Banda News: रावण बना रहा मुस्लिम परिवार, 80 साल से कायम है भाईचारा

Banda News: बांदा में तुफैल अहमद का परिवार चार पीढ़ियों से दशहरे के लिए रावण के पुतले बना रहा है। महंगाई बढ़ने के बावजूद परिवार ने अपनी पुश्तैनी परंपरा जारी रखी है।

Anwar Raza
Published on: 19 Oct 2026 8:04 PM IST (Updated on: 19 Oct 2026 8:10 PM IST)
Muslim family making Ravan brotherhood has been in existence for 80 years
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 रावण बना रहा मुस्लिम परिवार, 80 साल से कायम है भाईचारा (Photo- Newstrack)

Banda News: बांदा। देशभर में दशहरे का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड स्थित बांदा में इस त्योहार की एक खास पहचान है। यहां एक मुस्लिम परिवार पिछले आठ दशक से अधिक समय से हिंदू समाज के लिए रावण के विशालकाय पुतले बना रहा है। परिवार की चार पीढ़ियां इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। यह पहल बांदा की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करती है।

परदादा ने की थी शुरुआत, आज चौथी पीढ़ी संभाल रही जिम्मेदारी।

बांदा शहर के खुटला इलाके में मोदी मंदिर मोहल्ले में तुफैल अहमद अपने परिवार के साथ रावण के पुतले बनाने में जुटे हैं। तुफैल अहमद बताते हैं कि इस काम की शुरुआत उनके परदादा ने की थी। तब से परिवार का हर सदस्य दशहरा नजदीक आते ही बांस, कागज, सुतली, कपड़े और रंगों की मदद से रावण के पुतले को आकार देने में लग जाता है। पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही यह परंपरा आज भी जारी है।

महंगाई बढ़ी, लेकिन नहीं छोड़ा पुश्तैनी काम

तुफैल अहमद के मुताबिक, पहले रावण बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान सस्ती कीमत पर मिल जाता था, लेकिन अब बांस, कागज, सुतली और रंगों के दाम बढ़ गए हैं। इससे विशालकाय रावण बनाने में काफी खर्च आता है। कई बार मेहनत के हिसाब से मजदूरी भी पूरी नहीं मिल पाती। इसके बावजूद परिवार ने इस काम को कभी नहीं छोड़ा।

तुफैल अहमद का कहना है कि रावण बनाना उनके लिए केवल कारोबार नहीं, बल्कि पुश्तैनी परंपरा और सामाजिक जिम्मेदारी है। यह काम बांदा की मिली-जुली संस्कृति को जीवित रखने का जरिया भी है।

बच्चों को भी सिखाई जा रही कला

परिवार की अगली पीढ़ी भी इस कला को सीख रही है। बच्चे स्कूल से लौटने के बाद अपने पिता के साथ बांस की खपच्चियां तैयार करना, कागज चिपकाना और पुतले को रंगना सीखते हैं। इससे परिवार की परंपरा आगे बढ़ रही है।

दशहरा उत्सव में दिखता है भाईचारा

स्थानीय निवासी प्रेम प्रकाश त्रिवेदी और भानु प्रकाश खरे बताते हैं कि तुफैल अहमद के हाथों तैयार किया गया रावण हर साल दशहरा मैदान में जलाया जाता है। बांदा में विजयादशमी के दौरान अलग-अलग मोहल्लों में कई दिनों तक मेले भी लगते हैं।

धर्म के नाम पर बढ़ती दूरियों के बीच बांदा का यह मुस्लिम परिवार संदेश दे रहा है कि त्योहार और संस्कृति किसी एक धर्म तक सीमित नहीं हैं। यहां रावण का पुतला बनाने की यह परंपरा आपसी सम्मान, एकता और भाईचारे की ऐसी मिसाल है, जो गंगा-जमुनी तहजीब को आज भी जिंदा रखे हुए है।

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वरिष्ठ संवाददाता, बाँदाraanu.n18@gmail.com
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