मानवता तार-तार! पहले पैसा लाओ, फिर शव ले जाओ... पिता को मांगनी पड़ी भीख, पीड़ित की आपबीती सुन...

Bareilly News: बरेली के निजी अस्पताल ने इलाज का पूरा बिल भुगतान न होने तक मृतक का शव परिजनों को सौंपने से इनकार कर दिया। लाचार पिता ने गांव वालों और परिचितों से मदद की गुहार लगाकर पैसे जुटाए, तब जाकर उसे बेटे का अंतिम संस्कार करने का हक मिला।

Prashant Vinay Dixit
Published on: 21 Dec 2025 5:33 PM IST
मानवता तार-तार! पहले पैसा लाओ, फिर शव ले जाओ... पिता को मांगनी पड़ी भीख, पीड़ित की आपबीती सुन...
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Bareilly News: बरेली जिले से स्वास्थ्य सेवाओं और निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। एक गरीब पिता को जवान बेटे का शव हासिल करने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं। आरोप अनुसार बरेली के एक निजी अस्पताल ने इलाज का पूरा बिल भुगतान न होने तक मृतक का शव परिजनों को सौंपने से साफ इनकार कर दिया। अंत में लाचार पिता ने गांव वालों और परिचितों से मदद की गुहार लगाकर पैसे जुटाए, तब जाकर उसे बेटे का अंतिम संस्कार करने का हक मिला।

क्या है पूरा मामला?

बदायूं के दातागंज कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव नगरिया निवासी सोमनाथ वाल्मीकि का 26 वर्षीय बेटा धर्मपाल 1 दिसंबर को सड़क हादसे का शिकार हो गया था। धर्मपाल की हालत गंभीर थी, जिसके बाद उसे पहले सरकारी अस्पताल ले जाया गया। परिजनों का आरोप है कि सरकारी अस्पताल में उचित इलाज और सुविधाओं के अभाव के कारण उन्हें मजबूरी में बरेली के निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। सोमनाथ ने बताया कि अस्पताल प्रशासन ने इलाज शुरू करने के नाम पर उनसे पहले ही किस्तों में लगभग 3 लाख रुपये जमा करवा लिए थे।

पैसे लाओ, शव ले जाओ

धर्मपाल 14 दिनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ता रहा। इस दौरान अस्पताल का मीटर घूमता रहा और कुल बिल 6 लाख 10 हजार रुपये तक पहुंच गया। बीती 14 दिसंबर को डॉक्टरों ने धर्मपाल को मृत घोषित कर दिया। बेटे की मौत की खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन अस्पताल की बेरुखी ने उनके घावों पर नमक छिड़कने का काम किया। मृतक के पिता सोमनाथ का आरोप है कि जब उन्होंने बेटे का शव मांगा, तो अस्पताल प्रबंधन ने बकाया 3.10 लाख रुपये तुरंत जमा करने की शर्त रख दी।

चंदा जुटाकर शव लिया

सोमनाथ ने अस्पताल के सामने हाथ जोड़े, मिन्नतें कीं और अपनी गरीबी का हवाला दिया, लेकिन अस्पताल प्रबंधन का दिल नहीं पसीजा। अस्पताल ने स्पष्ट कह दिया कि जब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं होगा, शव नहीं दिया जाएगा। अस्पताल की कठोरता के बाद पीड़ित पिता वापस गांव और परिचितों के पास पहुंचा। अपनी जमीन, जमापूंजी पहले ही गंवा चुके सोमनाथ ने लोगों के सामने झोली फैलाई। ग्रामीणों और रिश्तेदारों ने मिलकर किसी तरह पैसे इकट्ठा किए। इस भारी-भरकम राशि को चुकाने के बाद ही अस्पताल ने धर्मपाल का शव रिलीज किया।

Prashant Vinay Dixit

Prashant Vinay Dixit

Former Reporter Mail ID - prashantdixit916917@gmail.com

Prashant Vinay Dixit is a former Reporter at Newstrack.com.

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