Banda News: कर्ज के जाल में फंसे मजदूरों को मिली राहत, 18 लोग बंधन से मुक्त

Banda News: राजस्थान और हरियाणा के ईंट भट्ठों से मुक्त कराए गए बांदा के 18 बाल एवं बंधुआ मजदूर, पुनर्वास और प्रमाण पत्र का इंतजार।

Anwar Raza
Published on: 15 Jun 2026 8:12 AM IST
Banda News: कर्ज के जाल में फंसे मजदूरों को मिली राहत, 18 लोग बंधन से मुक्त
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Banda News: उत्तर प्रदेश के बांदा जनपद के 18 बाल एवं बंधुआ मजदूरों को राजस्थान और हरियाणा के ईंट भट्ठों से मुक्त कराया गया है। असंगठित मजदूर मोर्चा और लेबर डेवलपमेंट फाउंडेशन के प्रयासों के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए सभी मजदूरों को छुड़ाया। मुक्त कराए गए सभी मजदूर अनुसूचित जाति समुदाय से हैं और लंबे समय से कथित रूप से बंधक बनाकर उनसे काम कराया जा रहा था।

राजस्थान और हरियाणा के भट्ठों से छुड़ाए गए मजदूर

जानकारी के अनुसार 6 मजदूर राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले की रावला मंडी स्थित गणेश ब्रिक्स कंपनी से मुक्त कराए गए, जबकि 12 मजदूर हरियाणा के रेवाड़ी जिले के जाडरा गांव स्थित भगत जी ईंट भट्ठा से आजाद हुए। आरोप है कि दोनों स्थानों पर मजदूरों से जबरन काम कराया जा रहा था और उन्हें घर लौटने की अनुमति नहीं दी जा रही थी।

कर्ज के नाम पर बनाया गया बंधुआ मजदूर

राजस्थान में फंसे मजदूर नीरज ने बताया कि नवंबर 2025 में ठेकेदार पहलवान उर्फ प्रदीप उन्हें कर्ज और एडवांस का लालच देकर ट्रक के जरिए श्रीगंगानगर ले गया था। वहां पहुंचने पर मजदूरों को बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई गईं। विरोध करने पर भट्ठा मालिक सुखबीर और ठेकेदार द्वारा लाखों रुपये का कर्ज बताकर धमकाया जाता था। मजदूरों का आरोप है कि घर जाने की बात करने पर मारपीट, गाली-गलौज और बच्चों समेत भट्ठे में झोंक देने की धमकी दी जाती थी।

हरियाणा में भी मजदूरी के नाम पर शोषण

हरियाणा के रेवाड़ी जिले में फंसे रमेश और अन्य तीन परिवारों के 12 लोगों को भी नवंबर 2025 में जमादार दिलीप एडवांस देकर ले गया था। आरोप है कि कर्ज की रकम पूरी होने के बाद भी मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया और लगातार बिना पैसे के काम कराया जाता रहा।

शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई

चार और पांच जून 2026 को मामले की जानकारी मिलने के बाद असंगठित मजदूर मोर्चा ने प्रभावित परिवारों से संपर्क किया। आठ जून को मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष दल सिंगार ने राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, श्रम आयुक्त, संबंधित जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षकों के साथ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की।पत्र में बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम 1976, इंटरस्टेट माइग्रेंट वर्कमैन एक्ट 1979, एससी-एसटी एक्ट और न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी।

12 जून को मुक्त हुए मजदूर, 14 जून को पहुंचे घर

लगातार पत्राचार और अधिकारियों से बातचीत के बाद 10 और 11 जून को स्मरण पत्र भेजे गए। इसके बाद 12 जून को प्रशासनिक टीम गठित कर सभी 18 मजदूरों को मुक्त कराया गया। 14 जून को सभी मजदूर अपने गृह जनपद बांदा के बबेरू और आसपास के क्षेत्रों में सकुशल पहुंच गए।

पुनर्वास और मुक्ति प्रमाण पत्र का इंतजार

असंगठित मजदूर मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष दल सिंगार ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बंधुआ मजदूरी कानून का पूरी तरह पालन नहीं किया। उनका कहना है कि मजदूरों को पर्याप्त सुरक्षा और मुक्ति प्रमाण पत्र दिए बिना ही घर भेज दिया गया। उन्होंने बुंदेलखंड के मजदूरों की स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर न मिलने के कारण मजदूरों को पलायन करना पड़ता है।

वहीं लेबर डेवलपमेंट फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगवानदास सिंह यादव ने कहा कि मुक्त कराए गए मजदूरों का पुनर्वास नहीं होने से वे दोबारा पलायन के लिए मजबूर हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन समय पर पुनर्वास सुनिश्चित करे और बच्चों को शिक्षा से जोड़े तो बाल एवं बंधुआ मजदूरी पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। फिलहाल सभी मुक्त मजदूर अपने घर पहुंच चुके हैं, लेकिन उन्हें अब भी पुनर्वास सहायता और मुक्ति प्रमाण पत्र मिलने का इंतजार है।

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