Chandauli News: पीरियड पर टूटेगी चुप्पी, तो संवरेगा स्वास्थ्य: नौगढ़ में किशोरियों ने उठाई आवाज़

Chandauli News: चंदौली के नौगढ़ में ग्राम्या संस्थान द्वारा आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में किशोरियों ने मासिक धर्म से जुड़े मिथकों और रूढ़िवादी सोच के खिलाफ आवाज उठाई और स्वच्छता व जागरूकता का संदेश दिया।

Sunil Kumar
Published on: 28 May 2026 6:10 PM IST
Chandauli News: पीरियड पर टूटेगी चुप्पी, तो संवरेगा स्वास्थ्य: नौगढ़ में किशोरियों ने उठाई आवाज़
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Chandauli News: मासिक धर्म यानी माहवारी कोई बीमारी या शर्म की बात नहीं, बल्कि एक सामान्य और प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है। इसी संदेश को घर-घर तक पहुँचाने के लिए 28 मई को 'अंतर्राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य कार्रवाई दिवस' और 'मासिक धर्म स्वच्छता दिवस' के रूप में मनाया गया। इस खास मौके पर चंदौली के नौगढ़ में ग्राम्या संस्थान द्वारा एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 20 अलग-अलग गाँवों की किशोरियों ने हिस्सा लिया और माहवारी से जुड़े सामाजिक मिथकों को तोड़कर खुलकर जीने का संकल्प लिया।

रूढ़िवादी सोच और भेदभाव से घुटती हैं बेटियाँ

कार्यक्रम के दौरान किशोरियों ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि आज के आधुनिक दौर में भी माहवारी को लेकर समाज की सोच नहीं बदली है। आज भी पीरियड्स के दिनों में लड़कियों को रसोई में जाने से रोका जाता है और किसी भी शुभ काम में शामिल होने की मनाही होती है। इस भेदभाव के कारण कई लड़कियाँ उन दिनों स्कूल नहीं जा पातीं और खुद को समाज से कटा हुआ महसूस करती हैं। अपनों के इस बदले व्यवहार से उनके मन में हीनभावना पैदा हो जाती है, और शर्म के मारे वे किसी से अपना दर्द भी बयां नहीं कर पातीं।

शर्म छोड़ना और स्वच्छता अपनाना है ज़रूरी

ग्राम्या संस्थान के बैनर तले हुई इस चर्चा में किशोरियों को समझाया गया कि किशोरावस्था में मासिक धर्म का आना एक सामान्य शारीरिक बदलाव है, इसमें अछूत जैसा कुछ भी नहीं है। वक्ताओं ने ज़ोर देकर कहा कि इस विषय पर झिझक और शर्म को छोड़ना बेहद ज़रूरी है। इसके साथ ही, माहवारी के दौरान साफ़-सफ़ाई का ध्यान रखना महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। गंदे कपड़े का इस्तेमाल करने से कई गंभीर बीमारियाँ हो सकती हैं, इसलिए स्वच्छता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

'चुप्पी तोड़ो' के नारों से गूँजा परिसर

कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागी किशोरियों ने माहवारी से जुड़ी कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज़ उठाई। उन्होंने समाज की इस चुप्पी को तोड़ने और खुलकर बात करने का पूरा समर्थन किया। इस दौरान किशोरियों ने जोश के साथ नारे भी लगाए ताकि अन्य महिलाओं को भी जागरूक किया जा सके।इस प्रेरणादायक कार्यक्रम में दिव्या, शालिनी, प्रियंका, प्रिया, साधना, अंजलि, वंदना, शिवांगी, नीलू, आकृति और विभा जैसी कई किशोरियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। वहीं ग्राम्या संस्थान की ओर से सुनीता, अजमेरी, अंजू और प्रीतम ने उनका मार्गदर्शन किया। पूरे कार्यक्रम का सफल संचालन नीतू द्वारा किया गया।

Shalini singh

Shalini singh

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उप संपादक | डिजिटल मीडिया पत्रकार

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