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Bareilly Textile Park 2026: बरेली में बनेगा 250 करोड़ का मेगा टेक्सटाइल पार्क, हजारों युवाओं और महिलाओं को मिलेगा रोजगार
Bareilly Textile Park 2026: Bareilly Textile Park 2026: उत्तर प्रदेश सरकार बरेली में ₹250 करोड़ का मेगा टेक्सटाइल पार्क विकसित करेगी। जानें रोजगार, निवेश और महिलाओं के लिए क्या होंगे फायदे।
UP Bareilly Textile Park 2026
Bareilly Textile Park 2026: टेक्सटाइल और सिलाई-कड़ाई उद्यम से जुड़े लोगों के लिए यूपी सरकार की टेक्सटाइल पार्क विकसित करने की घोषणा सौगात बनकर सामने आई है। उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए यह योजना बरेली में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करने जा रही है। लंबे समय से जिस टेक्सटाइल पार्क का इंतजार किया जा रहा था, वह अब जमीन पर उतरने की ओर बढ़ चुका है। करीब 250 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह अत्याधुनिक टेक्सटाइल पार्क न केवल बरेली मंडल की औद्योगिक तस्वीर बदल सकता है, बल्कि हजारों युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश के पांच शहरों में टेक्सटाइल पार्क विकसित करने की घोषणा के बाद बरेली परियोजना को भी गति मिल गई है। इसके लिए बहेड़ी क्षेत्र के ग्राम सैदपुर खुर्द स्थित उत्तर प्रदेश सहकारी कताई मिल की 79.61 एकड़ भूमि को पार्क के विकास हेतु निशुल्क हस्तांतरित करने का आदेश जारी किया जा चुका है। अब विभागीय स्तर पर बुनियादी तैयारियां शुरू हो गई हैं।
बहेड़ी बनेगा टेक्सटाइल उद्योग का नया केंद्र
प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क बहेड़ी से लगभग 10 किलोमीटर दूर सैदपुर खुर्द में विकसित किया जाएगा। यह स्थान भौगोलिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां से उत्तराखंड और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई औद्योगिक क्षेत्रों तक आसान पहुंच उपलब्ध है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पार्क भविष्य में बरेली को उत्तर प्रदेश के प्रमुख टेक्सटाइल और गारमेंटिंग हब के रूप में स्थापित कर सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर निवेश बढ़ेगा और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।
एक ही परिसर में मिलेंगी उद्योगों को सभी सुविधाएं
सरकार की योजना के अनुसार टेक्सटाइल पार्क को आधुनिक औद्योगिक नगरी के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां उद्योगों को संचालन के लिए जरूरी लगभग सभी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।
पार्क में प्लग एंड प्ले इंडस्ट्रियल शेड, चौड़ी सड़कें, निर्बाध बिजली आपूर्ति, जलापूर्ति व्यवस्था, कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP), वेयरहाउस, लॉजिस्टिक हब और ट्रक पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इसके अलावा श्रमिकों के लिए हॉस्टल, स्वास्थ्य सुविधाएं, सामुदायिक कैंटीन और सुरक्षा के लिए फायर स्टेशन की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है।
केवल कपड़ा उद्योग ही नहीं, सहायक इकाइयों को भी मिलेगा अवसर
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें केवल वस्त्र निर्माण इकाइयों को ही जगह नहीं मिलेगी। सरकार ने सहायक उद्योगों को भी शामिल करने की योजना बनाई है।
पार्क में बटन, जिपर, फास्टनर, ट्रिम्स, लेबल, टैग, पैकेजिंग सामग्री, तकनीकी वस्त्र, गोदाम और अन्य संबंधित उद्योग स्थापित किए जा सकेंगे। इससे एक संपूर्ण टेक्सटाइल इकोसिस्टम विकसित होगा, जहां उत्पादन से लेकर पैकेजिंग तक की अधिकांश जरूरतें स्थानीय स्तर पर पूरी हो सकेंगी। योजना के अनुसार पार्क में कम से कम 10 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना अनिवार्य होगी। साथ ही किसी एक कंपनी को कुल औद्योगिक भूमि के 40 प्रतिशत से अधिक हिस्से का आवंटन नहीं किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक निवेशकों को अवसर मिल सके।
कौशल विकास और रिसर्च पर भी रहेगा फोकस
