Basti News: गर्भपात के प्रयास के दौरान किशोरी की हालत बिगड़ी, जांच के घेरे में अस्पताल

Basti News: साढ़े पांच महीने की गर्भवती किशोरी को गंभीर हालत में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, मामले में अस्पताल के पंजीकरण और इलाज की जांच के सवाल।

Amril Lal
Published on: 16 Oct 2026 10:45 PM IST
Teens condition deteriorates during abortion attempt, hospital surrounded by checks
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गर्भपात के प्रयास के दौरान किशोरी की हालत बिगड़ी, जांच के घेरे में अस्पताल (Photo- Newstrack)

Basti News: बस्ती जिले में साढ़े पांच महीने की गर्भवती किशोरी के गर्भपात के प्रयास के दौरान गंभीर हालत में पहुंचने का मामला सामने आया है। आरोप है कि कैली रोड स्थित बिना पंजीकरण वाले परम अस्पताल में गर्भपात की कोशिश के दौरान किशोरी की आंत और बच्चेदानी को गंभीर नुकसान पहुंचा। हालत बिगड़ने और लगातार रक्तस्राव होने के बाद परिजन उसे लेकर अस्पतालों के चक्कर लगाते रहे। बाद में उसे गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उसकी जान बचाने की कोशिश की। इस घटना ने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और अवैध चिकित्सा गतिविधियों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गर्भपात के प्रयास के दौरान बिगड़ी हालत

जानकारी के मुताबिक, किशोरी बस्ती के कचहरी क्षेत्र की रहने वाली है और शहर के एक इंटर कॉलेज में पढ़ती है। उसके पिता अयोध्या में भूसे की दुकान चलाते हैं। बताया गया है कि पड़ोस में रहने वाले एक युवक से संबंध के बाद किशोरी गर्भवती हो गई थी। परिवार उसे गर्भपात कराने के लिए कथित तौर पर झोलाछाप टेक्नीशियन केपी मिश्रा उर्फ सोनू के पास ले गया।

आरोप है कि 9 अक्टूबर की रात गर्भपात का प्रयास किया गया। इस दौरान किशोरी की छोटी आंत और बच्चेदानी को गंभीर नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उसकी आंत का बड़ा हिस्सा निकालना पड़ा। इसके बाद किशोरी को पेट में तेज दर्द और लगातार रक्तस्राव होने लगा, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई।

कैली मेडिकल कॉलेज से बीआरडी मेडिकल कॉलेज किया गया रेफर

किशोरी की हालत बिगड़ने पर परिजन उसे पहले कैली मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। वहां से उसे गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। यहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन किया। फिलहाल किशोरी की हालत गंभीर बताई जा रही है।

बिना पंजीकरण अस्पताल कैसे चल रहा था?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि परम अस्पताल का पंजीकरण नहीं था, तो वहां चिकित्सा गतिविधियां कैसे संचालित हो रही थीं। कथित झोलाछाप की योग्यता और गर्भपात के प्रयास की परिस्थितियों की जांच जरूरी है। अब स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की कार्रवाई पर नजर है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी राजीव निगम, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर दुर्गेश कुमार और कैली मेडिकल कॉलेज के सर्जन शैलेन्द्र सिंह के बयान भी इस मामले से जुड़े हैं। जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम और जिम्मेदारी की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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वरिष्ठ संवाददाता, बस्तीbastiamrillal@newstrackensite.vocalwire.com
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