'क्या झूठ बोल दूं...' UP चुनाव पर बृजभूषण शरण सिंह का बेबाक बयान, BJP के लिए बड़ा संकट!

Brij Bhushan Sharan Singh on UP Election: यूपी चुनाव 2027 से पहले बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह के बेबाक बयान ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने माना कि इस बार चुनाव में सीधी और कड़ी टक्कर होगी और 10 साल की सत्ता के कारण एंटी-इन्कंबेंसी का असर भी हो सकता है।

Harsh Srivastava
Published on: 9 Aug 2026 4:26 PM IST
क्या झूठ बोल दूं... UP चुनाव पर बृजभूषण शरण सिंह का बेबाक बयान, BJP के लिए बड़ा संकट!
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Brij Bhushan Sharan Singh on UP Election: उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष आयोजित होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सूबे की राजनीतिक सरगर्मियां बेहद तेज हो गई हैं। हर जुबान पर यही बड़ा सवाल तैर रहा है कि क्या उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मजबूत नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी या फिर एक दशक से सत्ता का सूखा झेल रहे अखिलेश यादव और कांग्रेस पार्टी का विपक्षी गठबंधन बाजी मार ले जाएगा। इसी सियासी बहस के बीच भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद और कद्दावर नेता बृजभूषण शरण सिंह का एक बेहद चौंकाने वाला और बेबाक बयान सामने आया है, जिसने राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है।

'क्या हम झूठ बोलें, इस बार असली फाइट है'

एक प्रमुख राष्ट्रीय समाचार चैनल 'एबीपी न्यूज' को दिए गए अपने खास साक्षात्कार में बृजभूषण शरण सिंह से जब आगामी चुनाव के नतीजों को लेकर सीधा सवाल दागा गया, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के बड़ा बयान दे दिया। जब एंकर ने उनसे पूछा कि क्या राज्य में इस बार बीजेपी की एकतरफा लहर रहेगी, तो भाजपा नेता ने तुरंत जवाब दिया कि इस बार सूबे में सीधी और कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा। जब उन्हें याद दिलाया गया कि वे सत्ताधारी दल के ही जिम्मेदार नेता हैं, तो उन्होंने साफ लहजे में कहा कि अपनी पार्टी का होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे जनता से सच छिपाएं या राजनीतिक हकीकत पर झूठ बोलें।

10 साल के शासन और एंटी-इन्कंबेंसी का असर

साक्षात्कार के दौरान विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के 37 सांसदों की पिछली बड़ी जीत पर चर्चा करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने स्पष्ट किया कि राजनीति में परिस्थितियां समय के साथ तेजी से बदलती रहती हैं। उन्होंने खुले तौर पर स्वीकार किया कि लगातार 10 वर्षों तक सत्ता में रहने के कारण किसी भी मौजूदा सरकार के खिलाफ स्वाभाविक रूप से जनता में सत्ता विरोधी लहर यानी 'एंटी-इन्कंबेंसी' पैदा हो जाती है। इसी जमीनी हकीकत की वजह से आगामी चुनावी जंग भारतीय जनता पार्टी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण और टफ रहने वाली है।

राम मंदिर चंदा चोरी विवाद का चुनावी असर

अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की कथित चोरी के बहुचर्चित मुद्दे पर बोलते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि शुरुआत में इस विषय से विपक्ष को कुछ राजनीतिक सहानुभूति जरूर हासिल हुई थी, लेकिन अब यह दांव पूरी तरह से उलटा पड़ता दिखाई दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे विवाद में अब ऐसे तत्व भी शामिल हो चुके हैं जिन्हें भगवान श्रीराम या सनातन परंपरा से कोई खास सरोकार नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधा आरोप नहीं लगा रहे हैं, क्योंकि उनके पिता स्वयं को हनुमान जी का और अखिलेश खुद को भगवान श्रीकृष्ण का अनन्य भक्त बताते रहे हैं।

भगवा लिबास को बदनाम करने की साजिश

बृजभूषण शरण सिंह ने पूरे दावे के साथ कहा कि मंदिर का यह विवाद आगामी चुनावों में कोई बड़ा मुद्दा नहीं बन पाएगा, क्योंकि जनता केवल वर्तमान सरकार के विकास कार्यों और प्रदर्शन के आधार पर ही वोट करेगी। उन्होंने संसद के भीतर साधु-संतों का भेष धारण कर किए गए विरोध प्रदर्शन पर तीखी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पैसों की गिनती करने का काम बैंक के कर्मचारियों और वेतनभोगियों का था, इसलिए इस मामले में निर्दोष साधु-संतों या भगवा वस्त्रों को बेवजह कटघरे में खड़ा कर बदनाम करना पूरी तरह से गलत और निंदनीय है।

विकास कार्यों और मुद्दों पर लड़ा जाएगा चुनाव

भाजपा के कद्दावर नेता के इस बेबाक रुख के बाद राज्य का सियासी माहौल पूरी तरह गरमा गया है। जहां एक ओर विपक्ष इस बयान को भाजपा के भीतर छिपी घबराहट के रूप में पेश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई बेहद रोचक, कांटे की और बहुकोणीय होने जा रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले महीनों में ऊंट किस करवट बैठता है।

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हर्ष श्रीवास्तव वाराणसी के रहने वाले पत्रकार और डिजिटल कंटेंट प्रोफेशनल हैं। वर्तमान में वे लखनऊ स्थित न्यूज़ट्रैक में डेस्क इंचार्ज के पद पर कार्यरत हैं। यहां वे कंटेंट प्लानिंग, एडिटोरियल कोऑर्डिनेशन, न्यूज़रूम संचालन के साथ-साथ रिसर्च आधारित एक्सप्लेनर, न्यूज़ फीचर और विश्लेषणात्मक लेख तैयार करते हैं। उनके पास मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (MJMC) की डिग्री है। उन्होंने वर्ष 2023 में पत्रकारिता की शुरुआत की और हिन्दुस्तान, टाइम्स इंटरनेट, इंडिया न्यूज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। वाराणसी, दिल्ली और लखनऊ में काम करने के दौरान उन्हें रिपोर्टिंग, कंटेंट राइटिंग और डिजिटल पत्रकारिता का अनुभव प्राप्त हुआ। हर्ष की विशेष रुचि राजनीति, चुनाव, अपराध, सार्वजनिक नीति, सुशासन और समसामयिक विषयों पर शोध-आधारित पत्रकारिता में है। वे गहन रिसर्च, फैक्ट-चेकिंग और सरल भाषा के माध्यम से जटिल विषयों को पाठकों तक सटीक, विश्वसनीय और प्रभावी ढंग से पहुंचाने का प्रयास करते हैं।

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