टेक्सटाइल उद्योग में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन इकाइयां पर्याप्त नहीं होतीं। इसी को ध्यान में रखते हुए पार्क में अनुसंधान एवं विकास केंद्र (R&D सेंटर), गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशाला, कौशल विकास केंद्र और विपणन एवं प्रदर्शनी केंद्र विकसित करने का प्रस्ताव है। इससे स्थानीय युवाओं को उद्योग की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण मिलेगा और कंपनियों को प्रशिक्षित मानव संसाधन आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे रोजगार की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।
महिलाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए अवसर
टेक्सटाइल और गारमेंटिंग उद्योग को श्रम-प्रधान क्षेत्र माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में महिलाओं को रोजगार मिलता है। बरेली और आसपास के जिलों में बड़ी संख्या में महिलाएं सिलाई, कढ़ाई, वस्त्र प्रसंस्करण और पैकेजिंग जैसे कार्यों में दक्ष हैं।
ऐसे में यह टेक्सटाइल पार्क महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। अनुमान है कि प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
उद्योगों को मिलेगा आकर्षक वित्तीय प्रोत्साहन
उत्तर प्रदेश सरकार की टेक्सटाइल एवं गारमेंटिंग नीति-2022 के तहत यहां स्थापित होने वाली इकाइयों को कई प्रकार की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
नीति के अनुसार प्लांट और मशीनरी पर 25 प्रतिशत तक पूंजी अनुदान उपलब्ध होगा। इसके अलावा उद्योगों द्वारा लिए गए ऋण पर ब्याज की 60 प्रतिशत तक प्रतिपूर्ति का प्रावधान भी किया गया है।
सरकार का उद्देश्य निवेशकों की शुरुआती लागत कम करना और नए उद्योगों को प्रदेश में निवेश के लिए आकर्षित करना है।
पीपीपी मॉडल पर भी विकसित हो सकता है पार्क
यदि टेक्सटाइल पार्क का विकास सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर किया जाता है तो राज्य सरकार मास्टर डेवलपर को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक पूंजी अनुदान प्रदान करेगी। यह सहायता अधिकतम 50 लाख रुपये प्रति एकड़ की सीमा तक उपलब्ध होगी और इसे छह किस्तों में जारी किया जाएगा। वहीं यदि परियोजना का विकास सीधे नोडल एजेंसी के माध्यम से किया जाता है तो सरकार परियोजना लागत के बराबर ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध करा सकती है।
पुराने भवनों को हटाने का काम शुरू
परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए पुराने कताई मिल परिसर के भवनों को ध्वस्त करने और निष्क्रिय मशीनरी को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही बिजली, पानी और सड़क जैसी आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए संबंधित विभागों से विस्तृत प्रस्ताव मांगे गए हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि भूमि विकास और आधारभूत ढांचे का काम चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा ताकि जल्द से जल्द औद्योगिक इकाइयों की स्थापना शुरू हो सके।
उद्यमियों से मांगे गए ऑनलाइन आवेदन
हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग ने पार्क में उद्योग स्थापित करने के इच्छुक उद्यमियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। इसके लिए सहायक आयुक्त, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग बरेली परिक्षेत्र सर्वेश कुमार शुक्ला को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इस परियोजना में प्रदेश के साथ-साथ अन्य राज्यों के निवेशक भी रुचि दिखाएंगे।
क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
बरेली लंबे समय से कृषि और व्यापार आधारित अर्थव्यवस्था के लिए जाना जाता रहा है। जबकि पिछले कुछ वर्षों में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के प्रयास तेज हुए हैं। ऐसे में टेक्सटाइल पार्क की स्थापना क्षेत्र के आर्थिक ढांचे में बड़ा बदलाव ला सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार देगी बल्कि बरेली को राष्ट्रीय टेक्सटाइल मानचित्र पर भी मजबूत पहचान दिलाएगी। यदि योजना निर्धारित समय पर पूरी होती है तो आने वाले वर्षों में बहेड़ी क्षेत्र उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण वस्त्र उत्पादन केंद्रों में शामिल हो सकता है।


