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यूपी चुनाव से पहले संभल में छिड़ी ‘बर्क बनाम नवाब’ की जंग, कहीं सपा के लिए न खड़ी हो जाए नई टेंशन?
Bark vs Nawab in Sambhal: संभल में बर्क और नवाब परिवार के बीच बढ़ती तल्खी से सपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 2027 चुनाव से पहले टिकट को लेकर दोनों खेमों की दावेदारी ने सियासी हलचल बढ़ा दी है।
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Bark vs Nawab in Sambhal: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है। इस बार के चुनावी महाभारत में संभल (Sambhal Politics) राजनीतिक केंद्र में रहने वाला है। भारतीय जनता पार्टी से लेकर असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम तक संभल को लेकर अपने-अपने सियासी दांव चल रही हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी के अंदर भी ‘बर्क बनाम नवाब’ की सियासी तलवार खिंच गई है।
सपा के लोकसभा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने अपने पिता ममलूकुर्रहमान बर्क को संभल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाने का ऐलान कर सियासी हलचल बढ़ा दी है। दूसरी तरफ संभल से सपा के सात बार के विधायक नवाब इकबाल महमूद पहले से ही अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं। ऐसे में 2027 से पहले संभल की सियासत में सपा के लिए टिकट का सवाल बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
जियाउर्रहमान ने पिता के लिए मांगा टिकट
जियाउर्रहमान बर्क का कहना है कि उनके पिता सभी की मदद करते हैं। इसी आधार पर उन्होंने मौजूदा सपा विधायक इकबाल महमूद के बजाय अपने पिता के लिए टिकट की दावेदारी पेश की है। सांसद के इस कदम से संभल की सियासत में हलचल तेज हो गई है।
सपा सांसद के मुताबिक, अगर उनके पिता लोगों की मदद करते हैं तो उन्हें चुनाव लड़ने का मौका क्यों नहीं मिलना चाहिए। वहीं, बर्क परिवार का कहना है कि वे समाजवादी पार्टी में हैं और उन्हें भरोसा है कि पार्टी का विधानसभा टिकट उन्हें ही मिलेगा, क्योंकि संभल की जनता उनके साथ है।
नवाब इकबाल महमूद सात बार के विधायक
संभल विधानसभा सीट पर नवाब इकबाल महमूद लगातार सात बार से विधायक हैं। वह खुद या फिर अपने बेटे सुहेल इकबाल को चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे में जियाउर्रहमान बर्क की ओर से अपने पिता ममलूकुर्रहमान बर्क की दावेदारी सामने रखने के बाद मुकाबला सपा के अंदर ही दिलचस्प हो गया है।
संभल की सियासत में दोनों ही परिवारों का मजबूत प्रभाव माना जाता है। सपा के लिए दोनों ही राजनीतिक घराने अहम हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अखिलेश यादव संभल में दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक संतुलन कैसे कायम करते हैं।
‘नवाब बनाम बर्क’ की अदावत पुरानी
संभल की सियासत में नवाब इकबाल महमूद और बर्क परिवार के बीच राजनीतिक अदावत नई नहीं है। यह लंबे समय से चली आ रही है। दोनों परिवारों के राजनीतिक रिश्तों में खींचतान पहले भी दिखाई देती रही है।
सांसद शफीकुर्रहमान बर्क के जिंदा रहते हुए भी दोनों परिवारों के बीच यह तकरार देखी गई थी। इकबाल महमूद के खिलाफ ममलूकुर्रहमान बर्क और जियाउर्रहमान बर्क पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें राजनीतिक शिकस्त नहीं दे सके।
यह सियासी अदावत नब्बे के दशक से चली आ रही है। संभल की राजनीति लंबे समय से बर्क और नवाब परिवारों के बीच बंटी हुई बताई जाती है।
लोकसभा में बर्क, विधानसभा में नवाब
मुलायम सिंह यादव के दौर से लेकर अखिलेश यादव के नेतृत्व तक संभल विधानसभा सीट का टिकट लगातार नवाब इकबाल महमूद को मिलता रहा है। दूसरी तरफ लोकसभा चुनाव में बर्क परिवार को तरजीह मिलती रही है।
पहले शफीकुर्रहमान बर्क और उनके निधन के बाद जियाउर्रहमान बर्क को सपा ने संभल से लोकसभा चुनाव में उतारा। दादा और पोते दोनों ही लोकसभा चुनाव जीतने में कामयाब रहे। हालांकि विधानसभा के मैदान में नवाब इकबाल महमूद ही लगातार बढ़त बनाए रहे हैं।
दोनों परिवार एक-दूसरे को मात देने के लिए अपने-अपने राजनीतिक दांव चलते रहे हैं और अब 2027 के चुनाव से पहले एक बार फिर दोनों आमने-सामने खड़े नजर आ रहे हैं।
अखिलेश यादव के सामने बढ़ी चुनौती
संभल में सियासी समीकरण पहले से ही अखिलेश यादव के लिए चिंता का विषय बने हुए थे। अब नवाब इकबाल महमूद और बर्क परिवार के बीच खुलकर सामने आई दावेदारी ने समाजवादी पार्टी के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।
मुस्लिम बहुल संभल सीट पर नवाब इकबाल और बर्क परिवार दोनों का अपना-अपना मजबूत राजनीतिक आधार है। हालिया घटनाओं के बाद जियाउर्रहमान बर्क सपा की मुस्लिम सियासत के एक प्रमुख युवा चेहरे के रूप में उभरे हैं और उन्हें अखिलेश यादव के करीबी नेताओं में गिना जाने लगा है।
दूसरी तरफ नवाब इकबाल महमूद सपा के पुराने और कद्दावर नेताओं में शामिल हैं। वह मुलायम सिंह यादव से लेकर अखिलेश यादव की कैबिनेट का हिस्सा भी रहे हैं। सात बार से संभल के विधायक होने के कारण क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ बताई जाती है।
टिकट का फैसला किसके पक्ष में होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2027 के विधानसभा चुनाव (UP Election 2027) में संभल से समाजवादी पार्टी किसे मैदान में उतारेगी। एक तरफ नवाब इकबाल महमूद अपने राजनीतिक वारिस के तौर पर बेटे सुहेल इकबाल को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं, तो दूसरी तरफ जियाउर्रहमान बर्क के सांसद बनने के बाद उनके पिता ममलूकुर्रहमान बर्क की नजर विधानसभा की सीट पर है।
दोनों पक्षों का अपना राजनीतिक आधार है, लेकिन विधानसभा का टिकट आखिरकार किसी एक को ही मिल सकता है। संभल को सपा की परंपरागत और सुरक्षित सीट माना जाता है, जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं।
ऐसे में दोनों परिवारों के बीच चल रही बयानबाजी और टिकट की दावेदारी से पार्टी के सामने आंतरिक संतुलन की चुनौती खड़ी हो गई है। अब देखना होगा कि 2027 के चुनाव से पहले अखिलेश यादव इस सियासी उलझन को सुलझाने के लिए कौन सा फॉर्मूला अपनाते हैं।


