Bijnor News: बिजनौर डीएम ने कस्तूरबा स्कूल में छात्राओं संग किया भोजन

Bijnor News: जिलाधिकारी जसजीत कौर ने भोजन की गुणवत्ता परखी और पढ़ाई समेत अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया, वार्डन से छात्राओं को मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी ली।

Faisal Khan
Published on: 21 Aug 2026 11:03 PM IST
Bijnor DM had lunch with students at Kasturba School
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बिजनौर डीएम ने कस्तूरबा स्कूल में छात्राओं संग किया भोजन (Photo- Newstrack)

Bijnor News: बिजनौर की जिलाधिकारी जसजीत कौर ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय धर्मनगरी का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने विद्यालय में रहकर पढ़ाई कर रही बालिकाओं के साथ बैठकर भोजन किया और खाने की गुणवत्ता को भी परखा। जिलाधिकारी ने छात्राओं से बातचीत कर उनकी पढ़ाई के साथ विद्यालय में मिलने वाली अन्य सुविधाओं और व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी ली।

वार्डन ने बताया सुबह से रात तक मिलने वाले भोजन का मेन्यू

निरीक्षण के दौरान विद्यालय की वार्डन ने जिलाधिकारी को बताया कि बालिकाओं को सुबह नाश्ते में फल और दूध दिया जाता है। इसके बाद दोपहर के भोजन में निर्धारित मेन्यू के अनुसार दाल, चावल, रोटी, सब्जी, रायता और सलाद उपलब्ध कराया जाता है। शाम के समय छात्राओं को चाय, बिस्किट, चने और परमल दिया जाता है। इसके बाद रात में शाम सात बजे भोजन उपलब्ध कराया जाता है।


जिलाधिकारी ने विद्यालय में छात्राओं के साथ भोजन कर भोजन की गुणवत्ता को परखा और विद्यालय की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान पढ़ाई से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर भी जानकारी ली गई।

निरीक्षण के बाद व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे सवाल

जिलाधिकारी के निरीक्षण के दौरान विद्यालय की व्यवस्थाएं ठीक-ठाक नजर आईं। हालांकि, इस पूरे मामले में एक सवाल यह भी उठता है कि वार्डन की ओर से जिलाधिकारी को भोजन और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर जो जानकारी दी गई, वह रोजाना की वास्तविक स्थिति में भी पूरी तरह इसी तरह रहती है या नहीं।

जिलाधिकारी के दौरे के दौरान स्कूल की व्यवस्थाएं बेहतर तरीके से तैयार की गई हों, यह भी चर्चा का विषय है। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि छात्राओं को सामान्य दिनों में भी उसी गुणवत्ता और व्यवस्था के साथ भोजन और सुविधाएं मिलती हैं या नहीं, जैसी व्यवस्था जिलाधिकारी की मौजूदगी में दिखाई गई।


मीडिया की पहुंच को लेकर भी सवाल

कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में बाहरी लोगों की पहुंच को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। इन विद्यालयों में मीडिया के जाने की बात तो दूर है, दूसरे विभागों के अधिकारियों को भी प्रवेश के लिए अनुमति लेनी पड़ती है। ऐसे में विद्यालय की रोजाना की व्यवस्थाओं की स्वतंत्र रूप से पड़ताल करना आसान नहीं होता।

यदि मीडिया को भी इन विद्यालयों में जाकर व्यवस्थाओं को देखने और छात्राओं से बातचीत करने की अनुमति मिले, तो जमीनी स्थिति की तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है। इससे यह भी पता चल सकेगा कि छात्राओं को सामान्य दिनों में भोजन और अन्य सुविधाएं उसी सम्मान और गुणवत्ता के साथ मिल रही हैं या नहीं, जैसी व्यवस्था जिलाधिकारी जसजीत कौर की मौजूदगी में देखने को मिली।

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