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Chandauli News: नौगढ़ अस्पताल में बिजली कटौती से मरीज बेहाल, टॉर्च की रोशनी में इलाज का आरोप
Chandauli News: चंदौली के नौगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बिजली कटौती से मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। इमरजेंसी में टॉर्च और मोबाइल फ्लैशलाइट के सहारे इलाज का आरोप है।
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Chandauli News: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले का नौगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आजकल इलाज से कम और बिजली कटौती से ज्यादा चर्चा में है। रात होते ही यह अस्पताल मरीजों को सेहत सुधारने की जगह बिजली कटने का खौफ देने लगता है। 11kV आउटगोइंग फीडर रोस्टिंग के नाम पर हर शाम 7:15 बजे से रात 9:15 बजे (19.15 से 21.15) तक पूरा अस्पताल परिसर अंधेरे के आगोश में समा जाता है। जब इलाज करने वाली जगह ही खुद बेनूर हो जाए, तो मरीजों के दर्द का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
इमरजेंसी में 'टॉर्च' ही सहारा, मरीज बेहाल
कटौती का यह खेल सिर्फ 2 घंटे के आधिकारिक शेड्यूल तक सीमित नहीं है। रात भर में कई बार रुक-रुक कर बिजली काटी जाती है। सबसे शर्मनाक और खौफनाक स्थिति डिलीवरी के लिए आई गर्भवती महिलाओं और गंभीर हालत में पहुंचे इमरजेंसी मरीजों के साथ होती है। जब जान बचाने के लिए एक-एक सेकेंड की कीमत होती है, तब डॉक्टर और तीमारदार मोबाइल की फ्लैशलाइट या टॉर्च के भरोसे पसीना बहाते नजर आते हैं। उमस भरी गर्मी में भर्ती मरीजों का दम घुटने लगता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं।
सिस्टम लाचार, जिम्मेदार मौन
हैरानी की बात यह है कि एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को हाईटेक करने और 24 घंटे बिजली देने के लंबे-चौड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ नौगढ़ का यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बुनियादी रोशनी तक को तरस रहा है। जनरेटर और बैकअप की व्यवस्था कागजों तक सीमित दिखती है। रात में जब पूरा अस्पताल अंधेरे में डूबता है, तो सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
मरीजों की एक ही मांग: कम से कम रोशनी तो दो!
मरीजों के परिजनों और स्थानीय लोगों में इस कुव्यवस्था को लेकर भारी रोष है। लोगों का कहना है कि अगर रोस्टिंग या बिजली कटौती तकनीकी रूप से बेहद जरूरी है, तब भी अस्पताल परिसर के अंदर कम से कम इमरजेंसी बैकअप या इन्वर्टर से रोशनी का इंतजाम तो किया ही जाना चाहिए। आखिर कब तक मरीज और डॉक्टर इस लापरवाही की कीमत चुकाते रहेंगे? सवाल सीधा है—क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही बिजली विभाग और अस्पताल प्रशासन की नींद टूटेगी?


