Bijnor News: आधुनिक मिठाइयों के दौर में फीकी पड़ी बिजनौर की ‘खंड की मिठाई’

Bijnor News: बिजनौर की पारंपरिक खंड की मिठाई आधुनिक मिठाइयों के दौर में अपनी पहचान खोती जा रही है। कभी दीपावली पर बच्चों की पहली पसंद रही हाथी-घोड़े और करवा की आकृतियों वाली इस मिठाई की परंपरा को विवेक कुमार आज भी आगे बढ़ा रहे हैं।

Faisal Khan
Published on: 7 Nov 2026 2:03 PM IST
Bijnor News: आधुनिक मिठाइयों के दौर में फीकी पड़ी बिजनौर की ‘खंड की मिठाई’
X

Bijnor News

Bijnor News: बदलते दौर और आधुनिकता की चकाचौंध में खानपान से लेकर त्योहार मनाने के तौर-तरीकों तक में बदलाव आ गया है। दीपावली पर बाजार में तरह-तरह की मिठाइयों और आकर्षक उपहारों की भरमार रहती है। इसी बीच बिजनौर की पहचान रही पारंपरिक ‘खंड की मिठाई’ का चलन धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। हालांकि, शहर में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इस पुरानी विरासत को आज भी सहेजने में जुटे हैं। इन्हीं में विवेक कुमार का नाम शामिल है, जो पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

विवेक कुमार बताते हैं कि उनके दादा-परदादा के समय से ही खंड की मिठाई बनाने और बेचने का काम होता आ रहा है। परिवार की इस परंपरा को उन्होंने भी जारी रखा है। इस मिठाई की खास पहचान इसकी अलग-अलग आकृतियां हैं। इसे हाथी, घोड़े, करवा और अन्य आकर्षक रूपों में तैयार किया जाता है। इसकी पारंपरिक बनावट और अनूठा अंदाज इसे दूसरी मिठाइयों से अलग पहचान देते हैं।

कभी दीपावली पर बच्चों की पहली पसंद थी खंड की मिठाई

एक समय था, जब दीपावली के दौरान बाजार में खंड की मिठाई की खूब मांग रहती थी। रंग-बिरंगे हाथी, घोड़े और अन्य आकृतियों वाली मिठाइयां बच्चों के आकर्षण का केंद्र हुआ करती थीं। बच्चे अपनी पसंद की आकृतियां खरीदकर बड़े चाव से खाते थे। उस दौर में यह मिठाई केवल खाने की चीज नहीं, बल्कि दीपावली के उत्साह और बचपन की यादों का भी अहम हिस्सा थी।

आधुनिक मिठाइयों के बीच कम हुआ पारंपरिक मिठाई का चलन

समय के साथ बाजार में मिठाइयों की नई किस्में और आकर्षक पैकेजिंग वाले उत्पाद आने से लोगों की पसंद में बदलाव आया है। इसका असर खंड की मिठाई के चलन पर भी पड़ा है। नई पीढ़ी जहां आधुनिक मिठाइयों की ओर आकर्षित हो रही है, वहीं पुरानी पीढ़ी के लोग आज भी इस पारंपरिक मिठाई को पसंद करते हैं।विवेक कुमार का कहना है कि परिवार की पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को आगे बढ़ाना उनके लिए खास महत्व रखता है। उनके प्रयास से बिजनौर की यह पुरानी मिठाई आज भी अपनी पारंपरिक पहचान बनाए हुए है।

बिजनौर की खंड की मिठाई केवल एक पारंपरिक व्यंजन नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक विरासत और लोगों की पुरानी यादों से जुड़ी पहचान भी है। बदलते समय में इस तरह की परंपराओं को सहेजने का प्रयास स्थानीय संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

Faisal Khan
ABOUT THE AUTHOR

Faisal Khan

faisalkhan.newstrack.com@gmail.com
Next Story