BSP Politics: सपा के गढ़ में सेंधमारी की तैयारी... पश्चिमी यूपी से मायावती ने शुरू की बड़ी घेराबंदी

BSP Politics: बहुजन समाज पार्टी 2007 विधानसभा चुनाव की तर्ज पर एक बार फिर सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले को धार देने में जुटी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मायावती मुस्लिम चेहरों पर बड़ा दांव खेल सकती हैं।

Shivam Shrivastava
Published on: 26 May 2026 8:54 PM IST (Updated on: 26 May 2026 8:55 PM IST)
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BSP Politics: बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती प्रदेश में खोई हुई जमीन वापस पाने के लिये पुरजोर कोशिश में जुट गई हैं। 2012 के बाद से पार्टी का जनाधार और चुनावी ग्राफ में भारी गिरावट आई है। बसपा सुप्रीमो इस बार दावा प्रदेश में पांचवी बार सरकार बनाने का दावा कर रही है और मौजूदा समय में पार्टी के लिये इस पहाड़ जैसे लक्ष्य को हासिल करने के लिये जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने का सिलसिला तेज हो गया है।

पार्टी जिलेवार सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले को एकबार फिर धार दे रही है। मायावती का फोकस अपने कोर वोटर दलित मतदाताओं के साथ ब्राह्मण और मुस्लिम मतदाताओं को दोबारा अपने पाले में लाने की है। मुसलमानों के रिझाने के लिये बसपा सुप्रीमो कई बार खुले मंच से अपील की है कि प्रदेश में चल रहे बुलडोजर जस्टिस और मुठभेड़ से बचने के लिये वो सभी बसपा का दामन एक बार फिर थाम लें।

बसपा में बड़े मुस्लिम चेहरे की कमी

बसपा के पराभव के बाद से ही बड़े मुस्लिम चेहरों ने पार्टी का साथ छोड़ा दिया था। नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी से बाहर निकालने के बाद या तो मुस्लिम नेताओं ने पार्टी को छोड़ दिया या तो उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। इसी कमी को पाटकर मायावती एक बार मुस्लिम समाज को अपने साथ फिर जोड़ने की कोशिश में लग गई हैं।

वेस्ट यूपी है पार्टी का विशेष फोकस

वेस्ट यूपी की दो दर्जन से ज्यादा सीटों पर मुस्लिम मतदाताओं के साथ दलित वोटरों की संख्या 25 से 40 फीसदी तक है। अगर इन सीटों पर मुस्लिम और दलित वोटरों के साध लिया गया तो पार्टी की राह विधानसभा में बेहद आसान हो जायेगी

सपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश

प्रदेश में मुस्लिम समाज अभी पूरी तरह से समाजवादी पार्टी के साथ खड़ा नजर आ रहा है। सपा ने अपने संगठन में मुस्लिम नेताओं को तरजीह देकर समाज अपनी पकड़ मजबूत बना ली है। इसी पकड़ को ढीला करना बसपा के लिये सबसे बड़ी चुनौती है। इसी जद्दोजहद में पार्टी अब लोकल लेवल पर बड़े मुस्लिम चेहरों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है। जिसके बाद पार्टी उनको चुनावी मैदान में भी उतार सकती है।

सर्वे के बाद ही मिलेगा टिकट

चुनाव के दौरान किसी भी तरह की चूक से बचने के बसपा इस बार बेहद फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। टिकट वितरण से पहले पार्टी आलाकमान जमीनी लेवल विस्तृत सर्वे करवा रही है। संगठन ने सभी पदाधिकारियों के एक्टिव मोड में ला दिया है ताकि विधानसभावार गहन रिपोर्ट तैयार की जा सके। पार्टी का पूरा ध्यान ऐसी सीटों पर ज्यादा है। जहां मुस्लिम और दलित आबादी निर्णायक स्थिति में हो।

Shivam Shrivastava

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Shivam Shrivastava is Senior Content Writer

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