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बच्चों की गोपनीय चिट्ठी से खुला मध्याह्न भोजन का बड़ा घपला: 2 साल में ₹14 लाख का गबन
Ballia Mid Day Meal Scam: बलिया के ताजपुर मुड़ियारी इंटर कॉलेज में बच्चों की गोपनीय चिट्ठी से दो साल से चल रहे पीएम पोषण योजना के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जांच में करीब 14 लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई।
Balia News
Ballia Mid Day Meal Scam: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों के हक पर डाका डालने का एक गंभीर मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय से 29 किलोमीटर दूर बांसडीह विकास खंड स्थित ताजपुर मुड़ियारी इंटर कॉलेज में पिछले दो वर्षों से 'प्रधानमंत्री पोषण योजना' (मध्याह्न भोजन - MDM) के तहत भोजन दिए बिना कागजों में फर्जी वितरण दिखाकर लाखों रुपये का गबन किया जा रहा था। इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किसी प्रशासनिक छापे से नहीं, बल्कि कक्षा 6 से 8 तक के मासूम बच्चों की एक गोपनीय और साहसिक चिट्ठी से हुआ।
'डीएम साहब, नाम नहीं लिख सकते...': बच्चों ने गूगल से पता खोजकर भेजी चिट्ठी
प्रधानाध्यापक के डर के बावजूद बच्चों ने अपने हक के लिए आवाज उठाने का अनोखा रास्ता चुना:
गूगल सर्च से निकाला डीएम का पता: बच्चों ने गूगल पर सर्च कर जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह के कार्यालय का पता खोजा।
सामूहिक गोपनीय पत्र: डाक के माध्यम से डीएम को भेजे गए पत्र में बच्चों ने लिखा
"डीएम साहब, हम अपना नाम नहीं लिख सकते क्योंकि प्रधानाध्यापक जी हम लोगों पर ही कार्रवाई कर देंगे। कृपया इस मामले की गोपनीय जांच कराइए। हमें दो साल से मध्याह्न भोजन नहीं दिया जा रहा है।"
गोपनीय जांच के आदेश: चिट्ठी मिलते ही जिलाधिकारी ने मामले की गंभीरता को समझा और बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) मनीष कुमार सिंह एवं जिला विकास अधिकारी (DDO) को स्कूल में बिना पूर्व सूचना के गुप्त जांच करने के निर्देश दिए।
जांच में खुला ₹14 लाख का गबन और फर्जीवाड़े का खेल
प्रशासनिक टीम की स्थलीय जांच में बच्चों के सभी आरोप पूरी तरह सच पाए गए:
कागजों पर 200 बच्चों की रोजाना उपस्थिति: जांच में सामने आया कि स्कूल में बीते दो वर्षों से प्रतिदिन करीब 200 बच्चों को मध्याह्न भोजन खिलाया जाना कागजों पर दर्ज किया जा रहा था, जबकि हकीकत में एक दिन भी खाना नहीं बना।
₹14 लाख की सीधी हेराफेरी: खाद्यान्न और कन्वर्जन कॉस्ट के नाम पर सरकारी खजाने से करीब 14 लाख रुपये की अवैध निकासी कर गबन किया गया।
रसोइयों के मानदेय में भी फर्जीवाड़ा: रसोइयों को वास्तविक रूप से प्रतिमाह ₹2,000 का मानदेय मिलता है, लेकिन रिकॉर्ड में उन्हें ₹6,000 प्रतिमाह भुगतान दिखाया जा रहा था।
प्रधानाचार्य का कबूलनामा: इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य चंद्रशेखर पांडेय ने जांच टीम के समक्ष स्वीकार किया कि स्कूल में खाना नहीं बन रहा था।
प्रशासनिक तंत्र और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
मध्याह्न भोजन योजना (पीएम पोषण अभियान) की त्रिस्तरीय निगरानी व्यवस्था के बावजूद दो साल तक यह खेल चलते रहने से विभागीय मिलीभगत और लचर मॉनिटरिंग उजागर हुई है:
भोजन और भुगतान की तय प्रक्रिया:
राशन आवंटन: कक्षा 6 से 8 (उच्च प्राथमिक) के प्रति छात्र 150 ग्राम अनाज (गेहूं/चावल) प्रतिदिन निर्धारित है। (कक्षा 1 से 5 के लिए 100 ग्राम)।
कन्वर्जन कॉस्ट (सब्जी, तेल, मसाले आदि): उच्च प्राथमिक स्तर पर प्रति छात्र ₹10.17 प्रतिदिन तथा प्राथमिक स्तर पर ₹6.78 प्रतिदिन की दर से कन्वर्जन कॉस्ट सीधे खाते में भेजी जाती है।
सत्यापन तंत्र: उपस्थिति रिपोर्ट के आधार पर खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को भौतिक सत्यापन करना होता है और जिला समन्वयक (MDM) को औचक निरीक्षण की जिम्मेदारी होती है। इसके बाद ही बीएसए कार्यालय से भुगतान जारी होता है।
दो साल तक बिना भोजन बने हर महीने रिपोर्ट का पास होना और भुगतान जारी रहना सीधे तौर पर ब्लॉक व जिला स्तरीय अधिकारियों की घोर लापरवाही की ओर इशारा करता है।
प्रधानाध्यापक पर होगी FIR, अधिकारियों की तय होगी जवाबदेही
जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जांच में वित्तीय अनियमितता और गबन की पुष्टि हो चुकी है।
मुकदमा दर्ज करने के आदेश: दोषी प्रधानाध्यापक के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
विभागीय अफसरों पर गाज: फर्जी सत्यापन करने वाले संबंधित ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) और मॉनिटरिंग सेल के कर्मियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ भी कठोर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।


