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यूपी चुनाव 2027: पूर्वांचल में क्या है BJP का 'बैक टू बेसिक' फॉर्मुला? 2024 से सबक लेकर 2027 में सपा को पटकने तैयारी
पार्टी बूथ स्तर पर फीडबैक जुटाने, स्थानीय समस्याओं को समझने और दलित, पिछड़े वर्गों व युवा मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है।
यूपी चुनाव 2027: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी संगठनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं। खास तौर पर पूर्वांचल में पार्टी का जोर बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने और जनता के बीच दोबारा सक्रियता बढ़ाने पर है। वाराणसी में काशी और गोरक्ष क्षेत्र की 133 विधानसभा सीटों के प्रभारियों, विस्तारकों और पालकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम में पार्टी ने जमीनी स्तर पर काम करने पर जोर दिया।
इस रणनीति को 'बैक टू बेसिक' यानी संगठन की बुनियादी ताकत को फिर से मजबूत करने के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी की कोशिश है कि कार्यकर्ता लगातार लोगों के संपर्क में रहें, उनकी समस्याएं समझें और सरकार के कामकाज को लेकर मिल रही प्रतिक्रियाओं को संगठन तक पहुंचाएं।
बूथ स्तर पर सक्रियता बढ़ाने पर जोर
प्रशिक्षण कार्यक्रम में पदाधिकारियों को 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों की तर्ज पर संगठन को मजबूत करने और जनता से लगातार संपर्क बनाए रखने के निर्देश दिए गए। इसी कड़ी में कार्यकर्ताओं को बाइक देकर अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय किया गया है। उनकी जिम्मेदारी केवल पार्टी के कार्यक्रमों में भाग लेने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उन्हें लोगों से मिलकर सरकार, स्थानीय विधायकों और प्रशासन के कामकाज पर उनकी राय भी जाननी होगी। संगठन चाहता है कि क्षेत्र से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर स्थानीय समस्याओं और लोगों की नाराजगी को समझा जाए, ताकि समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें।
दलित-पिछड़े समाज और नए वोटर्स पर खास नजर
बीजेपी ने विस्तारकों को दलित और पिछड़े समाज के लोगों से नियमित संवाद करने और उनकी समस्याओं को समझने के निर्देश दिए हैं। पार्टी यह जानने की कोशिश करेगी कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक कितना पहुंच रहा है और उन्हें किन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा स्थानीय विधायकों के व्यवहार और लोगों की शिकायतों पर अधिकारियों की प्रतिक्रिया के बारे में भी जानकारी जुटाई जाएगी।
नए वोटर्स और जेन-जी यानी युवा मतदाताओं की उम्मीदों को समझने पर भी जोर दिया गया है। विस्तारकों को विधानसभा प्रभारियों और बूथ पालकों के साथ तालमेल बनाकर काम करने को कहा गया है। पार्टी की रणनीति है कि जनता से मिलने वाली प्रतिक्रियाओं के जरिए संगठन की कमियों और स्थानीय स्तर पर पैदा हो रही नाराजगी की पहचान की जाए।
2024 के लोकसभा चुनाव से सबक लेने की कोशिश
प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल एक विस्तारक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े और प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने संगठन को मजबूत बनाने और 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से मिले संकेतों पर ध्यान देने को कहा। उनके मुताबिक, पार्टी के भीतर इस बात को लेकर चिंता है कि जिस काशी क्षेत्र में बीजेपी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया था, वहां 2024 के लोकसभा चुनाव में उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
विस्तारक ने कहा कि पार्टी ने लंबे समय की मेहनत से पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की है और संगठन उसे कमजोर नहीं होने देना चाहता। इसी वजह से अब विधानसभा स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने और लोगों से लगातार संपर्क बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
काशी क्षेत्र में विधानसभा और लोकसभा चुनाव के नतीजों में अंतर
काशी क्षेत्र के 16 जिलों में विधानसभा की कुल 71 सीटें हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने इनमें से 42 सीटों पर जीत हासिल की थी। बनारस, मिर्जापुर और सोनभद्र में भी पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में काशी क्षेत्र की 14 सीटों में से 10 पर बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। इन नतीजों के बाद पार्टी विधानसभा स्तर पर अपने संगठन को ज्यादा सक्रिय बनाने और जनता से संपर्क बढ़ाने पर ध्यान दे रही है।
पुराने कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की तैयारी
प्रशिक्षण के दौरान विधानसभा प्रभारियों को पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मान के साथ साथ लेकर क्षेत्र में जाने के निर्देश दिए गए। उनसे कहा गया कि वे स्थानीय लोगों से मिलें, उनकी राय जानें और शिकायतों को संगठन तक पहुंचाएं। बूथ पालकों को भी अपने अनुभव के आधार पर पार्टी के हित में जरूरी सुझाव विस्तारकों और विधानसभा प्रभारियों के साथ साझा करने को कहा गया है।
बीजेपी का जोर इस बात पर है कि चुनाव की तैयारी केवल बड़ी रैलियों और नेताओं की सभाओं तक सीमित न रहे। इसके बजाय बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनता से संवाद लगातार बना रहे। पार्टी चाहती है कि संगठन की कमजोरियों और लोगों की नाराजगी का पता चुनाव से पहले ही लगाया जा सके।
विकास कार्यों के प्रचार और विपक्ष के कार्यकाल पर भी जोर
बीजेपी पदाधिकारियों को उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था में हुए बदलावों और विकास कार्यों की जानकारी जनता तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। सोशल मीडिया के जरिए क्षेत्र में चल रही विकास परियोजनाओं और सरकारी योजनाओं के बारे में लोगों को बताने पर भी जोर दिया गया है।
इसके साथ ही विधानसभा प्रभारियों से समाजवादी पार्टी (SP) की पिछली सरकार के दौरान हुए कथित भ्रष्टाचार और आपराधिक घटनाओं का मुद्दा भी जनता के बीच उठाने को कहा गया है। इस रणनीति के तहत पार्टी मौजूदा सरकार के कामकाज को सामने रखने के साथ विपक्ष के पिछले शासनकाल से तुलना करने पर भी ध्यान दे रही है।
कुल मिलाकर, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी पूर्वांचल में संगठन की बुनियाद मजबूत करने, जनता से सीधे प्रतिक्रिया लेने और पुराने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की कोशिश में जुटी है। 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी का जोर इस बात पर है कि विधानसभा स्तर पर संपर्क और संगठन की सक्रियता को लगातार बनाए रखा जाए।


