृत रूप से जांच हो सके।
BJP नेता ने यह भी आरोप लगाया है कि इस अवधि में कुछ पूर्व जनप्रतिनिधियों और प्रभावशाली व्यक्तियों की भूमिका संदिग्ध रही है, जिसकी जांच ज़रूरी है। पत्र में यह भी कहा गया है कि पुराने चोरी और वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े मामलों की फिर से गहन समीक्षा की जाए और अगर किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय
इस बीच दरगाह की 13 सदस्यीय प्रबंधन समिति का एक दस्तावेज भी सामने आया है, जो वक़्त सब से बड़ी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। इस समिति में विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि से जुड़े लोग शामिल बताए गए हैं। समिति में शमशाद अहमद (अधिवक्ता) को अध्यक्ष और बकाउल्लाह को उपाध्यक्ष के रूप में दर्ज किया गया है। इसके अलावा यासिर शाह, जो समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक हैं, समिति के सदस्य के रूप में सूचीबद्ध हैं।
बता दे, अन्य सदस्यों में दिलशाद अहमद, सैयद अली, नूर मोहम्मद, अब्दुल रहमान उर्फ बच्चेय भारती, मकसूद अहमद राएसेनी, मोहम्मद वसीम मेकरानी, खालिद नईम (सहायक अध्यापक एवं पदेन सदस्य), मौलाना मोइनुद्दीन कादरी, अजमतुल्लाह और शमशाद अली शामिल हैं।
शुरू हो सकती है राजनीतिक बहस
राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चाओं का बाजार फिलहाल गर्म है और इसे विभिन्न दलों के बीच एक नई राजनीतिक बहस के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी दलों की तरफ से इसे राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास बताया जा रहा है, जबकि BJP पक्ष का कहना है कि मामला पूरी तरह पारदर्शिता और वित्तीय जांच से जुड़ा है।
फिलहाल राज्य सरकार की तरफ से इस मामले पर कोई भी आधिकारिक तौर पर प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन SIT जांच की मांग के बाद आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है।


