TRENDING TAGS :
Chandauli News: चमकते विज्ञापनों के बीच धीना स्टेशन की बदहाल हकीकत: कब मिलेगी बुनियादी सुविधाएं?
Chandauli News: डीडीयू-दानापुर रेलखंड पर स्थित धीना रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं का टोटा। महिला शौचालय, साफ पानी और बेंच न होने से यात्री परेशान।
Chandauli News: एक तरफ जहां भारतीय रेलवे 'वंदे भारत' जैसी आधुनिक ट्रेनों की रफ्तार और विश्वस्तरीय स्टेशनों की चमचमाती तस्वीरों से विकास का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। डीडीयू-दानापुर रेलखंड पर स्थित धीना रेलवे स्टेशन आज भी उन बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है, जो हर रेल यात्री का बुनियादी हक हैं। आखिर विकास की यह रोशनी छोटे स्टेशनों तक कब पहुंचेगी?
चमकती तस्वीरों से दूर, बदहाली का शिकार धीना स्टेशन
सोशल मीडिया और विज्ञापनों में रेलवे का कायाकल्प देखकर ऐसा लगता है कि पूरे देश का रेल नेटवर्क आधुनिक हो चुका है। लेकिन पंडित दीन दयाल उपाध्याय (डीडीयू) - दानापुर रेलखंड के धीना स्टेशन पर कदम रखते ही यह भ्रम टूट जाता है। बड़े स्टेशनों की तुलना में इस छोटे स्टेशन पर सुविधाओं का घोर अभाव है। ऐसा प्रतीत होता है कि रेलवे प्रशासन की प्राथमिकताओं में ऐसे छोटे और ग्रामीण क्षेत्र के स्टेशन दूर-दूर तक शामिल नहीं हैं।
बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे यात्री
धीना रेलवे स्टेशन पर दैनिक यात्रियों और ग्रामीणों को हर दिन भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यहाँ की प्रमुख समस्याएँ इस प्रकार हैं:महिलाओं के लिए शौचालय का न होना: सबसे गंभीर और शर्मनाक बात यह है कि यहाँ महिला यात्रियों के लिए एक भी चालू शौचालय उपलब्ध नहीं है, जिससे उन्हें असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है।अस्वच्छ पेयजल व्यवस्था: स्टेशन पर लगे हैंडपंप और पानी की टंकियों की नियमित सफाई न होने के कारण यात्रियों को दूषित पानी पीने पर मजबूर होना पड़ता है।बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं: प्लेटफॉर्म पर यात्रियों के बैठने के लिए पर्याप्त बेंच तक नहीं हैं, जिसके कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को घंटों खड़े रहकर ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है।
सिर्फ ट्रेन नहीं, सम्मानजनक सफर चाहिए
वंदे भारत की हाई-स्पीड रफ्तार से देश निश्चित रूप से आगे बढ़ रहा है, लेकिन धीना स्टेशन पर यात्री आज भी स्वच्छ पानी और शौचालय जैसी प्राथमिक जरूरतों का इंतजार कर रहे हैं।
रेलवे प्रशासन को प्रचार-प्रसार की चमक से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत की तरफ देखना होगा। विकास का असली मकसद तभी पूरा होगा जब बड़े मेट्रो शहरों के साथ-साथ धीना जैसे छोटे स्टेशनों का भी कायाकल्प हो। यात्रियों को केवल गंतव्य तक पहुंचने के लिए ट्रेन ही नहीं, बल्कि एक सम्मानजनक और सुविधाजनक सफर का माहौल भी चाहिए


